चुनावी स्याही तीसरे चुनाव में आयी पहली बार
Author Prabhat khabar digital desk
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वोटिंग के बाद मतदाता स्याही लगी अंगुली की फोटो सोशल मीडिया पर बेहद गर्व के साथ पोस्ट करता है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि अंगुली में स्याही लगाने की शुरुआत 1962 में हुई? दरअसल, 1952 व 57 के चुनावों में एक से अधिक वोट डालने वालों को रोकने में चुनाव आयोग को दिक्कत हुई […]
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वोटिंग के बाद मतदाता स्याही लगी अंगुली की फोटो सोशल मीडिया पर बेहद गर्व के साथ पोस्ट करता है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि अंगुली में स्याही लगाने की शुरुआत 1962 में हुई? दरअसल, 1952 व 57 के चुनावों में एक से अधिक वोट डालने वालों को रोकने में चुनाव आयोग को दिक्कत हुई तो उसने मैसूर की नेशनल फिजिकल लैब से मदद मांगी. लैब ने यह अनूठी स्याही तैयार की. आज भी यही लैब स्याही बनाती है. 35 देशों को भी भेजती है. कंपनी का दावा है कि 5 मिली लीटर स्याही 300 लोगों के लिए काफी है.
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