बिहार को विशेष राज्य का दर्जा देने पर पीएम ने कहा, एनडीसी ही करेगा फैसला

Updated at : 08 Jul 2015 10:36 AM (IST)
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बिहार को विशेष राज्य का दर्जा देने पर पीएम ने कहा, एनडीसी ही करेगा फैसला

-हरिवंश, प्रधानमंत्री के विशेष विमान से- इब्सा सम्मेलन से लौटते वक्त प्रधानमंत्री डॉ मनमोहन सिंह ने विशेष एयर इंडिया विमान में बुधवार की रात पत्रकारों से बातचीत की. उन्होंने बिहार को विशेष राज्य का दर्जा, कांग्रेस, केंद्र सरकार, विपक्ष, अन्ना हजारे, भ्रष्टाचार समेत कई मुद्दों पर अपनी राय जाहिर की. बातचीत के क्रम में प्रभात […]

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-हरिवंश, प्रधानमंत्री के विशेष विमान से-

इब्सा सम्मेलन से लौटते वक्त प्रधानमंत्री डॉ मनमोहन सिंह ने विशेष एयर इंडिया विमान में बुधवार की रात पत्रकारों से बातचीत की. उन्होंने बिहार को विशेष राज्य का दर्जा, कांग्रेस, केंद्र सरकार, विपक्ष, अन्ना हजारे, भ्रष्टाचार समेत कई मुद्दों पर अपनी राय जाहिर की.

बातचीत के क्रम में प्रभात खबर का प्रधानमंत्री से सवाल था कि पिछले पांच साल में तीसरी बार बिहार ने जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) में देश में सबसे अच्छा प्रदर्शन किया है. अव्वल बन कर. बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार बिहार को श्रेष्ठ बनाने के लिए विशेष राज्य का दर्जा (स्पेशल कैटेगरी स्टेट) की मांग कर रहे हैं. बिहार के साथ अतीत में जो ऐतिहासिक भेदभाव हुआ है, उसे सही करने के लिए! प्रधानमंत्री जी इस सवाल पर आपके क्या विचार हैं?

इस सवाल का उत्तर बहुत सामान्य (क्वाइट सिंपल) है. विशेष राज्य का दर्जा देने का फैसला नेशनल डेवलपमेंट काउंसिल (राष्ट्रीय विकास परिषद) ही कर सकता है. योजना आयोग बिहार के मामले पर गौर कर रहा है. पर, विशेष राज्य के दर्जे के सवाल का फैसला नेशनल डेवलपमेंट काउंसिल में ही संभव है. प्रधानमंत्री स्तर पर नहीं.

महंगाई पर भी सवाल किया गया. इसके उत्तर में उन्होंने केंद्र सरकार द्वारा उठाये गये अनेक कदमों की चर्चा की. इस पर हुई महत्वपूर्ण बैठक का उल्लेख किया. कहा, मुद्रास्फीति को मॉडरेड (कम) करने के लिए अनेक कदम उठाये गये हैं. कई तरह की धाराएं काम कर रही हैं. इस वर्ष के अंत तक इनके परिणाम भी दिखेंगे.

आपकी यात्रा का प्रभाव क्या रहा और इसे कैसे हासिल करने जा रहे हैं? मैंने पहले ही कहा है कि यह बैठक काफी संतोषप्रद रही है. हम तीनों लोकतांत्रिक व विकासशील देश हैं, जो भारत, अफ्रीका व लैटिन अमेरिका के बीच आर्थिक सहयोग का रास्ता तैयार कर रहे हैं.

हमारे बीच व्यापारिक गतिविधियां सही दिशा में आगे बढ़ रही हैं. हमें उम्मीद है कि 2015 तक तीनों मुल्कों के बीच 25 बिलियन डालर व्यापार का लक्ष्य हासिल कर लेंगे. जो सबसे महत्वपूर्ण बात है, वह यह है कि व्यक्ति से व्यक्ति, वर्किंग ग्रुप के बीच संवाद स्थापित कर सिविल सोसाइटी और महिला समूहों, तकनीकी समूहों और किसान समूहों को करीब लाया जाये, ताकि एक ऐसा माहौल बने, जिसमें हम एक दूसरे से सीख पायें. सम्मेलन का यही संदेश है.

