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#AcidAttackSurvivor : बदलनी होगी पितृसत्तात्मक सोच, सोनी के साथ चार साल पहले हुआ ये

Updated at : 05 Jan 2020 10:36 AM (IST)
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#AcidAttackSurvivor : बदलनी होगी पितृसत्तात्मक सोच, सोनी के साथ चार साल पहले हुआ ये

वर्षा जवलगेकर, सामाजिक कार्यकर्ता, पटनाकरीब चार वर्ष पूर्व 2015 में बिहार के नवादा जिले के अकबरपुर पंचायत के पंचरूक्खी गांव में रहनेवाली सोनी परवीन पर उसके ही पड़ोस के तीन लोगों ने एसिड अटैक किया. वे तीनों सोनी पर अवैध रूप से शारीरिक संबंध बनाने का दवाब डाल रहे थे. सोनी ने उनका विरोध किया. […]

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वर्षा जवलगेकर, सामाजिक कार्यकर्ता, पटना
करीब चार वर्ष पूर्व 2015 में बिहार के नवादा जिले के अकबरपुर पंचायत के पंचरूक्खी गांव में रहनेवाली सोनी परवीन पर उसके ही पड़ोस के तीन लोगों ने एसिड अटैक किया. वे तीनों सोनी पर अवैध रूप से शारीरिक संबंध बनाने का दवाब डाल रहे थे. सोनी ने उनका विरोध किया. बात जब पंचायत में पहुंची तो, पंचों के आदेश पर उन्हें सार्वजनिक रूप से सोनी और उसके परिवार से माफी मांगनी पड़ी, लेकिन एक महीने बाद ही उन्होंने रात अंधेरे सोनी के घर में घुस कर उस पर एसिड डाल दिया. इससे सोनी का पूरा चेहरा झुलस गया. सोनी के बगल में उसकी छोटी बहन भी सोयी हुई थी. हमले में उसके हाथ-पैर की त्वचा भी जल गयी. चार साल इलाज के बाद भी सोनी के दोनों आंखों की रोशनी कमजोर है.

ड्राइवर पिता और गृहिणी मां के तीन संतानों में सबसे बड़ी सोनी उच्च शिक्षा प्राप्त करना चाहती है. उसे सिलाई-कढ़ाई का भी बेहद शौक है, लेकिन कमजोर नेत्र ज्योति की वजह से उसके सपने पूरे नहीं हो पा रहे. डॉक्टरों का कहना है कि उसकी आंखों की रोशनी लौट सकती है, लेकिन इसमें तीन-चार लाख रुपये का खर्च आयेगा. सोनी के अभिभावकों के लिए इतनी बड़ी रकम का जुटाना संभव नहीं हो पा रहा. इसके लिए उन्हें सरकार, समाज और प्रशासन से मदद की उम्मीद है. सोनी के दोषियों को पटना सिविल कोर्ट द्वारा उम्रकैद की सजा तो मिल गयी है, लेकिन इससे उसके जख्म नहीं भर सकते.

दरअसल हमारी पूरी राजनीतिक और सामाजिक व्यवस्था पितृसत्तात्मक और सामंतवादी है. इसमें पुरुषों को ‘ना’ सुनने की आदत नहीं. इसी वजह से महिलाओं के विरूद्ध एसिड अटैक, रेप, घरेलू हिंसा जैसी त्रासदी होती है. किसी भी व्यक्ति या संस्था को ऐसे मामलों के विरूद्ध कार्य करने के लिए सबसे पहले इस सोच को खत्म करना होगा. साथ ही, सरकार और प्रशासन ऐसे मामलों में पीड़िता को त्वरित और समुचित न्याय दिलाने की दिशा में पूरी इच्छाशक्ति के साथ आगे आने की जरूरत है, जिसकी फिलहाल बेहद कमी देखने को मिलती है.

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