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World Wildlife Day 2023: आज मनाया जा रहा है विश्व वन्यजीव दिवस, जानें कैसे हुई हुई इस खास दिन की शुरुआत

Updated at : 03 Mar 2023 7:10 AM (IST)
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World Wildlife Day 2023: आज मनाया जा रहा है विश्व वन्यजीव दिवस, जानें कैसे हुई हुई इस खास दिन की शुरुआत

World Wildlife Day 2023: आज 3 मार्च को विश्व वन्यजीव दिवस मनाया जा रहा है. इस खास अवसर पर आइए जानें कि इस खास दिवस को मनाने की कैसे हुई शुरुआत और क्या है इसमें खास

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World Wildlife Day 2023:  हर साल आज के दिन यानी 3 मार्च  कोवर्ल्ड वाइल्ड लाइफ डे (World Wildlife Day)  मनाया जाता है. इस दिवस को जंगली जीवों के संरक्षण के प्रति जागरूकता लाने के लिए मनाया जाता है. विश्व वन्यजीव दिवस मनाने का मकसद ये है कि जैव विविधता को संरक्षित करने से मनुष्य को क्या लाभ हो सकता है ये बताना है. इस खास अवसर पर आइए जानें कि इस खास दिवस को मनाने की कैसे हुई शुरुआत और क्या है इसमें खास

संयुक्त राष्ट्र महासभा ने घोषित किया विश्व वन्यजीव दिवस

विश्व वन्यजीव दिवस के माध्यम से हर साल अलग-अलग थीम के माध्यम से लोगों में जागरुकता फैलाई जाती है. यह थीम लुप्त हो रहे जीवों और प्राकृतिक वनस्पतियों के संरक्षण से संबंधित होती है. 20 दिसंबर 2013 को संयुक्त राष्ट्र महासभा ने अपने 68वें सत्र में 3 मार्च को विश्व वन्यजीव दिवस घोषित किया था. इसे थाईलैंड की ओर से विश्व के वन्यजीवों और वनस्पतियों के बारे में जागरूकता बढ़ाने और मनाने के लिए प्रस्तावित किया गया था. साल 1872 में वन्य जीवों को विलुप्त होने से रोकने के लिए सबसे पहले जंगली हाथी संरक्षण अधिनियम (वाइल्ड एलीफेंट प्रिजर्वेशन एक्ट) पारित किया गया था.

कैसे हुई इस खास दिवस की शुरुआत?

दुनियाभर से लुप्त हो रहे जंगली फल-फूलों के अंतरराष्ट्रीय ट्रेड को प्रतिबंधित करने के लिए 3 मार्च 1973 को यूनाइटेड नेशंस के प्रस्ताव पर हस्ताक्षर हुए थे. इस खास दिन की याद में 20 दिसंबर 2013 को संयुक्त राष्ट्र महासभा के 63वें सत्र में तय हुआ कि हर साल 3 मार्च को वर्ल्ड वाइल्डलाइफ डे मनाया जाएगा. 3 मार्च 2014 को पहला विश्व वन्यजीव दिवस मनाया गया.

विश्व वन्यजीव दिवस का इतिहास

संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 20 दिसंबर 2013 को 68वें सत्र में 03 मार्च को विश्व वन्यजीव दिवस घोषित किया था. तीन मार्च को विलुप्तप्राय वन्यजीव और वनस्पति के व्यापार पर अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन को स्वीकृत किया गया था. वन्य जीवों को विलुप्त होने से रोकने हेतु सर्वप्रथम साल 1872 में जंगली हाथी संरक्षण अधिनियम (वाइल्ड एलीफेंट प्रिजर्वेशन एक्ट) पारित हुआ था.

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Shaurya Punj

लेखक के बारे में

By Shaurya Punj

मैंने डिजिटल मीडिया में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव हासिल किया है. पिछले 6 वर्षों से मैं विशेष रूप से धर्म और ज्योतिष विषयों पर सक्रिय रूप से लेखन कर रहा हूं. ये मेरे प्रमुख विषय हैं और इन्हीं पर किया गया काम मेरी पहचान बन चुका है. हस्तरेखा शास्त्र, राशियों के स्वभाव और उनके गुणों से जुड़ी सामग्री तैयार करने में मेरी निरंतर भागीदारी रही है. रांची के सेंट जेवियर्स कॉलेज से मास कम्युनिकेशन में स्नातक की डिग्री प्राप्त करने के बाद. इसके साथ साथ कंटेंट राइटिंग और मीडिया से जुड़े विभिन्न क्षेत्रों में काम करते हुए मेरी मजबूत पकड़ बनी. इसके अलावा, एंटरटेनमेंट, लाइफस्टाइल और शिक्षा जैसे विषयों पर भी मैंने गहराई से लेखन किया है, जिससे मेरी लेखन शैली संतुलित, भरोसेमंद और पाठक-केंद्रित बनी है.

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