विटामिन डी की कमी का शिकार आप तो नहीं

Updated at : 07 Jun 2017 12:26 PM (IST)
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विटामिन डी की कमी का शिकार आप तो नहीं

विटामिन-डी की कमी (Vitamin D deficiancy) के मामले भारत में आम हो गये हैं. यहां करीब 70 प्रतिशत लोग इस रोग से ग्रसित हैं. विटामिन-डी का मुख्य स्रोत सूर्य की रोशनी है, पर आधुनिक जीवनशैली और एसी में रहने की आदत ने हमें खुले आकाश से दूर कर दिया है, जिस कारण हमारे शरीर को […]

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विटामिन-डी की कमी (Vitamin D deficiancy) के मामले भारत में आम हो गये हैं. यहां करीब 70 प्रतिशत लोग इस रोग से ग्रसित हैं. विटामिन-डी का मुख्य स्रोत सूर्य की रोशनी है, पर आधुनिक जीवनशैली और एसी में रहने की आदत ने हमें खुले आकाश से दूर कर दिया है, जिस कारण हमारे शरीर को जरूरी मात्रा में विटामिन-डी नहीं मिल पाता है. विदेशों में विटामिन-डी की पूर्ति फोर्टिफायड फूड से होती है, पर भारत में इसके लिए कोई उपाय नहीं है. भारत में फूड सप्लीमेंट लेने के बाद भी शरीर में 40 प्रतिशत विटामिन डी की कमी रह जाती है. इस बारे में बता रहे हैं हमारे विशेषज्ञ.
एक सर्वे के अनुसार भारत के शहरी इलाकों में करीब 97 प्रतिशत (दिल्ली) तक, जबकि असम में 30 प्रतिशत तक विटामिन डी की कमी है. सूर्य की रोशनी की प्रचुर मात्रा होने के बाद भी यहां विटामिन डी की कमी है, इसका मुख्य कारण है हमारी जीवनशैली. हम अब वातानुकुलित(AC) माहौल के आदी हो चुके हैं. हम कार में भी शीशा बंद कर एसी में रहते हैं. घर में भी खिड़कियां शीशे की हैं, जिससे रोशनी तो आती है, पर उसमें विटामिन डी नहीं होता है. विटामिन डी हमारे शरीर के लिए बेहद आवश्यक है. इसे सनशाइन विटामिन भी कहा जाता है. यह शरीर के सभी अंगों के लिए जरूरी है, पर मुख्य रूप से यह शरीर के मेटाबॉलिज्म को ठीक करता है.
विटामिन डी की कमी के लक्षण
विटामिन डी की कमी के कई लक्षण हो सकते हैं, जिनमें हड्डी में दर्द, मांसपेशियों में दर्द, कमर दर्द, बीपी बढ़ना, ऑस्टिपोरोसिस, रिकेट्स(बच्चों में), बार-बार इन्फेक्शन होना. इसकी कमी को चेक करने के लिए 25OH िवटामिन डी टेस्ट किया जाता है. यह टेस्ट करीब 1400 रुपये से 2000 रुपये तक का होता है. यदि विटामिन डी का लेवल 20ng/ml (50 nmol/l) से कम हो, तो उसे क्रिटीकल कंडीशन कहा जाता है. 21-29ng/ml हो, तो उसे कम और 30-60 ng/ml तक हो, तो उसे सही माना जाता है.

यदि 100 ng/ml से ज्यादा इसका लेवल हो, तो उसे टॉक्सिक या हानिकारक लेवल माना जाता है. ng/ml और nmol/l दो मात्रक हैं, अलग-अलग लैब में अलग-अलग मात्रक उपयोग किये जाते हैं. nmol/l के रीडिंग को 2.5 से भाग देने पर ng/ml की रीडिंग आ जाती है. जो लोग पैसे की कमी के कारण यह टेस्ट नहीं करा पाते वे अल्कलाइन फॉस्फेट का टेस्ट किया जाता है. यह 100 रुपये से कम में हो जाता है, पर इससे सटीक लेवल का पता नहीं लगाया जा सकता है.
कैसे मिले विटामिन डी
इसका मुख्य श्रोत सूर्य की रोशनी है. गर्मियों में सुबह 11 से दोपहर एक बजे तक और सर्दियों में दोपहर 12 से दो बजे तक के धूप में 10 से 15 मिनट तक बॉडी का कम-से-कम 10 प्रतिशत भाग खुला हो, तो शरीर के लिए जरूरी विटामिन डी मिल जाता है. हालांकि, वैज्ञानिक इस पर रिसर्च कर रहे हैं कि किन वजहों से भारत जैसे देश में भी लोगों में विटामिन डी की कमी हो जा रही है और उन्हें कितनी देर धूप में रहना चाहिए. क्योंकि यह व्यक्ति के स्किन द्वारा विटामिन डी के अवशोषण पर भी निर्भर करता है. औसतन आधा घंटा धूप में रहना काफी है. फोर्टिफायड फूड और समुद्री मछलियों में भी विटामिन डी पाया जाता है. हालांकि, ये फूड और मछलियां भारत में नहीं मिलती हैं.
अधिक होना भी खतरनाक
कई बार विटामिन डी की कमी के कारण लोग डॉक्टर से बिना जांच कराये भी विटामिन डी की गोली या इन्जेक्शन ले लेते हैं. इसकी अधिकता के कारण किडनी स्टोन, मनोरोग, कमजोरी हो सकती है. कई बार रोगी कोमा में भी चला जाता है और उसकी मौत तक हो जाती है. विटामिन डी की कमी को पूरा करने के लिए avaut टैबलेट दिया जाता है. 1000 से 2000 IU की दवा प्रतिदिन या 60,000 IU की दवा साप्ताहिक या फिर 6,00,000 IU का इन्जेक्शन तीन महीनें में एक बार लिया जाता है. हालांकि, यह रोगी के विटामिन डी के लेवल पर निर्भर करता है, इसलिए बिना जांच के दवाई लेना खतरनाक है. विटामिन डी की पूर्ति के लिए बेहतर होगा कि आप दूध और दुग्ध उत्पाद का उपयोग करें. कॉड लिवर, मछली का लिवर, मशरूम, तिल के लड्डू और तेल आदि का उपयोग कर सकते हैं.
डॉ अंकित श्रीवास्तव
एमडी, डीएम, आरोग्य
डायिबटीज एंड इंडोक्राइन
सेंटर, रांची
फोन : 06516006060
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