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टोंक-सवाई माधोपुर में सचिन पायलट की साख और कौशल की होगी परीक्षा

Updated at : 29 Apr 2019 7:34 AM (IST)
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टोंक-सवाई माधोपुर में सचिन पायलट की साख और कौशल की होगी परीक्षा

मीणा बनाम गुर्जर की प्रतिद्वंद्विता में फंसा दलों का चुनावी पेच सवाई माधोपुर से अंजनी कुमार सिंह राज्य का टोंक और सवाईमाधोपुर जिला शुरू से ही गुर्जर-मीणा संघर्ष का गवाह रहा है. हाल तक गुर्जर आंदोलन को लेकर चर्चित रहे किरोड़ी सिंह बैंसला भाजपा में शामिल हो गये हैं, तो सचिन पायलट टोंक विस सीट […]

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मीणा बनाम गुर्जर की प्रतिद्वंद्विता में फंसा दलों का चुनावी पेच
सवाई माधोपुर से अंजनी कुमार सिंह
राज्य का टोंक और सवाईमाधोपुर जिला शुरू से ही गुर्जर-मीणा संघर्ष का गवाह रहा है. हाल तक गुर्जर आंदोलन को लेकर चर्चित रहे किरोड़ी सिंह बैंसला भाजपा में शामिल हो गये हैं, तो सचिन पायलट टोंक विस सीट से निर्वाचित होकर उप मुख्यमंत्री बने हैं. यह दोनों के लिए प्रतिष्ठा की सीट बन गयी है. सचिन पायलट की साख और कौशल की भी परीक्षा होगी, क्योंकि विस चुनाव में गुर्जर मतदाताओं की गोलबंदी कांग्रेस के पक्ष में हुई थी, लेकिन अब समीकरण बदले हुुए है. एक ओर भाजपा प्रत्याशी गुर्जर समुदाय से हैं, तो वहीं दूसरी ओर गुर्जर आंदोलन के नेता किरोडी सिंह बैंसला भी अब भाजपा के साथ हो गये हैं.
मीणा कांग्रेस के, गुर्जर भाजपा के सपोर्ट में
सवाई माधोपुर से 30 किलोमीटर दूर उनियारा पंचायत में गुर्जर और मीणा की तादाद लगभग बराबर है. दोनों समुदाय आपस में भाईचारा के साथ रहते है, लेकिन चुनाव की चर्चा पर जहां मीणा समुदाय कांग्रेस को सपोर्ट करने की बात कहते है, वहीं गुर्जर भाजपा को, जबकि पहले मीणा भाजपा को तो गुर्जर कांग्रेस को सपोर्ट करते रहे है.
गुर्जर समुदाय के लोगों में कांग्रेस को लेकर नाराजगी इस बात को लेकर भी है कि विधानसभा चुनाव में आंख मूंद कर कांग्रेस को सपोर्ट करने के बाद भी पार्टी ने सचिन पायलट को मुख्यमंत्री नहीं बनाया. इन इलाकों में मीणा बनाम गुर्जर की प्रतिद्वंद्विता जगजाहिर है, लेकिन कांग्रेस को सपोर्ट करने वाले गुर्जर भी इस बार असमंजस में दिख रहे हैं. करमोदा गांव में जहां कांग्रेस की स्थिति मजबूत दिख रही है, वहीं पुसौद में भाजपा की. तुरवाल और खिरणी में लोगों के अलग-अलग मत हैं.
इस लोकसभा सीट में टोंक जिले की चार विधानसभा और सवाईमाधोपुर जिले की चार विस सीटें है. परिसीमन के बाद इस क्षेत्र में 2009 में हुए पहले संसदीय चुनाव में कांग्रेस के नमो नारायण मीणा और गुर्जर आरक्षण आंदोलन के प्रणेता कर्नल किरोड़ी सिंह बैंसला के बीच मुकाबला हुआ और मीणा 317 वोटों से चुनाव जीतने में सफल रहे.
हालांकि पिछले आम चुनाव में भाजपा की ओर से सुखबीर सिंह जौनपुरिया मैदान में उतरे और उन्होंने कांग्रेस उम्मीदवार अजहरुद्दीन को बड़े अंंतर से हरा दिया. एक बार फिर जौनपुरिया भाजपा प्रत्याशी हैं, तो कांग्रेस ने नमोनारायण मीणा पर दांव लगाया है. बांगर धर्मशाला के पास लोगों की भीड़ है. धूप से बचने के लिए लोग छांव में बैठ कर धूप ढलने के इंतजार कर रहें हैं. चुनावी चर्चा भी हो रही है. भाजपा प्रत्याशी जयपुरिया के काम न करने को लेकर नाराजगी भी है, लेकिन लोग मोदी के नाम पर ही वोट का फैसला होने की बात कह रहे हैं.
हाल में हुए विधानसभा चुनाव के नतीजे
कांग्रेस 06
भाजपा 01
निर्दलीय 01
कुल सीटें 08
लोकसभा चुनाव, 2014 में यहां हार गये थे अजहरुद्दीन
फिर भी मोदी पसंद
सांसद से लोगों में कई तरह की नाराजगी भी है, पर मोदी उनकी पसंद हैं. वे मोदी के नाम पर ही वोट का फैसला होने की बात कह रहे हैं. प्रदीप कौरवाल कहते हैं, मुकाबला बराबर का है, जबकि राजू चौधरी कहते है, भाजपा की जीत पक्की है.
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