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कर्नाटक : सिद्धरमैया की दलित सीएम की गुगली पर खड़गे ने हाइकमान के पाले में डाला गेंद

Updated at : 14 May 2018 12:16 PM (IST)
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कर्नाटक : सिद्धरमैया की दलित सीएम की गुगली पर खड़गे ने हाइकमान के पाले में डाला गेंद

बेंगलुरु/नयी दिल्ली: कर्नाटक में किसकी सरकार बनेगी यह बात 24 घंटे में पता चल जाएगी, लेकिन इससे पहले राज्य के तीनों पर प्रमुख राजनीतिक दलकांग्रेस,भाजपाव जनता दल सेकुलर और उन दलों के प्रमुख नेता अपना-अपना दाव चल रहे हैं. कल मुख्यमंत्री सिद्धरमैया ने एक चौंकाने वाला बयान दिया था कि दलित मुख्यमंत्री से उन्हें एतराज […]

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बेंगलुरु/नयी दिल्ली: कर्नाटक में किसकी सरकार बनेगी यह बात 24 घंटे में पता चल जाएगी, लेकिन इससे पहले राज्य के तीनों पर प्रमुख राजनीतिक दलकांग्रेस,भाजपाव जनता दल सेकुलर और उन दलों के प्रमुख नेता अपना-अपना दाव चल रहे हैं. कल मुख्यमंत्री सिद्धरमैया ने एक चौंकाने वाला बयान दिया था कि दलित मुख्यमंत्री से उन्हें एतराज नहीं है. उनका संकेत अपनी ही पार्टी के प्रदेश से आने वाले दूसरे बड़े नेता मल्लिकार्जुन खड़गे की ओर था. खड़गे अभी लोकसभा में विपक्ष के नेता हैं और पूर्व में रेलमंत्री रहे हैं. खड़गे ने आज सिद्धरमैया के इस बयान पर सफाई दी. उन्होंने कहा कि यह मुद्दा मीडिया ने हमलोगों के बीच मतभेद के लिए खड़ा किया है. उन्होंने कहा कि हमलोग इस बात के लिए स्पष्ट हैं कि इस पर फैसला हाइकमान करेगा. अब यह मात्र 12 घंटे की बात है.

खड़गे ने हालांकि यह स्पष्ट रूप से नहीं कहा कि सिद्धरमैया ही कर्नाटक में कांग्रेस को जीत मिलने पर मुख्यमंत्री बनेंगे. सिद्धरमैया पिछड़ा वर्ग से आते हैं, जबकि खड़गे दलित वर्ग से आते हैं. खड़गे और सिद्धरमैया को एक-दूसरे को प्रतिद्वंद्वी माना जाता है और हाइकमान इस स्थिति को समझता है इसलिए एक को केंद्र व एक राज्य की राजनीति में सक्रिय रखा गया है.

कर्नाटक विधानसभा चुनाव कांग्रेस ने पूरी तरह सिद्धरमैया के नेतृत्व में लड़ा. चुनाव की हर लाइन वही तय करते रहे, जिसे पार्टी के सारे नेता फॉलो करते थे. कर्नाटक चुनाव में कांग्रेस हाइकमान का दूसरे राज्यों जैसे हस्तक्षेप नहीं था.यहपार्टी ने पंजाब वाला फार्मूला अपनाया जहां मजबूतक्षत्रप अमरिंदरसिंह को पूरी चुनावी छूट दीगयीथी और उन्होंने पार्टी को जीत दिलायी. सिद्धरमैया भी कांग्रेस के मजबूत क्षत्रप माने जाते हैं. ऐसे में जीत मिलने पर सिद्धरमैया की जगह किसी और को मुख्यमंत्री बनाने का फैसला चौंकाने वाला हो सकता है और इससे सिद्धरमैया समर्थक नाराज हो सकते हैं.

संभवत: चतुर रणनीतिकार सिद्धरमैया ने यह बयान खड़गे कीमुख्यमंत्रीपद की संभावना पर ब्रेक लगाने के लिए दिया. दलित वर्ग से आने वाले खड़गे गुलबर्गा से सांसद हैं और बौद्ध मत को मानते हैं.

चुनाव बाद के सर्वे में राज्य में त्रिशंकु विधानसभा बनने की संभावना जतायी गयी है, जिसमें जनता दल सेकुलर की भूमिका किंग मेकर होने की संभावना व्यक्त की गयी है. जनता दल सेकुलर के मुख्यमंत्री पद के चेहरे एचडी कुमारास्वामी अभी स्वास्थ्य जांच के लिए सिंगापुर में हैं और वे आज रात तक स्वदेश लौटेंगे.

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