असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती : चयन प्रक्रिया पर उठे सवाल
वरीय संवाददाता, मुजफ्फरपुरअसिस्टेंट प्रोफेसर की नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर विवाद गहरा गया है. चयन प्रक्रिया में गड़बड़ी व अनियमितता का आरोप लगाते हुए अभ्यर्थियों ने अब आर-पार की लड़ाई का बिगुल फूंक दिया है. शनिवार को बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों ने उच्च शिक्षा विभाग के सचिव से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा और पूरी चयन प्रक्रिया की थर्ड पार्टी जांच कराने की मांग की. अभ्यर्थियों का तर्क है कि बिहार राज्य विश्वविद्यालय सेवा आयोग की वर्तमान चयन प्रक्रिया में वास्तविक मेरिट, शोध कार्य व शैक्षणिक अनुभव को दरकिनार किया जा रहा है. अभ्यर्थियों (मनोज कुमार, राकेश रंजन, अखिलेश आदि) का कहना है कि अनुभव प्रमाणपत्रों के सत्यापन में पारदर्शिता का अभाव है. अपनी मांगों को लेकर अभ्यर्थियों ने डिजिटल प्लेटफॉर्म पर ऑनलाइन मीटिंग कर आगे की रणनीति तैयार की है. निर्णय लिया गया है कि चयन प्रक्रिया में होने वाली गड़बड़ियों के खिलाफ बड़ा अभियान चलाया जायेगा. इसके तहत साक्ष्यों के साथ राजभवन, संबंधित विश्वविद्यालयों के कुलपतियों व शिक्षा विभाग को पत्र भेजकर वस्तुस्थिति से अवगत कराया जायेगा.
ये हैं मांगें
अनुभव प्रमाणपत्रों की जांच विवि के बजाय किसी स्वतंत्र सक्षम एजेंसी से करायी जाये
जांच पूरी होने तक वर्तमान नियुक्तियों पर अस्थायी रोक लगायी जायेअनियमितता पाये जाने पर दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई हो
यदि जरूरी हो, तो अन्य राज्यों की तर्ज पर विज्ञापन रद्द कर नये सिरे से प्रक्रिया शुरू की जायेडिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

