World Blood Donor Day: स्वैच्छिक प्लेटलेट एफेरेसिस रक्तदाता रजिस्ट्री का राज्यपाल ने किया विमोचन
Published by : Amit Yadav Updated At : 14 Jun 2023 8:30 PM
राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने विश्व रक्तदाता दिवस के मौके पर कहा कि एक बार के रक्तदान से तीन मरीजों की जान बचायी जा सकती है. आकस्मिकता किसी के साथ भी घट सकती है. इसलिए अपने परिजन की आकस्मिकता के बारे में भी सोचे और रक्तदान जरूर करें.
लखनऊ: विश्व रक्तदाता दिवस के मौके पर राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने केजीएमयू की ‘स्वैच्छिक प्लेटलेट एफेरेसिस रक्तदाता रजिस्ट्री’ का विमोचन किया. इस रजिस्ट्री में उन रक्तदाताओं का विवरण इकठ्ठा किया गया है, जिन्हें विशेष आवश्यकता के तहत रक्तदान के लिए बुलाया जा सकता है.
केजीएमयू की ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन विभाग की हेड और कार्यक्रम आयोजक प्रो. तूलिका चंद्रा ने बिाया कि सिंगल डोनर प्लेटलेट एफेरेसिस की प्रक्रिया से मिलती है. इसके लिए मरीज के ब्लड ग्रुप के ही रक्तदान की जरूरत होती है. अक्सर मरीज के ब्लड ग्रुप का रक्तदाता उसके परिजनों और मित्रों में नही मिल पाता है. जिसके कारण ऐसे मरीज को उसके ग्रुप का डोनर इस रजिस्ट्री बुक के माध्यम से तलाश कर रक्त की आपूर्ति की जाएगी.
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प्रो. तूलिका चंद्रा ने बताया कि केजीएमयू में स्थापित ये व्यवस्था प्रदेश की पहली और अनुपम है. इसके अलावा ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन विभाग में एशिया की पहली और एकमात्र पैथोजिन रिडक्शन मशीन भी स्थापित है. जिससे रक्तदान से मिलने वाले खून में सभी संक्रमण को समाप्त करने की क्षमता है.
राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने राजभवन के अन्नपूर्णा सभागार में विश्व रक्तदाता दिवस के मौके पर आयोजित स्वैच्छिक रक्तदान शिविर की शुरुआत की. राज्यपाल ने कहा कि स्वस्थ्य व्यक्ति वर्ष में कम से कम एक बार रक्तदान जरूर करें. उन्होंने रक्तदान को बड़ा सामाजिक कार्य बताते हुए कहा कि आकस्मिकता की स्थिति में मरीज की जीवन रक्षा में रक्त की आवश्यकता एक बहुत बड़ा फैक्ट है.
रक्तदाता के एक बार के रक्तदान से तीन मरीजों की जान बचायी जा सकती है. आकस्मिकता किसी के साथ भी घट सकती है. इसलिए अपने परिजन की आकस्मिकता के बारे में भी सोचे और रक्तदान जरूर करें. उन्होंने कहा कि रक्त निर्माण शरीर की स्वाभाविक प्रक्रिया है. रक्तदान के बाद शरीर में दोबारा रक्त का निर्माण हो जाता है. उन्होंने कहा कि रक्तदान से किसी प्रकार की शारीरिक कमजोरी नही आती है.
केजीएमयू के कुलपति (ले.जनरल) बिपिन पुरी ने कहा कि कुल रक्तदान में मात्र 30 प्रतिशत जागरूक नागरिक ही स्वैच्छिक रक्तदान करते हैं. शेष 70 प्रतिशत रक्तदान मरीजों के परिजन आकस्मिकता की स्थिति में जीवन रक्षा के दृष्टिगत ही किया जाता है. उन्होंने बताया कि एक रक्तदाता के रक्तदान से तीन मरीजों की जान बच सकती है. एक रक्तदाता (Blood Donor) तीन लोगों की जान बचा सकता है. क्योंकि एक यूनिट रक्त से प्लेटलेट (Platelets), प्लाज्मा (Plasma), रेड ब्लड सेल (RBC) अवयव के रूप में मिलते हैं.मरीज को उसकी जरूरत के अनुसार रक्त अवयव ही दिया जाता है.
राज्यपाल ने राजभवन में मौजूद रक्तदाताओं को प्रमाण-पत्र दिया. उन्होंने कहा कि राजभवन के जो अधिकारी और कर्मचारी किसी अस्वस्थता के कारण शिविर में रक्तदान में असमर्थ रहे, वे अगले शिविर में रक्तदान जरूर करें. प्रमुख सचिव चिकित्सा शिक्षा आलोक कुमार ने कार्यक्रम में राज्यपाल रक्तदान से जुड़ा स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया. अपर मुख्य सचिव राज्यपाल डॉ. सुधीर एम बोबडे, चिकित्सा प्रभारी राजभवन अनिल निर्वाण, महिला चिकित्सक राजभवन डॉ. गीता चौधरी सहित कुल 82 अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने रक्तदान किया.
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उम्र 18 वर्ष से अधिक हो
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वजन 45 किलोग्राम से ज्यादा
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हीमोग्लोबिन 12.5 ग्राम से अधिक हो
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रक्तदान से 24 घंटे पहले शराब का या अन्य नशा न किया हो
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एक स्वस्थ्य पुरुष तीन माह में एक बार रक्तदान कर सकता है
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कैंसर, पीलिया, मिर्गी, अस्थमा, हीमोफीलिया, थैलेसीमिया मरीज नहीं कर सकते रक्तदान
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टायफायड, टिटनेस, कालरा जैसे बीमारी 15 दिन पहले न हो
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महिलाएं प्रसव के एक साल तक रक्तदान नहीं कर सकती
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इंसुलिन लेने वाले नहीं कर सकते रक्तदान
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हेपेटाइटिस बी, सी, टीबी, कुष्ठ रोगी रक्तदान नहीं कर सकते
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