अमित शाह पर महबूबा का पलटवार, कहा-गठबंधन के एजेंडे से पीडीपी कभी नहीं हटी

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श्रीनगर : भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के आरोपों का पुरजोर खंडन करते हुए पीडीपी प्रमुख एवं जम्मू कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने रविवारको कहा कि उनकी पार्टी के खिलाफ झूठे आरोप लगाये गये, जबकि वह साझा न्यूनतम कार्यक्रम के प्रति अपनी प्रतिबद्धता से कभी पीछे नहीं हटी. राज्य में पूर्व सहयोगी दल भाजपा […]

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श्रीनगर : भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के आरोपों का पुरजोर खंडन करते हुए पीडीपी प्रमुख एवं जम्मू कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने रविवारको कहा कि उनकी पार्टी के खिलाफ झूठे आरोप लगाये गये, जबकि वह साझा न्यूनतम कार्यक्रम के प्रति अपनी प्रतिबद्धता से कभी पीछे नहीं हटी.

राज्य में पूर्व सहयोगी दल भाजपा द्वारा लगाये गये आरोपों पर अपनी चुप्पी तोड़ते हुए महबूबा ने कहा कि यह देखना दुखद है कि भगवा पार्टी ने अपने कदम पीछे खींच लिये. राज्य में महबूबा नीत पीडीपी-भाजपा की गठबंधन सरकार कुछ दिन पहले गिर गयी क्योंकि भगवा पार्टी ने गठबंधन से बाहर होने का फैसला किया था. पीडीपी प्रमुख ने सिलसिलेवार ट्वीट में कहा कि उनकी सरकार ने जमीन पर विश्वास बहाल करने के लिए जो कदम उठाये, उसे भाजपा सरकार ने भी मान्यता और सहमति दी थी. उन्होंने कहा कि अनुच्छेद 370 पर यथास्थिति, पाकिस्तान और हुर्रियत के साथ वार्ता ‘गठबंधन के एजेंडा’ का हिस्सा थे. वार्ता को प्रोत्साहित करना, पत्थरबाजों के खिलाफ मामले वापस लेना और आतंकवादियों के खिलाफ अभियान को एकतरफा तौर पर स्थगित करना शांति बहाली के लिए बहुत जरूरी कदम थे. भाजपा ने भी इस कदम का समर्थन किया था.

महबूबा ने पूर्व गठबंधन साझेदार की आलोचना करते हुए कहा कि जम्मू में शनिवार को शाह द्वारा लगाये गये आरोपों का हकीकत में कोई आधार नहीं है. उन्होंने कहा कि जम्मू और लद्दाख के साथ भेदभाव किये जाने के आरोपों का वास्तव में कोई आधार नहीं है. हां, घाटी लंबे समय से अशांत है और 2014 में आयी बाढ़ ने भी समस्या बढ़ायी, इसलिए काफी ध्यान दिये जाने की जरूरत थी. लेकिन, इसका यह मतलब नहीं कि कहीं भी कम विकास हुआ. शाह ने कहा था कि कानून व्यवस्था के बदतर होने और खासतौर पर जम्मू तथा लद्दाख में समान विकास करने में राज्य सरकार की नाकामी के चलते भाजपा ने गठबंधन सरकार से बाहर होने का फैसला किया. महबूबा ने भाजपा से अपने मंत्रियों के कामकाज की समीक्षा करने को कहा, जिन्होंने भेदभाव होने के बारे में पिछले तीन साल में राज्य या केंद्र स्तर पर कभी नहीं बोला.

कठुआ बलात्कार-हत्या मामले के विषय पर उन्होंने कहा कि सीबीआई को यह मामला नहीं सौंपना और गुज्जर तथा बकरवाल समुदायों में सुरक्षा की भावना लाने के उद्देश्य से उन्हें प्रताड़ित नहीं करने का आदेश जारी करना मुख्यमंत्री के तौर पर उनका कर्तव्य था. महबूबा ने भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं विधायक चौधरी लाल सिंह द्वारा कश्मीरी पत्रकारों को धमकी दिये जाने को लेकर भी पूर्व गठबंधन सहयोगी दल की आलोचना की और पूछा कि उनके खिलाफ पार्टी क्या करने जा रही है.

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