ePaper

नये साल में बेटियों को बनाएं निडर

Updated at : 05 Jan 2020 10:48 AM (IST)
विज्ञापन
नये साल में बेटियों को बनाएं निडर

स्वाती गुप्ता swatikapil26@gmail.com हर एक नयी सुबह के साथ तारीखें बदलती जाती हैं, उन तारीखों के बीतने के साथ ही दिन, महीने और साल खत्म होते जाते हैं, लेकिन अगर कुछ नहीं खत्म हो रहा है, तो वह है महिलाओं के विरूद्ध अपराध. हर दिन अखबारों के पन्नों तथा टीवी चैनलों में महिला अपराध से […]

विज्ञापन

स्वाती गुप्ता

swatikapil26@gmail.com
हर एक नयी सुबह के साथ तारीखें बदलती जाती हैं, उन तारीखों के बीतने के साथ ही दिन, महीने और साल खत्म होते जाते हैं, लेकिन अगर कुछ नहीं खत्म हो रहा है, तो वह है महिलाओं के विरूद्ध अपराध. हर दिन अखबारों के पन्नों तथा टीवी चैनलों में महिला अपराध से संबंधित एक नहीं, बल्कि कई खबरें पढ़ने-सुनने को मिल ही जाती हैं. इसके लिए राजनीतिक, प्रशासनिक, सामाजिक और सांस्कृतिक बदलाव के साथ-साथ लड़कियों तथा महिलाओं की सुरक्षा से संबंधित दृष्टिकोण में भी हमें बदलाव करने की जरूरत है. अब तक हम पुरुषों को महिलाओं की रक्षा की जिम्मेदारी सौंपते आये हैं, लेकिन इनमें से कई ‘रक्षक’ कब भक्षक बन जाते हैं, हम खुद भी इसका अंदाजा नहीं लगा पाते. बेहतर है कि हम लड़कियों और महिलाओं को आत्मसुरक्षा के तरीके सिखाएं. उन्हें आंतरिक और बाह्य रूप से खुद में ही इतना मजबूत कर दें कि वे अकेले ही किसी भी मुसीबत का सामना करने में सक्षम हो सकें. आज के दौर में यही वक्त की मांग भी है.
कराटे : कराटे आत्मसुरक्षा की एक जापानी विधि है. कराटे का पूरा मतलब ही खाली हाथ से अपनी आत्मरक्षा करना. इसमें बिना किसी हथियार का इस्तेमाल किये हाथ, कोहनी, घुटनों या पैरों से हमला करके हमलावर के संवेदनशील शारीरिक अंगों पर प्रहार करके स्वयं का बचाव किया जाता है. इस कला के जरिये बिना हथियार के न केवल हम अपना बचाव कर सकते हैं, बल्कि दूसरों का भी बचाव कर सकते हैं. आजकल महिला अपराध की संख्या में जिस तेजी से बढ़ोतरी हो रही है, उसे ध्यान में रखते हुए लड़कियों को आत्मसुरक्षा और आत्म सम्मान दोनों ही दृष्टिकोणों से कराटे का प्रशिक्षण देना बेहद जरूरी है.
कलरीपायट्टु: कलरीपायट्टु को दुनिया की सबसे पुरानी मार्शल आर्ट तकनीक माना जाता है. इस कला की उत्पत्ति दक्षिण भारत के केरल में हुई थी. कलारिपयट्टू में स्ट्राइक, किक्स, ग्रैपलिंग, प्रीसेट फॉर्म, हथियार और उपचार विधियां शामिल हैं. अन्य मार्शल आर्ट की तरह यह भी शरीर का लचीलापन बढ़ाता है. इस विधा में ऐसे कई फ्लेक्सिबल मूव्स शामिल होते हैं, जो आपकी बॉडी को फ्लेक्सिबल बनाने मे मदद करते हैं. इस मार्शल आर्ट में आक्रमण के साथ-साथ बचाव का तकनीक भी सिखाया जाता है. उन्नियर्चा नामक एक महान नायिका ने इस मार्शल आर्ट का उपयोग कर कई लड़ाइयों में जीत हासिल की है. बॉलीवुड सेलेब्रिटीज में भी कलरीपायट्टु को लेकर पिछले कुछ समय से काफी क्रेज है. फिल्म ‘बागी’ में टाइगर श्रॉफ ने खास तौर पर मास्टर शिफूजी शौर्य भारद्वाज से कलरीपायट्टु की ट्रेनिंग ली थी. एक्टर विद्युत जामवाल ने तीन साल की उम्र से इस कला को सीखना शुरु कर दिया था.
