कौन करता है केजरीवाल के साथ ‘चपरासी’ जैसा सुलूक? क्यों गर्म हुई राज्यसभा

नयी दिल्ली : राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में अधिकारों की लड़ाई अब अरविंद केजरीवाल और दिल्ली के उपराज्यपाल के बीच नहीं रह गयी. यह मुद्दा संसद तक पहुंच गया है. राज्यसभा में कई नेताओं ने दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल का पुरजोर समर्थन किया. हाल में कुलभूषण जाधव पर विवादित टिप्पणी करने वाले समाजवादी पार्टी के […]
नयी दिल्ली : राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में अधिकारों की लड़ाई अब अरविंद केजरीवाल और दिल्ली के उपराज्यपाल के बीच नहीं रह गयी. यह मुद्दा संसद तक पहुंच गया है. राज्यसभा में कई नेताओं ने दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल का पुरजोर समर्थन किया. हाल में कुलभूषण जाधव पर विवादित टिप्पणी करने वाले समाजवादी पार्टी के सांसद नरेश अग्रवाल ने तो यहां तक कह दिया किउपराज्यपाल अनिल बैजल दिल्ली केमुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के साथ चपरासी जैसा सलूक करते हैं. उन्होंने दिल्ली की सरकार को ज्यादा अधिकार दिये जाने की वकालत की.
अग्रवाल ने गुरुवार को राज्यसभा में कहा, ‘दिल्ली सरकार को कोई पावर नहीं है. लेफ्टिनेंट गवर्नर दिल्ली की मुख्यमंत्री को चपरासी की तरह ट्रीट करता है. यह क्या है? एक मुख्यमंत्री की बेइज्जती है. एक लेफ्टिनेंट गवर्नर चुने हुए मुख्यमंत्री को चपरासी की तरह ट्रीट करे. मैं बिल्कुल सही कह रहा हूं. यह दिल्ली सरकार का भी आरोप है. चीफ मिनिस्टर का आरोप है. आप दिल्ली को पावर देने की बात करिये. आप चर्चा करा लीजिए. दिल्ली सरकार को कानून बनाने का अधिकार दीजिए. साढ़े तीन साल हो गये. दिल्ली को क्यों नहीं आपने बढ़िया शहर बना दिया.’
दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र विधियां विशेष उपबंध (दूसरा संशोधन) विधेयक पर चर्चा के दौरान दिल्ली मेट्रो की मजेंटा लाइन के उद्घाटन समारोह में केजरीवाल को न बुलाये जाने का मुद्दा उठा. अग्रवाल ने इस मुद्दे पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के रवैये की भी आलोचना की. सपा नेता रामगोपाल यादव ने भी इसे गलत परंपरा की शुरुआत बताया. ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस, माकपा और भाकपा ने भी इस मुद्दे पर सपा का साथ दिया और केजरीवाल की मांगों का समर्थन किया. तृणमूल कांग्रेस के नदीम-उल-हक ने इसे ‘ओछी राजनीति’ का नतीजा करार दिया.
दिल्ली सरकार और एलजी के बीच टकराव के मुद्दे पर भाकपा नेता डी राजा ने कहा कि इसे अब खत्म करना ही होगा. उन्होंने कहा, ‘हम इस टकराव को कब तक जारी रखेंगे. यह सिर्फ दिल्ली की बात नहीं है. पुडुचेरी के साथ भी यही समस्या है. हमें इस मुद्दे पर फिर से विचार करना होगा.’
विधेयक पर चर्चा का जवाब देते हुए आवास एवं शहरी मामलों के मंत्री हरदीप सिंह पुरी नेइसमुद्दे पर सफाई दी. उन्होंने कहा कि मजेंटा लाइन पर उत्तर प्रदेश में मेट्रो के रेलखंड के उद्घाटन का कार्यक्रम आयोजित किया गया था, इसलिए केजरीवाल को आमंत्रित नहीं किया गया.
राज्यसभा के उप-सभापति पीजे कुरियन ने शहरी विकास मंत्री हरदीप सिंह पुरी से इस मसले को सुलझाने के लिए कहा. कुरियन के सुझाव पर हरदीप सिंह पुरी ने उसे स्वीकार करते हुए कहा कि ये उनके लिए बड़ी चुनौती होगी. साथ ही कहा कि 40 साल के सार्वजनिक जीवन में उन्होंने आतंकियों से भी चर्चा की है, लेकिन ये उससे बड़ी चुनौती साबित होगी. पुरी ने कहा कि वह चुनौती स्वीकार करते हैं. वह दोनों को लंच पर निमंत्रित करेंगे और इसविवादको सुलझाने की कोशिश करेंगे.
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