अपने देश की गरीबी, बेरोजगारी जैसी दीर्घकालीन बीमारियों को कैसे हल करेंगे? गरीबी और उपेक्षित तबकों की एक बड़ी आबादी हमारे मुल्क की बड़ी समस्या है. जिसे हल करना हमारे लिए एक बड़ी चुनौती है. हमें इस बात की गारंटी करनी होगी कि 12वीं पंचवर्षीय योजना में आर्थिक प्रगति को तेज करने के लिए नौ फीसदी की विकास दर हासिल की जाये. मौजूदा दुनिया में यह कठिन कार्यभार है, लेकिन इसे हासिल किया जा सकता है.

इसके लिए आधारभूत संरचना, शिक्षा, स्वास्थ्य आदि मोरचे पर रचनात्मक काम करना होगा. इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए युवा पीढ़ी को प्रोत्साहित करना होगा. उन्हें उत्पादक कार्यों में लगाना होगा, ताकि युवाओं व महिलाओं की बड़ी आबादी को इस मुहिम में शामिल किया जा सके.

प्रशांत भूषण पर हमला और केजरीवाल पर चप्पल फेंकने की घटना क्या समाज में बढ़ती असहिष्णुता का प्रतीक है?

लोकतंत्र में हिंसा का कोई स्थान नहीं है. ऐसी घटनाएं निंदनीय हैं. मेरी समझ है कि हिंसा के जरिये कुछ भी हासिल नहीं किया जा सकता है. कोई कितना भी नाराज हो, उसे अपनी बात सभ्य तरीके से ही रखनी होगी.

आडवाणी जी की यात्रा में पैसे बांटे गये हैं. क्या आप इससे सहमत हैं कि वे देश को नेतृत्व दे पायेंगे? देश की जनता को यह तय करना है. विदेशी भूमि पर मैं किसी राष्ट्रीय नेता की आलोचना नहीं कर सकता हूं. मैं आडवाणी जी की सफल यात्रा की शुभकामनाएं देता हूं. मैं उम्मीद करता हूं कि वह संयमित तरीके से अपनी यात्रा पूरी करेंगे. मैं सोचता हूं कि राजनीति में कटु शब्दों के इस्तेमाल से बचना चाहिए.

आपने महंगाई रोकने और मुद्रास्फीति पर लगाम के लिए बैठक की है. आम आदमी आने वाले दिनों में क्या उम्मीद कर सकता है?

इस मसले पर बैठक का उद्देश्य मुद्रास्फीति को रोकने का उपाय ढूंढ़ना था. आप जानते हैं कि हमारे पास कई उपाय हैं, जैसे-मौद्रिक नीति, राजकोषीय नीति और जनवितरण. हम एक साथ इन उपायों के सहारे महंगाई व मुद्रास्फीति को नियंत्रित कर सकते हैं. इस मसले पर जो बैठक हुई थी, उसमें विशेषज्ञों से मुद्रास्फीति व महंगाई जैसी समस्या से लड़ने के उपाय भी पूछे गये थे. उनके सुझावों के आलोक में सरकार कार्रवाई कर रही है.

(हस्तक्षेप) आप सकारात्मक नतीजे की कब तक उम्मीद

करते हैं?

मैं आश्वस्त हूं कि इस साल के अंत तक आप कुछ बेहतर नतीजे देख सकते हैं. सरकार पर उसके सहयोगी दल ही हमला कर रहे हैं. पवार ने हाल में सरकार पर आलोचनात्मक टिप्पणी की, तीस्ता मामले में तृणमूल कांग्रेस, डीएमके के मंत्री जेल में हैं. आप इस स्थिति पर क्या कहेंगे.

हमारी सरकार गंठबंधन की सरकार है. इसीलिए असहमति होना स्वाभाविक है. मुख्य बात यह है कि ये आपसी फर्क सरकार के आपसी समन्वय को प्रभावित न करें. हम आपको भरोसा दिलाना चाहते हैं कि असहमतियों के बावजूद संप्रग के दलों के बीच आपसी एकता बनाये रखना कभी कठिन काम नहीं रहा. जनता की जरूरतों को पूरा करने के लिए सरकार पूरे तालमेल के साथ काम करती है.

