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अदम्य साहस, वीरता और विजय : करगिल युद्ध की 20वीं सालगिरह पर जीत के दृश्यों को फिर से प्रदर्शित करेगी इंडियन आर्मी

Updated at : 06 Jul 2019 6:23 PM (IST)
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अदम्य साहस, वीरता और विजय : करगिल युद्ध की 20वीं सालगिरह पर जीत के दृश्यों को फिर से प्रदर्शित करेगी इंडियन आर्मी

गर्खों (जम्मू कश्मीर) : भारतीय सैनिक करगिल से पाकिस्तानी घुसपैठियों को खदेड़कर वहां विजयी पताका फहराने की 20वीं सालगिरह पर ‘ऑपरेशन विजय’ के जीत के दृश्यों को 26 जुलाई को फिर से प्रदर्शित करेंगे. बटालिक सेक्टर में नियंत्रण रेखा (एलओसी) के पास रहने वाले लोगों ने कहा कि वे उस क्षण को फिर से जीना […]

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गर्खों (जम्मू कश्मीर) : भारतीय सैनिक करगिल से पाकिस्तानी घुसपैठियों को खदेड़कर वहां विजयी पताका फहराने की 20वीं सालगिरह पर ‘ऑपरेशन विजय’ के जीत के दृश्यों को 26 जुलाई को फिर से प्रदर्शित करेंगे. बटालिक सेक्टर में नियंत्रण रेखा (एलओसी) के पास रहने वाले लोगों ने कहा कि वे उस क्षण को फिर से जीना चाहते हैं, जब सैनिकों ने भीषण युद्ध के बाद तिरंगा फहराया था. बटालिक सेक्टर में ही कुछ बाशिंदों ने पाकिस्तानी सैनिकों को घुसपैठ करते मई, 1999 में सबसे पहले देखा था.

इसे भी देखें : कारगिल युद्ध की 20वीं वर्षगांठ : वायुसेना ने ग्वालियर हवाई अड्डे को ‘युद्ध थियेटर’ में बदला

‘ऑपरेशन विजय’ की 20वीं सालगिरह ‘रिमेंबर, रिज्वाइस एंड रिन्यू’ की थीम के साथ मनायी जायेगी. तीन बटालियनों के सैनिक उन पर्वत चोटियों पर जायेंगे, जहां उनकी टुकड़ियों ने घुसपैठियों को खदेड़ने के लिए कठिन परिस्थितियों में जंग लड़ी थी. सेना के एक अधिकारी ने शनिवार को कहा कि हम अपने शहीद नायकों के बलिदान को ‘याद (रिमेंबर)’ करेंगे. हम करगिल में हमारी जीत का जश्न (रिजाइस) मनायेंगे और हम तिरंगे के सम्मान की रक्षा करने के अपने संकल्प को दोहरायेंगे (रिन्यू).

उन्होंने कहा कि 2 राजपूताना राइफल्स के सैनिक तोतोलिंग शिखर, 13 जम्मू-कश्मीर रायफल्स के जवान प्वाइंट 4875 और 1/9 गोरखा राइफल खलुबर शिखर पर जायेंगे. बटालिक में युद्ध लड़ चुके एक अन्य अधिकारी ने कहा कि हर कोई तोतोलिंग और टाइगर हिल की बात करता है, लेकिन खलुबर, जुबर और खुकरथांग में युद्ध और भी कठिन था. उन्होंने कहा कि दुर्गम क्षेत्र और शून्य डिग्री सेल्सियस से भी कम तापमान के साथ सामरिक रूप से भी बटालिक की लड़ाई अधिक कठिन थी.

अधिकारी ने कहा कि शत्रु एक बड़े इलाके में काफी अंदर तक घुस आये थे. इसका यह अर्थ हुआ कि हमें कम संसाधनों के साथ कहीं अधिक पर्वत चोटियों से दुश्मनों को खदेड़ना था और वहां फिर से कब्जा करना था. बटालिक सेक्टर में मुश्किल परिस्थितियों में जंग के लिए लेफ्टिनेंट मनोज कुमार पांडेय को देश के सर्वोच्च वीरता पुरस्कार परम वीर चक्र से सम्मानित किया गया था.

बटालिक सेक्टर के गर्खों गांव निवासी सेरिंग डोल्कर ने कहा कि उन्हें देश की सेना पर गर्व है, जिसने इन दुर्गम क्षेत्रों में कठिन लड़ाई लड़ी और अपनी चौकियों को फिर से हासिल कर लिया. एक अन्य ग्रामीण डी नाम्गयाल ने कहा कि हम ‘ऑपरेशन विजय’ की 20वीं सालगिरह में भाग लेने के लिए उत्सुक हैं. हम अपने शहीद जवानों को श्रद्धांजलि देने के लिए द्रास में युद्ध स्मारक जायेंगे. हम सैन्य बलों और टुकड़ियों को जीत के दृश्य को फिर से प्रदर्शित करते देखना चाहते हैं.

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