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उमर अब्दुल्ला की मांग : J&K में सरकार बनाने के लिए खरीद-फरोख्त की रिपोर्टों को सार्वजनिक करें राज्यपाल

Updated at : 22 Nov 2018 6:00 PM (IST)
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उमर अब्दुल्ला की मांग : J&K में सरकार बनाने के लिए खरीद-फरोख्त की रिपोर्टों को सार्वजनिक करें राज्यपाल

श्रीनगर : नेशनल कान्फ्रेंस के नेता उमर अब्दुल्ला ने गुरुवार को जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल सत्यपाल मलिक से राज्य में सरकार बनाने के लिए विधायकों की खरीद-फरोख्त के बारे में आयी रिपोर्टों को सार्वजनिक करने की मांग की है. उन्होंने कहा कि जनता को जानने का अधिकार है कि विधायकों को कौन खरीद रहा था. उन्होंने […]

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श्रीनगर : नेशनल कान्फ्रेंस के नेता उमर अब्दुल्ला ने गुरुवार को जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल सत्यपाल मलिक से राज्य में सरकार बनाने के लिए विधायकों की खरीद-फरोख्त के बारे में आयी रिपोर्टों को सार्वजनिक करने की मांग की है. उन्होंने कहा कि जनता को जानने का अधिकार है कि विधायकों को कौन खरीद रहा था. उन्होंने भाजपा नेता राम माधव से भी पाकिस्तान के इशारे पर गठबंधन के आरोप को साबित करने अन्यथा इसके लिए माफी की मांग की. मलिक द्वारा अपने फैसले के बचाव के बाद अब्दुल्ला ने यह मांग की.

इसे भी पढ़ें : उमर अब्दुल्ला ने राम माधव को दी चुनौती, कहा- सबूत के साथ साबित करें कि हमें पाकिस्तान ने निर्देश दिया

मलिक ने विधानसभा भंग करने के अपने फैसले का बचाव करते हुए दावा किया कि ‘बड़े पैमाने पर खरीद-फरोख्त’ चल रही थी और ‘विरोधी राजनीतिक विचारधाराओं’ वाले दलों के लिए स्थिर सरकार बनाना असंभव होता. उन्होंने कहा कि उन्होंने राज्य के हित और इसके संविधान के अनुरूप यह फैसला लिया. मलिक ने यहां राजभवन में संवाददाताओं से कहा कि पिछले 15 से 20 दिन में मुझे बड़े पैमाने पर खरीद-फरोख्त की खबरें मिलती रही हैं. विधायकों को धमकाया जा रहा है और पर्दे के पीछे से कई तरह के सौदे चल रहे हैं.

जम्मू-कश्मीर में पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती द्वारा सरकार बनाने का दावा पेश किये जाने के कुछ ही देर बाद राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने बुधवार की रात राज्य विधानसभा को भंग कर दिया. पीडीपी ने नेकां और कांग्रेस के समर्थन से सरकार बनाने का दावा पेश किया था. पीडीपी के दावे के बाद दो सदस्यीय पीपुल्स कान्फ्रेंस ने भी भाजपा और अन्य पार्टियों के 18 विधायकों के समर्थन से सरकार बनाने का दावा किया था.

राज्यपाल सत्यपाल मलिक द्वारा विधानसभा भंग किए जाने के एक दिन बाद संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए अब्दुल्ला ने प्रदेश में सरकार बनाने के लिए विधायकों की खरीद-फरोख्त और धन के उपयोग संबंधी दावों की जांच कराने की मांग की. उन्होंने कहा कि जब राज्यपाल ने खुद स्वीकार किया है कि विधायकों की खरीद-फरोख्त हो रही है, पैसे का लेन-देन हो रहा है, तो लोग यह जानना चाहेंगे कि यह सब कौन कर रहा है. यदि राज्यपाल के पास ऐसी रिपोर्ट हैं, तो उन्हें इसे सार्वजनिक करना चाहिए.

उन्होंने कहा कि ये आरोप हमारे नहीं हैं. वह तो राज्यपाल हैं, जिन्होंने कहा है कि विधायकों की खरीद-फरोख्त हो रही है और पैसे दिये जा रहे हैं. हम जानना चाहते हैं कि किसकी तरफ से ये पैसे दिये गये? हम जानना चाहते हैं कि किसके कहने पर ये पैसे दिये जा रहे हैं और किसे खरीदा जा रहा है? उन्होंने कहा कि धन के इस्तेमाल और विधायकों की खरीद-फरोख्त के आरोप एनसीपी-पीडीपी-कांग्रेस के महागठबंधन पर नहीं लगाये जा सकते.

मलिक का संकेत दूसरे पत्र की ओर है, जिसमें पीपुल्स कांन्फ्रेंस के चेयरमैन सज्जाद गनी लोन ने सरकार बनाने का दावा पेश किया. उमर ने कहा कि राज्यपाल ने पीडीपी के दावे को स्वीकार नहीं करने के कारण दिये. उनका कहना है कि अलग-अलग विचारधारा की पार्टियां एक साथ आकर स्थिर सरकार कैसे दे सकती है. इस पर मैं उनसे पूछना चाहता हूं कि क्या आपने 2015 में यह सवाल किया था, जब भाजपा और पीडीपी ने गठबंधन किया था.

कुछ भाजपा नेताओं ने आरोप लगाये हैं कि पाकिस्तान के कहने पर यह गठबंधन किया गया है. इस पर उन्होंने भाजपा महासचिव राम माधव से सबूत पेश करें, नहीं तो माफी मांगने के लिए कहा है. उन्होंने कहा कि राम माधव अगर आपमें साहस है, तो आप लोगों के सामने अपने आरोपों को लेकर सबूत रखिये. हम देखते हैं कि आप कहां खड़े हैं. इस कायरतापूर्ण राजनीति को बंद करिये. अब्दुल्ला ने कहा कि देश की सम्प्रभुता की रक्षा के लिए नेशनल कांफ्रेंस के कार्यकर्ताओं के बलिदान को आप नहीं भुला सकते हैं. उन्हें माफी मांगनी चाहिए.

इसके बाद राम माधव ने गुरुवार को अपने ट्वीट में कहा कि परेशान न हों, उमर अब्दुल्ला.. आपकी देशभक्ति पर सवाल नहीं उठा रहा हूं, लेकिन नेशनल कांफ्रेंस और पीडीपी के बीच अचानक उमड़े प्रेम और सरकार बनाने की जल्दबाजी के कारण कई संदेह पैदा हुए और राजनीतिक टिप्पणी आयी. आपको कष्ट पहुंचाने के लिए नहीं.

राम माधव ने पहले ही कहा था कि पीडीपी-एनसी ने पिछले महीने निकाय चुनाव का बहिष्कार करने का ऐलान किया था, वह आदेश भी उन्हें सीमा पार से आया था. ऐसा लगता है कि राज्य में सरकार बनाने को लेकर साथ आने के बारे में उन्हें नए निर्देश मिले होंगे. इसी कारण राज्यपाल को इस विषय पर विचार करना पड़ा.

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