महंगाई को लेकर कहा जाता है कि इसकी प्राथमिक वजह मांग की अपेक्षा आपूर्ति के मामले से अधिक जुड़ा है. आरबीआइ के गवर्नर ने भी ऐसा ही कहा है. आप क्या कहेंगे.

आरबीआइ की नीतियों पर मेरा बोलना उचित नहीं है. यह उसका क्षेत्र है, लेकिन इस बात से इनकार नहीं है कि महंगाई की स्थिति के लिए दोनों ही पक्ष मांग व आपूर्ति जिम्मेवार हैं. ऊर्जा की कीमतों में वृद्धि के कारण अंतरराष्ट्रीय स्थिति भी मददगार नहीं है. एक्सचेंज रेट को हाल में घटाया गया, इसने भी कीमतों पर नियंत्रण रखने के कार्य को उलझा दिया.

सरकार की तरफ से कोई सुस्ती नहीं है, फिर भी तेलंगाना मुद्दे से आप किस प्रकार निबटेंगे.

सरकार की तरफ ऐसे उपाय निकालने की कोशिश की जा रही है, जिससे मामले का हल निकल सके. हम ऐसा हल निकालना चाहते हैं, जिससे सभी पक्षों में आम सहमति बनायी जा सके. जल्दबाजी में निर्णय लेने में परेशानियां हैं. तेलंगाना आंदोलन का लंबा इतिहास है. यह कोई नया आंदोलन नहीं है. यह पांचवें दशक से जारी है. मामला उतना सरल नहीं है. हल निकालने में थोड़ा समय लगेगा. इसीलिए हम सभी पक्षों से व्यापक बातचीत कर रहे हैं. हमें उम्मीद है कि हम ऐसा हल निकालने में सफल होंगे, जिससे सभी पक्षों को संतुष्ट किया जा सकेगा.

चीन से खतरे बढ़े हैं. सैनिकों के जमाव के अलावा क्या आप किसी कूटनीतिक पहलकदमी के बारे में भी योजना बना रहे हैं.

भारत व चीन पड़ोसी हैं. हमारे बीच समस्याएं हैं. सीमा का सवाल लंबे समय से बना हुआ है. लेकिन, मुझे उम्मीद है कि हम एक ऐसा रास्ता निकाल पायेंगे, जिससे दोनों पड़ोसी शांति-सद्भाव के साथ रह सकेंगे. सीमा समस्या के बावजूद दोनों देश इस बात पर सहमत हैं कि सीमा पर शांति बनाये रखी जाये. हमारे देश की मीडिया में कभी-कभार कुछ छपता रहता है. चीनी मीडिया में भी खबरें आती हैं, पर मैं समझता हूं कि दोनों देशों के बीच के संबंध बहुत अच्छे हैं. चीनी राष्ट्रपति हू जिन ताओ,प्रधानमंत्री वेन जिया बाओ के साथ हमारे रिश्ते अच्छे हैं. मैं मानता हूं कि चीन के प्रमुख नेता भारत-चीन के बीच की समस्याओं का शांतिपूर्ण समाधान चाहते हैं.

आपने वित्त मंत्री द्वारा पीएमओ को दिये नोट पर अब तक कुछ नहीं कहा है. आप क्या कहेंगे.

मैं समझता हूं कि वह अध्याय अब समाप्त हो चुका है. वित्त मंत्री व गृह मंत्री ने पहले ही आपस में बातें की हैं और पूरे मामले का अंत हो गया है.

ओड़िशा के साथ केंद्र सही व्यवहार नहीं कर रहा है. वहां खनन क्षेत्र में घोटाले हो रहे हैं. मैं समझता हूं कि इस बात का कोई आधार नहीं है कि मेरी सरकार गैर कांग्रेसी-गैर यूपीए सरकारों के साथ किसी तरह का कोई भेदभाव करती है. हमारी सरकार सभी राज्य सरकारों को राष्ट्र का अंग मानती है. इसीलिए जब भी किसी प्रदेश के मुख्यमंत्री ने हमारे सामने कोई सवाल उठाया, हमने संतोषजनक जवाब देने की कोशिश है.

