हरियाणा : इस बार राज्य में 11 महिलाएं चुनावी दंगल में, 53 सालों में महज पांच महिलाएं ही संसद पहुंचीं

Updated at : 01 May 2019 6:12 AM (IST)
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हरियाणा : इस बार राज्य में 11 महिलाएं चुनावी दंगल में, 53 सालों में महज पांच महिलाएं ही संसद पहुंचीं

सात महिलाएं निर्दलीय उम्मीदवार चंडीगढ़ : हरियाणा के गठन से ले कर अब तक यहां से मात्र पांच महिलाएं ही संसद तक पहुंच पायीं हैं. इस बार आम चुनाव में 11 महिलाएं अपनी किस्मत आजमां रहीं हैं. दुखद यह है कि अपने कम लिंगानुपात के लिए आलोचना के घेरे में रहने वाले इस राज्य से […]

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सात महिलाएं निर्दलीय उम्मीदवार
चंडीगढ़ : हरियाणा के गठन से ले कर अब तक यहां से मात्र पांच महिलाएं ही संसद तक पहुंच पायीं हैं. इस बार आम चुनाव में 11 महिलाएं अपनी किस्मत आजमां रहीं हैं.
दुखद यह है कि अपने कम लिंगानुपात के लिए आलोचना के घेरे में रहने वाले इस राज्य से पिछले लोकसभा चुनाव में कोई भी महिला जीत हासिल नहीं कर सकी थी. यहां छह संसदीय सीटें ऐसी हैं जहां से लोगों ने कभी किसी महिला को नहीं जिताया है. इस बार के चुनावों में खास बात यह भी है कि राज्य में 11 में से सात महिलाएं बतौर निर्दलीय उम्मीदवार चुनावी दंगल में ताल ठोंक रही हैं, पर इतिहास उनके पक्ष में गवाही नहीं दे रहा है. यहां आज तक कोई निर्दलीय महिला उम्मीदवार विजयी घोषित नहीं हुई है.
एक नवंबर 1966 को हरियाणा अलग राज्य बना, इससे पहले यह पंजाब का हिस्सा था. तब से कुल 151 सांसद हुए, जिनमें आठ महिला सांसद हुईं. भिवानी महेंद्रगढ़ से 2009 में सांसद रहीं बंसी लाल की पोती एक बार फिर मैदान में हैं. उन्होंने कहा, महिलाएं सशक्त राजनीतिज्ञ हो सकती हैं. मेरी मां (किरण चौधरी) ने खुद को साबित किया. यह दुखद है कि अब तक बहुत कम संख्या में महिलाएं सांसद निर्वाचित हुई हैं.
कब कौन महिला उम्मीदवार जीतीं
अंबाला सीट से कुमारी शैलजा 2004-09 में कांग्रेस टिकट पर सांसद चुनी गयीं. कैलाशो सैनी 1999 में इनैलो से व 1998 में एच एल डी, आर के टिकट पर कुरुक्षेत्र से सांसद रहीं. चंद्रावती भिवानी से 1977 में बी एल डी से सांसद निर्वाचित हुईं. यहीं से 2009 में श्रुति चौधरी कांग्रेस से सांसद चुनी गयीं. 1999 में महेंद्रगढ़ संसदीय सीट से सुधा यादब भाजपा से सांसद बनी थीं.
पहली महिला सांसद बनीं चंद्रवती
पहली महिला सांसद की बात करें तो यह श्रेय चंद्रवती को हासिल है. वह जनता पार्टी के टिकट पर 1977 में भिवानी सीट से विजयी हुईं थीं. उन्होंने तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के बेहद निकट समझे जाने वाले नेता बंसी लाल को हराया था. हालांकि बाद में वह कांग्रेस में शामिल हो गयीं थीं और 1990 में पुड्डुचेरी की राज्यपाल भी बनीं.
तीन बार लोकसभा पहुंचीं कुमारी शैलजा
कांग्रेस की कुमारी शैलजा ही एकमात्र ऐसी महिला हैं, जो तीन बार लोकसभा पहुंच सकी है. दो बार अंबाला सीट से और एक बार सिरसा सीट से. शैलजा ने कहा, राज्य ने खूब तरक्की की है, लेकिन जब महिलाओं की बात आती है तो अभी बहुत कुछ किया जाना बाकी है. इस समस्या को हल करने के लिए अधिक से अधिक महिलाओं को आगे आना होगा.
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