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उमेश पाल हत्याकांड मामले में खुलासा, फर्जी नाम पर खरीदे गए थे 16 मोबाइल-सिम, फिर ऐसे रची गई थी हत्या की साजिश

Updated at : 14 Mar 2023 1:45 PM (IST)
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उमेश पाल हत्याकांड मामले में खुलासा, फर्जी नाम पर खरीदे गए थे 16 मोबाइल-सिम, फिर ऐसे रची गई थी हत्या की साजिश

उमेश पाल हत्याकांड मामले में बड़ा खुलासा हुआ है. उमेश पाल की हत्या को अंजाम देने के बाद इस घटना में शामिल सभी शूटरों को 3-3 सिम और नया मोबाइल फोन दिया गया था, ताकि किसी भी तरह उनकी लोकेशन को ट्रैक ना किया सके.

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लखनऊ. उमेश पाल की हत्या के मामले में बड़ा खुलासा हुआ है. उमेश पाल की हत्या से पहले इसकी बड़ी तैयारी की गयी थी. यूपी के माफया डॉन अतीक अहमद के बेटे असद ने हत्याकांड से पहले 16 मोबाइल फोन और 16 सिम थी खरीदे थे. ये सभी सिम और मोबाइल फोन फर्जी नाम और पते पर खरीदे गए थे. बताया जा रहा है कि खरीदे गए सभी सिम पहले से एक्टिवेटेड थे. शूटरों ने उमेश पाल की हत्या के बाद अपना पुराना मोबाइल और सिम का इस्तेमाल बंद कर दिया था. शूटरों को एक-एक लाख रुपये भी मिले थे.

उमेश पाल हत्याकांड मामले में बड़ा खुलासा

जानकारी के अनुसार, उमेश पाल की हत्या को अंजाम देने वाले सभी शूटरों को 3-3 सिम और नया मोबाइल फोन दिया गया था ताकि किसी भी तरह उनकी लोकेशन को ट्रैक ना किया सके. इसके साथ ही घटना को अंजाम देने के बाद सभी शूटरों को एक-एक लाख रुपये दिए गये थे. उमेश पाल हत्याकांड के बाद हर शूटर ने अपने पुराने मोबाइल और सिम से बात करना छोड़ दिया था.

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यूपी पुलिस ने बढ़ायी इनाम की राशि

सूत्रों के मुताबिक उमेश पाल हत्याकांड में शूटरों को पैसा दिए जाने की पुष्टि होने के बाद पुलिस ने अतीक अहमद की पत्नी शाइस्ता पर इनाम घोषित किया था. यूपी पुलिस ने इन शूटरों पर इनाम की राशि ढाई लाख रुपये से बढ़ाकर पांच लाख कर दी है. उमेश पाल हत्याकांड में अतीक अहमद और उसके बेटों की मुख्य भूमिका सामने आई है. अब हत्या को अंजाम देने वाले अतीक अहमद के खास गुर्गे अरमान, गुलाम, गुड्डू और नसीर, पुलिस की हिट लिस्ट में है.

जाच में नयी बात आयी सामने

पुलिस जांच में पता चला कि उमेश पाल पर गोलिया चलाने वाले अतिक अहमद के बेटे असद को कानूनी कार्रवाई से बचाने की साजिश भी पहले ही रच ली गई थी. इसीलिए घटना को अंजाम देने से पहले उसके फोन को जानबूझकर लखनऊ में छोड़ दिया गया था. इतना ही नहीं उमेश पाल पर हमले के दौरान ही लखनऊ में उसके एटीएम से पैसे भी निकाले गये थे, ताकि बाद में उसकी मौजूदगी लखनऊ में दिखाई जा सके.

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