यूरोप में आर्थिक मंदी के मद्देनजर हम अपनी अर्थव्यवस्था को कैसे बचायेंगे. हां, हमें यह सुनिश्चित करना है कि बाहर से कोई मंदी की हवा हमारी विकास दर को नकारात्मक ढंग से प्रभावित न करे. इसीलिए हमें निवेश के रफ्तार को बनाये रखना है. खासकर आधारभूत ढांचे, कृषि, ऊर्जा बचाने की तकनीक के क्षेत्र में निवेश को कम नहीं होने देना है. मुझे पूरा विश्वास है कि 2008 की तरह हम फिर विश्व को दिखायेंगे कि हम अन्य देशों में जारी संकट की हवा के विरुद्ध अपनी प्रगति जारी रख सकते हैं. अंतरराष्ट्रीय संकट के बावजूद अब भी भारत के लिए यह संभव है कि आठ फीसदी विकास दर कायम रखी जाये.

नीति निर्धारण में न्यायपालिका के हस्तक्षेप पर आप क्या कहेंगे. हमारा लोकतंत्र मजबूत है. इसीलिए कभी-कभी हमारे मंत्री अपने विचार व्यक्त करने की छूट हासिल करते रहते हैं. लेकिन,सरकार के बतौर हम न्यायपालिका का आदर व सम्मान करते हैं. संविधान ने विधायिका, न्यायपालिका व कार्यपालिका सबके लिए कार्य विभाजित कर दिया है. तीनों को इसका पालन करना चाहिए. अगर हम सभी अपने संवैधानिक धर्म का पालन करें, तो सभी चीजें सही रास्ते पर बढ़ेंगी.

सरकार के बारे में सीएजी की रिपोर्ट से दरार पड़ी है. मुझे नहीं मालूम. मैंने ऐसा वक्तव्य नहीं देखा है. इसीलिए इस बारे में मैं कुछ नहीं कह सकता. केन्स में जी-20 की बैठक से भारत की क्या उम्मीदें हैं.

आपने कल जारी विज्ञप्ति देखी होगी. हम आशा करते हैं कि विकसित देश खासकर यूरो देश अपने कर्ज व मंदी से बिटेंगे,जो अब वैश्विक चिंता बनती जा रही है.

क्या पुनर्गठन आयोग पुनर्गठित होगी.

अगर आप राज्यों के पुनर्गठन आयोग के गठन की बात कर रहे हैं, तो इस पर कई वर्षों से चर्चा चल रही है. कई स्रोतों से कई सुझाव आये हैं, जिसके अनुसार हमें देश के भीतर का नया नक्शा बनाना होगा, लेकिन हमने उस पर अभी विचार नहीं किया है.

विकास को जारी रखने के लिए हमें निवेश की जरूरत है. आपके कानून मंत्री ने कहा कि व्यवसायियों को जेल में रखने के कारण निवेश बाधित हो रहा है.

इस मामले में कोई प्रतिक्रिया जाहिर करना उचित नहीं है कि मेरे मंत्री ने क्या कहा. हमारे सिस्टम में कई कानूनी उपाय हैं. जब भी कोई कानून के खिलाफ जाता है, जब भी किसी को जेल में डाला जाता है, तो इससे निकलने के कानूनी रास्ते हैं. हमारा लोकतंत्र मजबूत है. हमारे तीनों अंगों- विधायिका, न्यायपालिका व कार्यपालिका के कार्य निर्धारित हैं.

तमिलनाडु की मुख्यमंत्री ने कहा कि कूडनकुलम मामले में उन्हें आपका कोई पत्र नहीं मिला. मुझे अफसोस है. मैंने वह बयान देखा है. मैंने एक पत्र भेजा है. मैं जब वापस जाऊंगा, तो मैं अपने दफ्तर में मालूम करूंगा कि वह पत्र समय पर क्यों नहीं पहुंचा. मैं महसूस करता हूं कि हम सभी पक्षों को संतुष्ट कर सकते हैं ,जो परमाणु ऊर्जा प्लांट की सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं. इसीलिए हमने मुख्यमंत्री से कहा कि हम उच्च स्तर की कमेटी बनायेंगे, जो राज्य सरकार से बात करेगी. स्थानीय लोगों से बात करेगी. यह आज या कल में गठित होगी. बिहार को विशेष राज्य के दर्जे पर आप क्या कहेंगे.

