पुणे के भीमा काेरेगांव हिंसा पर लोकसभा में हंगामा, अनंत कुमार बोले - कांग्रेस बांटो आैर राज करो की नीति पर

12.30 PM :संसदीय कार्य मंत्री अनंत कुमार ने कहा कि महाराष्ट्र में भड़की हिंसा को खड़गे सुलझाना नहीं चाहते हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस समाज को तोड़ने का काम कर रही है. कांग्रेस, खड़गे, राहुल गांधी आग बुझाने के बजाय आग भड़काना चाहती है. उन्होंने कहा कि हमारी सरकार सबका साथ, सबका विकास की […]
12.30 PM :संसदीय कार्य मंत्री अनंत कुमार ने कहा कि महाराष्ट्र में भड़की हिंसा को खड़गे सुलझाना नहीं चाहते हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस समाज को तोड़ने का काम कर रही है. कांग्रेस, खड़गे, राहुल गांधी आग बुझाने के बजाय आग भड़काना चाहती है. उन्होंने कहा कि हमारी सरकार सबका साथ, सबका विकास की नीति पर चल रही है.
12.23 PM : लोकसभा में पुणे हिंसा के मुद्दे पर आज विपक्ष ने हंगामा किया. विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि पुणे में भड़की हिंसा के पीछे भाजपा-आरएसएस का हाथ है. मल्लिकार्जुन खड़गे ने इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सदन में बयान की मांग की. मल्लिकार्जुन खडगे ने मांग की कि सुप्रीम कोर्ट के जज से महाराष्ट्र हिंसा की जांच करायी जाये.
11.05 AM : संसद परिसर में आज भाजपा संसदीय दल की बैठक हुई, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, भाजपा अध्यक्ष अमित शाह सहित सभी प्रमुख नेता शामिल हुए. संसदीय दल की बैठक के बाद संसदीय कार्य मंत्री अनंत कुमार ने मीडिया से कहा कि आज हमने संसदीय दल की बैठक में दो अहम बिल पर चर्चा की. पहला ओबीसी आयोग से संबंधित 123वां संविधान संशोधन बिल व दूसरा मुसलिम महिलाओं की सुरक्षा व अधिकार से संबंधित तीन तलाक खत्म करने वाला विधेयक है.
Delhi: BJP Parliamentary party meeting underway at the Parliament; Prime Minister Narendra Modi and leaders present. pic.twitter.com/mb99GUPpwA
— ANI (@ANI) January 3, 2018
नयी दिल्ली : महाराष्ट्र के पुणे के भीमा कोरेगांव में मंगलवार को भड़की जातीय हिंसा के खिलाफ आज लोकसभा में जोरदार हंगामा हुआ. विपक्ष के नेता मल्लिार्जुन खड़गे ने इस मुद्दे पर सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सदन में बयान देने की मांग की. उन्होंने हिंसा के पीछे भाजपा व आरएसएस का हाथ बंटाया. वहीं, सरकार की ओर से संसदीय कार्य मंत्री अनंत कुमार ने कहा कि कांग्रेस पुणे की हिंसा को शांत नहीं करना चाहती है, बल्कि उसे और भड़काना चाहती है. उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस उसके नेता राहुल गांधी व खड़गे बांटो और राज करो की नीति पर चलरहे हैं, जबकि नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा की सरकार सबका साथ, सबका विकास की नीति पर चल रही है.
आज सदन की कार्यवाही शुरू होने से पहले ही कई विपक्षी पार्टियों ने संसद के दोनों सदनों में इस मुद्दे पर कार्यस्थगन नोटिस दियाथा. यह हिंसा मंगलवार को तब भड़की जब 200 साल पहले अंग्रेजों व पेशवा की सेना के बीच छिड़े युद्ध की वर्षगांठ पर दलित समाज जश्न मना रहा था. महाराष्ट्र की दलित जाति महारसे आने वाले लोग इस युद्ध में सबसे अधिक संख्या में अंग्रेजों की सेना में शामिल थे और अंग्रेज जीत गये थे. ऐसे में महाराष्ट्र का दलित समुदाय इस युद्ध को अपने विजय के रूप में देखता है.
लोकसभा में कांग्रेस के नेता मल्लिकार्जुन खडगे ने रूल 56 के अंतर्गत लोकसभा में कार्यस्थगन प्रस्ताव दिया था. लोकसभा में कार्यस्थगन प्रस्ताव का नोटिस जन अधिकार पार्टी के पप्पू यादव ने भी दिया. वहीं, राज्यसभा में कार्यस्थगन प्रस्ताव का नोटिस कांग्रेस की रजनी पाटिल ने दिया. सीपीआइ के डी राजा ने इस मुद्दे पर शून्यकाल के लिए नोटिस दिया. उन्होंने नोटिस में दलितों पर बढ़े अत्याचार के मामले का उल्लेख किया है.
समाजवादी पार्टी के नरेश अग्रवाल ने भी राज्यसभा में नियम 267 के तहत कार्यस्थगन प्रस्ताव का नोटिस दिया.
पुणे हिंसा मुद्दे पर राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ ने भी बयान दिया है. संघ के नेता मनमोहन वैद्य ने कहा हैकि संघ का काम समाज को जोड़नाहै, तोड़ने नहीं. संघ के बयान में कहा गया है कि कांग्रेस संघ पर पहली बार आरोप नहीं लगा रही है, संघ हमेशा कांग्रेस के निशाने पर रहा है.
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