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World Heritage Day 2025 : 18 अप्रैल को मनाया जाता है वर्ल्ड हैरीटेज डे, जानें महत्वपूर्ण बातें

Updated at : 18 Apr 2025 4:55 AM (IST)
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World Heritage Day 2025

World Heritage Day 2025

World Heritage Day 2025 : हर साल 18 अप्रैल को वर्ल्ड हैरीटेज डे यानी विश्व धरोहर दिवस मनाया जाता है, इस दिन का उद्देश्य दुनिया भर की सांस्कृतिक और प्राकृतिक धरोहरों के संरक्षण के प्रति जागरूकता फैलाना है, यहां जानें इस दिन से जुड़े कुछ सवालों के जबाब.

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World Heritage Day 2025 : हर साल 18 अप्रैल को वर्ल्ड हैरीटेज डे यानी विश्व धरोहर दिवस मनाया जाता है. इस दिन का उद्देश्य दुनिया भर की सांस्कृतिक और प्राकृतिक धरोहरों के संरक्षण के प्रति जागरूकता फैलाना है. यह दिवस हमें हमारी ऐतिहासिक विरासतों की महत्ता और संरक्षण की जिम्मेदारी का एहसास कराता है. दुनियाभर में इस मौके पर कई कार्यक्रम और गतिविधियां आयोजित की जाती है, यहां जानें इस दिन से जुड़े कुछ सवालों के जबाब :-

1. वर्ल्ड हैरीटेज डे कब मनाया जाता है और इसका उद्देश्य क्या है?

वर्ल्ड हैरीटेज डे हर साल 18 अप्रैल को मनाया जाता है. इसका उद्देश्य विश्व की सांस्कृतिक और प्राकृतिक धरोहरों के संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाना है. यह दिन हमें अपने ऐतिहासिक स्थलों की महत्ता समझाने का मौका देता है. साथ ही, इन धरोहरों को बचाने के लिए प्रेरित करता है.

2. विश्व धरोहर स्थलों की सुरक्षा और संरक्षण क्यों जरूरी है?

विश्व धरोहर स्थल हमारे इतिहास, संस्कृति और परंपराओं के प्रतीक होते हैं. ये स्थल आने वाली पीढ़ियों को हमारी सभ्यता और विरासत की जानकारी देते हैं. यदि इनका संरक्षण नहीं किया गया, तो ये धरोहर नष्ट हो सकती हैं. इसलिए इनका संरक्षण हमारे कर्तव्य के साथ-साथ ज़रूरी भी है.

3. भारत के कौन-कौन से स्थल यूनेस्को विश्व धरोहर सूची में शामिल हैं?

भारत में कई स्थल यूनेस्को विश्व धरोहर सूची में शामिल हैं, जैसे- ताजमहल (आगरा), कुतुब मीनार (दिल्ली), अजंता-एलोरा की गुफाएं (महाराष्ट्र), काजीरंगा नेशनल पार्क (असम), और महाबलीपुरम के स्मारक (तमिलनाडु). ये स्थल हमारी सांस्कृतिक विविधता और ऐतिहासिक समृद्धि को दर्शाते हैं. हर साल कुछ नए स्थल भी इस सूची में शामिल होते हैं.

4. वर्ल्ड हैरीटेज डे की शुरुआत कब और किस संगठन ने की थी?

वर्ल्ड हैरीटेज डे की शुरुआत 1982 में इंटरनेशनल काउंसिल ऑन मोन्यूमेंट्स एंड साइट्स (ICOMOS) द्वारा की गई थी. इसके बाद यूनेस्को ने 1983 में इसे आधिकारिक मान्यता दी. तब से हर साल 18 अप्रैल को यह दिवस अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मनाया जाता है. इसका मकसद सांस्कृतिक धरोहरों की रक्षा को बढ़ावा देना है.

5. हम आम नागरिक इस दिन को कैसे मना सकते हैं या योगदान दे सकते हैं?

हम इस दिन हैरीटेज साईट पर जाकर उनके बारे में जानकारी प्राप्त कर सकते हैं और दूसरों को भी जागरूक कर सकते हैं. सोशल मीडिया के ज़रिए धरोहरों के महत्व को साझा कर सकते हैं. साथ ही, हम साफ-सफाई बनाए रखकर और पर्यावरण का ध्यान रखकर इन स्थलों की रक्षा में योगदान दे सकते हैं. बच्चों और युवाओं को इतिहास से जोड़ना भी एक अच्छा प्रयास हो सकता है.

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Ashi Goyal

लेखक के बारे में

By Ashi Goyal

Ashi Goyal is a contributor at Prabhat Khabar.

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