इसका जवाब बिल्कुल साधारण है. विशेष राज्य का दर्जा राष्ट्रीय विकास परिषद में तय होगा. बिहार का मामला भी योजना आयोग देख रहा है. अगर कोई निर्णय होना है, तो वह परिषद में ही होगा.

इब्सा के तीनों देशों में भ्रष्टाचार का मुद्दा है. भ्रष्टाचार के खिलाफ विरोध दिखता है. क्या आप मानते हैं कि विकास के दौर में भ्रष्टाचार स्वाभाविक है.

मैं नहीं समझता कि यह स्वाभाविक परिणाम है. मैं समझता हूं कि भ्रष्टाचार विकास प्रक्रिया को बाधित करता है. भ्रष्टाचार गरीबों की परेशानी बढ़ाता है. यह शासन प्रणाली की गुणवत्ता को नकारात्मक ढंग से प्रभावित करता है. इन सब कारणों से हम नहीं कह सकते कि हमारे समाज में भ्रष्टाचार स्वाभाविक है. मैं समझता हूं कि हाल के दिनों में भ्रष्टाचार पर हुई चर्चा ने अपना उद्देश्य पूरा कर लिया है. इसने भ्रष्टाचार के नुकसानदायी परिणामों,जो हमारी राजनीति, अर्थव्यवस्था व समाज के ताने-बाने को नष्ट कर रहा है, के प्रति हमारे समाज में जागरूकता पैदा की है. हमारी सरकार व्यवस्था को भ्रष्टाचारमुक्त करने के लिए सब कुछ करने को तैयार है.

क्या भारत में वाल स्ट्रीट आंदोलन की आंच पहुंच रही है.

शांतिपूर्ण प्रतिवाद की छूट है. यह किसी भी लोकतंत्र का हिस्सा है. लोगों के विरोध का आधार है. वाल स्ट्रीट ,यूरोप में लोग विरोध कर रहे हैं कि बैंकर भारी-भरकम वेतन लेते हैं,जबकि लोगों को कहा जा रहा है कि वे कठिन परिस्थिति का सामने करने के लिए तैयार रहें. अमेरिका में बढ़ती बेरोजगारी सवाल बन गया है. यूरोप की स्थिति भी चिंताजनक है. इसलिए, इन सवालों का उपयुक्त जवाब व्यवस्था को देना होगा. मैं समझता हूं कि इस तरह लोकतंत्र लोगों को अपनी समस्याएं रखने का अवसर देता है. यह सही समय पर उन लोगों के लिए चेतावनी है, जो शासन के प्रमुख पदों पर हैं.

टीम अन्ना आपका विरोध कर रही है.

मैं इस अवसर का इस्तेमाल किसी भी व्यक्ति विशेष की आलोचना के लिए नहीं करना चाहता. मैं समझता हूं कि अन्ना हजारे जी के आंदोलन ने अपना मकसद पूरा कर लिया है. हम सब संसद में मजबूत लोकपाल लाने के लिए काम कर रहे हैं. हम उम्मीद करते हैं कि संसद प्रभावी लोकपाल विधेयक पारित करेगी. यह इस बात का आश्वासन होगा कि देश में भ्रष्टाचार जीवन पद्धति के रूप में फल-फूल नहीं सकता.

क्या सूचना का अधिकार कानून कमजोर किया जायेगा.मैंने कभी नहीं कहा कि कानून को कमजोर किया जायेगा. काम करने के तरीके होते हैं. हमने यह कहा कि सूचना के अधिकार कानून के मकसद को पूरा करने के लिए हमें चीजों को संपूर्णता में देखना चाहिए. हमने यह कभी नहीं कहा कि हम आरटीइ को बदलने जा रहे हैं.

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