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मन रूपी मंदिर को जैसे कर्म से सजाओगे उसी प्रकार से सुसज्जित होगा

Updated at : 21 Apr 2024 9:01 PM (IST)
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मन रूपी मंदिर को जैसे कर्म से सजाओगे उसी प्रकार से सुसज्जित होगा

<P>फतेहपुर. मसलिया प्रखंड के सांपचला पंचायत अंतर्गत बेलगंजिया गांव में तीन दिवसीय श्रीमद् देवीभागवत कथा के दूसरे दिन शनिवार रात्रि को कथा जारी रही. उत्तर प्रदेश की कथावाचिका देवी ज्योति

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फतेहपुर. मसलिया प्रखंड के सांपचला पंचायत अंतर्गत बेलगंजिया गांव में तीन दिवसीय श्रीमद् देवीभागवत कथा के दूसरे दिन शनिवार रात्रि को कथा जारी रही. उत्तर प्रदेश की कथावाचिका देवी ज्योति शास्त्री ने श्रोताओं को भागवत कथा का श्रवण कराया. कथा में उन्होंने परिवेश के बारे में बताते हुए कहा कि मन रूपी मंदिर में जो आपके भीतर में है, उसे आप जैसे कर्म से सजाओगे, वह उसी प्रकार से सुसज्जित होगा. तोता का उदाहरण देते हुए कहा कि तोते को जिस प्रकार जिस परिवेश में रखा जाता है, वह उसी अनुरूप संवाद करता है. साधु की कुटिया में रहने वाला व चोरों की संगत में रहने वाला एक ही तोता अलग-अलग संवाद करता है. व्यक्ति को जिस स्थिति जिस परिवेश में रखा जाए या रहे, वह उसी मनोभावना के साथ काम करता है. कहा कि भागवत वह मीठी दवा है, जिसका सेवन करते समय भी मीठा लगेगा और उसका परिणाम भी मीठा होगा. उदाहरण के तौर पर समझाते हुए कहा कि दवाइयां तीन प्रकार की होती है. एलोपैथिक जिसमें बीमारी तो ठीक होती है, पर साइड इफेक्ट छोड़ जाता है. दूसरी दवाई आयुर्वेदिक है जिसमें लाभ तो होता है, लेकिन खाने में कड़वा होता है. तीसरी दवा होम्योपैथिक की होती है जो खाने में भी मीठा और परिणाम भी मीठा होता है. ठीक भागवत कथा होम्योपैथिक की दवा जैसी है.

भागवत की शरण में आने से सभी कष्टों का इलाज :

किसी भी प्रकार का कष्ट है, क्लेश है तो भगवान श्रीकृष्ण की शरण में आ जाओ, भागवत की शरण में आ जाओ भगवान कल्याण करेंगे. सबों का इलाज भागवत में है. श्रीमद् भागवत में सुकदेव महाराज ने कहा है कि जिस मनुष्य के हृदय में छल, कपट, द्वेष, घृणा जैसे दुर्गुण भरे पड़े हैं, उस मनुष्य के भीतर कभी भी कथा प्रवेश नहीं करती. कथा में बहुत सारे लोग आते हैं, लेकिन सभी के मन में भागवत कथा का प्रवेश नहीं हो पाता. ठाकुर की कृपा जब होती है तब ही मनुष्य भागवत कथा श्रवण के लिए कथा पंडाल में पहुंचते हैं. यह कृपा मात्र से ही सम्भव हो सकता है. श्रीरामचरितमानस के अरण्य कांड में स्पष्ट लिखा है कि व्यक्ति का मन पतंग के समान है. हर मनुष्य के मन में यह मनोवृत्ति होनी चाहिए. पतंग कितने भी दूर चले जाए, धागा मेरे हाथ में ही है. कथा के बीच-बीच में भगवान श्रीकृष्ण की लीला आधारित गीतों को गाकर कथावाचिका देवी ज्योति शास्त्री ने उपस्थित श्रोताओं को मंत्रमुग्ध किया. कथा का विराम हवन यज्ञ कार्यक्रम के साथ किया जाएगा. इसके लिए बेलगंजिया के ग्रामीण व कथा के मुख्य यजमान सूरज झा ने मां सिंहवाहिनी मंदिर प्रांगण में हवन वेदी बनवाया है. वहीं आने वाले श्रद्धालुओं के लिए भव्य पंडाल व प्रसाद की व्यवस्था की है. कथा श्रवण के लिए बेलगंजिया समेत दर्जनों गांवों के लोग रात्रि को पहुंच रहे हैं.

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