कर्व मागा : कर्व मागा इजरायल की एक सेल्फ डिफेंस टेक्निक है. सेल्फ डिफेंस के तौर पर इजरायली आर्मी के जवानों को इसकी ट्रेनिंग दी जाती है. इस घातक मार्शल आर्ट फार्म को इजराइल में केवल सेना के जवानों ने ही नहीं, बल्कि नागरिकों ने भी सीखा है. कर्व मागा में चुस्ती-फुर्ती के साथ ही विशेष और विषम परिस्थितियों में त्वरित दिमाग के साथ दुश्मनों से निपटने के दांव-पेंच सिखाये जाते हैं. जैसा हमला होता है उसके हिसाब से निपटा जाता है. कर्व मागा को दुनिया के कई देशों में सिखाया जाता है. यही नहीं कई सेलिब्रिटी ने भी इसे सीखा है. इंडिया में भी कर्व मागा को आप दिल्ली, नोएडा और मुंबई जैसे शहरों में सीख सकते हैं.
ताइक्वांडो : कोरियाई भाषा में ‘ताइ’ शब्द का अर्थ होता है- पैरों से कुचलना या किक मारना, दूसरी ओर, ‘क्वोन’ शब्द का अर्थ हैं हाथों से मारना या नष्ट करना और ‘डो’ शब्द का अर्थ है तरीका. अतः ताइक्वांडो का पूर्ण शाब्दिक अर्थ हुआ- ‘हाथों और पैरों के प्रहार से किसी पर हमला करना. ताइक्वांडो कला कोरिया की प्राचीन युद्धकला है, जिसमें बिना हथियार के युद्ध किया जाता है. इसका मुख्य तरीका यहां के प्राचीन ग्रामीण तरीके ‘ताइक्वॉन’ से लिया गया है, जो कोरिया में 2000 वर्ष पूर्व प्रचलित एक क्षेत्रीय युद्ध विधा थी.
मय थाई : मय थाई थाईलैंड का एक कठिन मार्शल आर्ट है, जिसमें भिन्न जकड़न तकनीकों के साथ खड़े होकर प्रहार किये जाते हैं. मय थाई को ‘आठ अंगों की कला’ या ‘आठ अंगों के विज्ञान’ के रूप में जाना जाता है, क्योंकि इसमें पंच (मुक्का), किक (पैर से हिट करना), कोहनी और घुटने से प्रहार किया जाते हैं. इस प्रकार से इसमें ‘संपर्क के आठ बिंदुओं’ का उपयोग किया जाता है. मय थाई में प्रैक्टिस करने वाले पेशेवर को ‘नाक मय’ के नाम से जाना जाता है.
जूडो : जूडो डॉ कानो जिगोरो द्वारा वर्ष 1882 में जापान में बनाया गया एक आधुनिक जापानी मार्शल आर्ट और लड़ाकू खेल है. इसकी प्रमुख विशेषता इसका प्रतिस्पर्धी तत्व है, जिसका उद्देश्य अपने प्रतिद्वंद्वी को जमीन पर पटकना, गतिहीन कर देना और फिर कुश्ती की चालों से अपने प्रतिद्वंद्वी को अपने वश में कर लेना या ज्वाइंट लॉक करके अर्थात जोड़ों को उलझा कर या गला घोंट कर या अन्य दम घोंटू तकनीकों का इस्तेमाल करके अपने प्रतिद्वंद्वी को समर्पण करने के लिए मजबूर कर देना है. हाथ और पैर के प्रहार और वार के साथ-साथ हथियारों से बचाव करना जुडो का एक हिस्सा है. भारत के आज अनेकों स्कूलों में आजकल जूडो का प्रशिक्षण दिया जाता है. अनेक देशों में स्कूल, कॉलेज के अतिरिक्त पुलिस और होम गॉर्ड को भी इसका प्रशिक्षण दिया जाता है. भारत में जूडो लाने का श्रेय कविगुरु रवींद्रनाथ टैगोर को जाता है. उन्होंने वर्ष 1929 में जापान के जूडो प्रशिक्षक थाकागाकी को जापान से भारत बुलाया और शांति निकेतन में जुडो प्रशिक्षण की शुरुआत करवायी थी.
विज्ञापन
Prabhat Khabar Digital Desk

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar Digital Desk

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola