जरूरतमंद लोगों की मदद करना आपको बना सकता है अच्छा परिजन

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 02 Sep 2018 2:27 PM

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वाशिंगटन : वैज्ञानिकों का कहना है कि सामाजिक सहायता देने खासकर जरूरतमंद लोगों की मदद करने से अभिभावकीय देखभाल से संबंधित दिमाग के कुछ हिस्से सक्रिय होते हैं. ये परिणाम सामाजिक संबंधों के सकारात्मक स्वास्थ्य प्रभावों को समझने में शोधकर्ताओं की मदद कर सकते हैं. एक शोध के मुताबिक तुलनात्मक रूप से देखा जाए तो […]

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वाशिंगटन : वैज्ञानिकों का कहना है कि सामाजिक सहायता देने खासकर जरूरतमंद लोगों की मदद करने से अभिभावकीय देखभाल से संबंधित दिमाग के कुछ हिस्से सक्रिय होते हैं. ये परिणाम सामाजिक संबंधों के सकारात्मक स्वास्थ्य प्रभावों को समझने में शोधकर्ताओं की मदद कर सकते हैं. एक शोध के मुताबिक तुलनात्मक रूप से देखा जाए तो अलक्षित समर्थन देना जैसे परोपकार के लिए दान करने से इसी तरह के न्यूरोबायोलॉजी संबंधी प्रभाव नहीं पड़ते हैं.

अमेरिका की पिट्सबर्ग यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने विभिन्न किस्म की सामाजिक सहायताएं देते समय मस्तिष्क की प्रतिक्रियाओं का आकलन करने के लिए कुछ प्रयोग किये. पहले अध्ययन में 45 स्वयंसेवियों को “समर्थन देने” का एक काम दिया गया जहां उनके पास अपने लिए या ऐसे करीबियों के लिए इनाम जीतने का मौका था जिन्हें पैसों की जरूरत थी (लक्षित सहायता) या वे इसका इस्तेमाल परोपकारी कार्यों (अलक्षित सहायता) के लिए दे सकते थे.

अनुमान के मुताबिक प्रतिभागियों ने लक्षित सामाजिक सहायता देने के दौरान खुद को समाज से ज्यादा जुड़ा हुआ पाया और महसूस किया कि उनका सहयोग ज्यादा प्रभावी था. इसके बाद प्रतिभागियों को भावनात्मक रेटिंग वाले कार्य करने को कहा जहां मदद देने के दौरान मस्तिष्क के सक्रिय होने वाले खास हिस्सों के आकलन के लिए उनकी क्रियाशील एमआरआई स्कैनिंग की गयी. सहायता देने को वेंट्रल स्ट्रिएटम (वीएस) और सेप्टल एरिया (एसए) के ज्यादा सक्रिय होने से जोड़कर देखा गया. इन दोनों हिस्सों को पूर्व के अध्ययनों में जानवरों के अभिभावकीय देखभाल संबंधी व्यवहार से जोड़कर देखा जा चुका है. हालांकि, लक्षित सहायता देते हुए सेप्टल एरिया की ज्यादा सक्रियता तभी देखी गयी जब मस्तिष्क की एक संरचना एमिगडाला में कम गतिविधि हुई.

दूसरे अध्ययन में 382 प्रतिभागियों ने मदद देने के अपने व्यवहार के बारे में जानकारियां दीं और कई भावनात्मक रेटिंग कार्य किए जहां उनकी एमआरआई स्कैनिंग की गयी. इस दौरान भी ज्यादा लक्षित सहायता देने वालों में एमिगडाला की गतिविधि कम देखी गई। यह अध्ययन ‘साइकोमेटिक मेडिसिन : जर्नल ऑफ बायोबिहेवियरल मेडिसिन’ में प्रकाशित हुआ है.

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