Justice Loya मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद साफ हुआ,न्यायपालिका राजनीतिक लड़ाई का क्षेत्र नहीं : राजनाथ सिंह

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नयी दिल्ली :जस्टिस लोया मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को कलंकित करने की साजिश विफल हो गयी है और साथ ही यह बात भी साफ हो गयी है कि न्यायपालिका राजनीतिक लड़ाई का क्षेत्र नहीं है. वहीं कांग्रेस प्रवक्ता आरएस सुरजेवाला ने […]

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नयी दिल्ली :
जस्टिस लोया मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को कलंकित करने की साजिश विफल हो गयी है और साथ ही यह बात भी साफ हो गयी है कि न्यायपालिका राजनीतिक लड़ाई का क्षेत्र नहीं है.

वहीं कांग्रेस प्रवक्ता आरएस सुरजेवाला ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का आज का फैसला भारतीय इतिहास में दुखद दिन के रूप में याद किया जायेगा. पोस्टमार्टम रिपोर्ट में विसंगतियां थी, यहां तक कि पीड़ित के नाम को भी सही तरीके से दर्ज नहीं किया गया था.

कोर्ट के फैसले के बाद डॉक्टर प्रशांत राठी ने कहा कि अब जबकि सच्चाई सामने आ गयी है मैं आरोपमुक्त हो गया हूं. एक समय था जब मेरी भूमिका पर संदेह किया जा रहा था. लेकिन अब कोई संदेह नहीं रह गया है. डॉक्टर प्रशांत राठी ने जस्टिस लोया की मौत के बाद उनकी जांच की थी.

गौरतलब है कि आज सुप्रीम कोर्ट ने जस्टिस लोया की संदिग्ध मौत की जांच एसआईटी से कराने से इनकार कर दिया , जिसके बाद
भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा ने कहा कि यह याचिका राजनीतिक मकसद से दायर की गई थी जिसके पीछे राहुल गांधी का अदृश्य हाथ था और इसका मकसद अमित शाह पर लांछन लगाना था . भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा ने संवाददाताओं से कहा कि इस मुद्दे पर दायर ‘पब्लिक इंटरेस्ट लिटिगेशन’ वास्तव में ‘पालिटिकल इंटरेस्ट लिटिगेशन’ था और यह राजनीतिक मकसद से याचिका दायर की गई थी और इस याचिका के पीछे अदृश्य हाथ था. इस झूठी याचिका के पीछे राहुल गांधी का अदृश्य हाथ था . उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस नेता इस विषय पर राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से मिलने गए थे .

इस मुद्दे पर कांग्रेस ने राजनीति के स्तर को नीचा करने को काम किया और इसके लिए राहुल गांधी को माफी मांगनी चाहिए . उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी से आज साफ हो गया है कि किस प्रकार से कांग्रेस पार्टी और राहुल गांधी ने राजनीतिक द्वेष के लिए कोर्ट के माध्यम से राजनीति करने की कोशिश की थी. पात्रा ने कहा कि राहुल गांधी जी मैं आपसे कहना चाहूंगा कि आपने देश की जनता के विश्वास को खो दिया है , सत्ता आपके हाथ से चले जाने से हताशा आ गई है, इसी वजह से आप बदले की भावना से काम कर रहे हैं. भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष को कड़ी मेहनत करनी चाहिए . उन्हें भाजपा अध्यक्ष अमित शाह, भारतीय न्यायपालिका और लोकतंत्र पर निशाना साधने के लिए इनसे माफी मांगनी चाहिए .

वहीं उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि जस्टिस लोया मामले में सुप्रीम कोर्ट के आदेश ने एकबार फिर कांग्रेस का सच सबके सामने ला दिया है. राहुल गांधी को इस देश की जनता से माफी मांगनी चाहिए. उन्होंने देश में नकारात्मक माहौल बनाने की कोशिश की, ताकि उसका प्रभाव जनता पर पड़े, मैं सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत करता हूं.

सुप्रीम कोर्ट ने जस्टिस लोया की संदिग्ध मौत की एसआईटी जांच कराने से इनकार कर दिया है. कोर्ट ने एसआईटी जांच की मांग करने वाली सभी याचिकाओं को आज खारिज कर दिया. चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा , न्यायमूर्ति एएम खानविलकर और न्यायमूर्ति डी . वाई . चन्द्रचूड़ की पीठ ने कहा कि न्यायिक अधिकारियों और बंबई उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों के खिलाफ गंभीर आरोप लगाकर न्यायपालिका को विवादित बनाने का प्रयास किया जा रहा है.

पीठ ने कहा , ‘ लोया की मृत्यु की परिस्थितियों के संबंध में चार जजों के बयान पर संदेह करने का कोई कारण नहीं है. साथ ही रिकॉर्ड में रखे गए दस्तावेजों और उनकी जांच यह साबित करती है कि लोया की मृत्यु प्राकृतिक कारणों से हुई है.’ शीर्ष अदालत ने कहा कि इन याचिकाओं से यह एकदम स्पष्ट है कि इसका असली मकसद न्यायपालिका की स्वतंत्रता पर हमला करने का प्रयास था. न्यायालय ने कहा कि राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता के मकसद से इस तरह की ओछी और हित साधने वाली याचिकाएं दायर की जा रही हैं.

सोहराबुद्दीन शेख फर्जी मुठभेड़ मामले की सुनवाई कर रहे सीबीआई अदालत के न्यायाधीश बी एच लोया की रहस्यमय परिस्थितियों में हुई मृत्यु के संबंध में दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं और महाराष्ट्र सरकार के वकीलों के बीच तीखी तकरार हुई थी. वरिष्ठ अधिवक्ताओं के इस तरह के आचरण को लेकर पीठ ने गहरी नाराजगी व्यक्त की थी। महाराष्ट्र सरकार की ओर से बार – बार यह दावा किया था कि स्वतंत्र जांच के लिए दायर याचिकाएं प्रायोजित हैं. राज्य सरकार ने यह भी कहा था कि याचिकाओं का मकसद इस एक व्यक्ति के खिलाफ मुद्दे को हवा देते रहना है.

राज्य सरकार ने शीर्ष अदालत से अनुरोध किया था कि इस मामले में जांच का आदेश नहीं दिया जाये क्योंकि इससे न्यायाधीशों और न्यायपालिका के प्रति लोगों के मन में संदेह पैदा होगा, इन याचिकाओं पर सुनवाई के राज्य सरकार ने यह भी तर्क दिया था कि याचिका में किये गये अनुरोध पर कोई भी आदेश देते समय न्यायालय को बहुत सावधानी बरतनी होगी क्योंकि जांच के आदेश देने की स्थिति बंबई उच्च न्यायालय के पीठासीन न्यायाधीशों और यहां तक कि प्रशासनिक समिति को दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 161 के अंतर्गत अपने बयान दर्ज कराने होंगे. इस मामले की स्वतंत्र जांच कराने के लिये बंबई लायर्स एसोसिएशन , कांग्रेस नेता तहसीन पूनावाला और महाराष्ट्र के पत्रकार बी एस लोन ने शीर्ष अदालत में याचिकायें दायर की थी.

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