62 सालों से हारते रहे हैं श्याम बाबू, फिर आजमायेंगे किस्मत

नयी दिल्ली : भारत में लोकसभा चुनाव की तैयारियां जोरों पर हैं. नेता भी टिकट के जुगाड़ में लगे हैं. लेकिन एक शख्स ऐसा है जो 1957 से चुनाव लड़ रहा है और हर चुनाव में उसकी हार होती है. ओडिशा के 84 साल के श्याम बाबू सुबुधी अब तक सभी चुनाव हार चुके हैं, […]
नयी दिल्ली : भारत में लोकसभा चुनाव की तैयारियां जोरों पर हैं. नेता भी टिकट के जुगाड़ में लगे हैं. लेकिन एक शख्स ऐसा है जो 1957 से चुनाव लड़ रहा है और हर चुनाव में उसकी हार होती है. ओडिशा के 84 साल के श्याम बाबू सुबुधी अब तक सभी चुनाव हार चुके हैं, लेकिन उनको उम्मीद है एक न एक दिन उन्हें जरूर चुना जायेगा. इसी उम्मीद के साथ वह इस बार भी लोकसभा चुनाव लड़ेंगे. उन्होंने इस बार ओड़िशा की गंजम जिले की दो सीट- अस्का और बरहामपुर से निर्दलीय लड़ने का फैसला लिया है.
बता दें कि उन्होंने 1957 में तत्कालीन मंत्री वृंदावन नायक के खिलाफ पहला चुनाव लड़ा था. बरहमपुर में स्कूल को लेकर उनका झगड़ा हो गया था. जिसके बाद उन्होंने चुनाव लड़ने का फैसला लिया. एक साक्षात्कार में उन्होंने कहा, मैं हिंजिली विधानसभा क्षेत्र से लड़ा था और हार गया था. श्याम बाबू भले ही हार गये, लेकिन उनका स्टाइल लोगों के बीच काफी पॉपुलर हो गया है.
पीएम, सीएम के खिलाफ भी लड़ा चुनाव
1996 में उन्होंने अपने जीवन का सबसे अहम चुनाव लड़ा था. इस बार उनके सामने बरहमपुर सीट से पूर्व प्रधानमंत्री पीवी नरसिम्हा राव थे. जाहिर है उनको हार का सामना करना पड़ा. इतना ही नहीं वह ओड़िशा के पूर्व मुख्यमंत्री बीजू पटनायक और जेबी पटनायक के खिलाफ भी मैदान में उतर चुके हैं.
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