सरकारी दर पर किसानों से धान खरीद की तैयारी शुरू, 01 नवंबर से पैक्स पर किसानों से होगी धान की खरीद

2369 प्रति क्विंटल एमएसपी का हुआ निर्धारण
– 2369 प्रति क्विंटल एमएसपी का हुआ निर्धारण – 170 पैक्स व 10 व्यापार मंडल को धान खरीद के लिए मिल सकती है अनुमति – पिछले वर्ष की तुलना में एमएसपी में 40 रुपये की गयी बढ़ोतरी – धान विक्रय के लिए किसानों का निबंधन शुरू सुपौल. किसानों को उनकी फसल का उचित मूल्य मिले इसके लिए सरकारी स्तर पर तैयारी शुरू कर दी गयी है. इलाके के किसानों के खरीफ फसल में शामिल धान की बिक्री के लिए सहकारिता विभाग द्वारा क्रय केंद्र की स्थापना को लेकर जिले में तैयारी शुरू कर दी गयी है. किसानों को सही समय पर उसके उत्पादनों का मूल्य मिले इसके लिए सभी सहकारिता पदाधिकारी, पैक्स अध्यक्ष व व्यापार मंडल को पत्र जारी कर धान खरीद की तैयारी प्रारंभ कर दिये जाने का निर्देश दिया गया है. हालांकि किसानों के खेतों में अभी धान की फसल लगा है. जिसके कटने में अमूमन एक महीने का वक्त है. बावजूद सरकार ने जिले में 01 नवंबर से 15 फरवरी तक किसानों का धान खरीद के लिए तिथि निर्धारित कर दिया है. सरकार द्वारा एमएसपी का भी निर्धारण कर दिया गया है. इस वर्ष पिछले वर्ष की तुलना में किसानों को धान के विक्रय पर प्रति क्विंटल 40 रुपये बढ़ाया गया है. इस वर्ष धान का न्यूनतम समर्थन मूल्य साधारण धान का 2369 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित किया गया है. जबकि ए ग्रेड के धान के लिए समर्थन मूल्य 2389 रुपये निर्धारित किया गया है. विभाग द्वारा जिले का लक्ष्य निर्धारण नहीं किया गया है. गौरतलब है कि कृषि विभाग द्वारा जब जिले में धान की खेती का सही आंकड़ा व उत्पादन की क्षमता विभाग को प्रतिवेदित किया जायेगा. इसके बाद लक्ष्य का निर्धारण किया जा सकेगा. जबकि सहकारिता विभाग का मानना है कि अधिक से अधिक छोटे व बड़े किसानों का धान क्रय केंद्र पर लेकर उन्हें एमएसपी का लाभ दिया जाना है. इसमें रैयत, गैर रैयत व बंटाईदार किसान शामिल होते हैं. इसके लिए किसानों का विभागीय पोर्टल पर निबंधन प्रारंभ कर दिया है. जो 15 फरवरी 2026 तक जारी रहेगा. किसानों को किया जा रहा जागरूक सहकारिता विभाग द्वारा किसानों को एमएसपी का लाभ दिये जाने को लेकर ग्रामीण स्तर पर किसानों को जागरूक किया जा रहा है. प्रखंड सहकारिता पदाधिकारी, पैक्स अध्यक्ष, पैक्स प्रबंधक एवं व्यापार मंडल अध्यक्ष को इसकी जिम्मेदारी दी गयी है. इन लोगों द्वारा किसानों को व्यक्तिगत रूप से जानकारी देने का निर्देश दिया गया है. जबकि पैक्स परिसर में धान खरीद से संबंधित दिवाल लेखन करने का निर्देश दिया गया है. वहीं पंचायत के सार्वजनिक स्थानों पर बैनर व पोस्टर लगाये जाने का भी निर्देश दिया गया है. विभाग द्वारा दावा किया गया है कि किसानों से धान खरीद के बाद उन्हें आधार से सीडिंग वाले खाता में 48 घंटे के भीतर राशि हस्तांतरित कर दिया जायेगा. विभागीय निर्देश अनुसार किसी भी समिति पर रैयत किसान 150 क्विंटल एवं गैर रैयत किसान 100 क्विंटल धान बेच सकते हैं. क्रियाशील समिति को क्रय का दिया जायेगा अनुमति सरकारी दर पर धान खरीद के लिए जिले के क्रियाशील समिति को अनुमति दिया जायेगा. जिस समिति का अद्यतन ऑडिट किया रहेगा या समिति डिफॉल्टर ना हो, ऐसे ही समिति को धान खरीद के लिए अनुमति प्रदान की जायेगी. गौरतलब है कि जिले में 181 पैक्स एवं 11 व्यापार मंडल कार्यरत है. जिसमें पिछले वर्ष 170 पैक्स एवं 10 व्यापार मंडल को धान खरीद के लिए क्रय केंद्र बनाया गया था. संभावना जतायी जा रही है कि इस वर्ष भी इतने ही समिति को धान खरीद की अनुमति प्रदान की जायेगी. जिस पंचायत में पैक्स को धान खरीद की अनुमति नहीं दी जायेगी वहां के किसान नजदीकी पैक्स में धान बेचकर एमएसपी का लाभ ले सकते हैं. इसके लिए किसानों को विभागीय स्तर पर छूट दी गयी है. गोदाम के मामले में संपन्न हुआ जिला धान खरीद के बाद समिति को धान रखने के लिए गोदाम के अभाव में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता था. लिहाजा समिति किसानों से धान खरीद मामले में टाल मटोल करते थे. लेकिन इस वर्ष जिले में कई नये गोदाम का निर्माण किया गया है. लिहाजा समिति को धान रखने में सुविधा मिलेगी. सहकारिता विभाग से मिले आंकड़े के अनुसार जिले में 200 गोदाम की संख्या है. जिसमें 200 एमटी वाले क्षमता के गोदाम की संख्या 134 है. जबकि 500 एमटी वाले गोदाम की संख्या 22 है. वहीं 1000 हजार एमटी क्षमता वाले गोदाम की संख्या 44 है. निश्चित रूप से एक नवंबर से शुरू की जायेगी धान की खरीद : डीसीओ इस बाबत जिला सहकारिता पदाधिकारी संतोष कुमार ने बताया कि विभाग द्वारा धान खरीद के लिए 01 नवंबर से 15 फरवरी 2026 तक तिथि का निर्धारण कर दिया गया है. इस वर्ष धान का समर्थन मूल्य 2369 प्रति क्विंटल है. जिले में निर्धारित तिथि से ही धान की खरीद शुरू कर दी जायेगी. इसके लिए प्रचार प्रसार व किसानों को जागरूक करने का कार्य प्रारंभ कर दिया गया है.
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