Travel Tripura: मंदिरों और महलों का शहर है अगरतला, इतिहास व प्रकृति प्रेमी जरूर जाएं एकबार यहां घूमने

सदाबहार जंगलों से भरा राज्य त्रिपुरा, अपनी अनुपम हरियाली के साथ-साथ खुबसूरत महल, मंदिरों, बौद्ध मठों, विभिन्न जातियों, भाषाओं, त्योहारों और वाइल्ड लाइफ के रोमांच के लिए मशहूर है. चलिए करते हैं अगरतला की सैर.
Travel Tripura: म्यांमार व बांग्लादेश की घाटियों के मध्य बसे त्रिपुरा ने देश को सचिनदेव बर्मन, राहुल देव बर्मन जैसे संगीतज्ञ और दीपा करमाकर जैसी विश्वस्तरीय जिमनास्ट दी हैं. त्रिपुरा की राजधानी अगरतला में अनेक दर्शनीय स्थल को देखने के साथ-साथ यहां के मनोरम प्राकृतिक दृश्य पर्यटकों के दिल को असीम सुकून पहुंचाते हैं.
भव्य है अगरतला का उजयंता महल

इंडो-ग्रीक शैली में सफेद रंग का बना महाराजा राधाकिशोर माणिक्य का शाही निवास उजयंता महल अपनी भव्यता व सुंदरता के लिए विख्यात है. इसके विशालकाय गुंबद लंबे-लंबे बरामदे, नक्काशीदार दरवाजे तथा फव्वारे पर्यटकों का मन मोह लेते हैं. इस महल में हाथी के दांत से बना राज सिंहासन बेहद प्रसिद्ध है. इस महल का नामकरण गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर ने किया था. 800 एकड़ में बने इस महल में पहले त्रिपुरा राज्य की एसेंबली हुआ करती थी, पर अब महल त्रिपुरा स्टेट म्यूजियम में तब्दील हो चुका है. टिकट लेकर सुबह 10 बजे से शाम पांच बजे तक देखा जा सकता है. इस महल के परिसर में जगन्नाथ और उमा महेश्वर मंदिर भी है. रात को पूरे महल को बल्ब के प्रकाश में देखना बहुत ही लुभावना लगता है.
नीर महल में लें बोटिंग का मजा

अगरतला से लगभग 53 किलोमीटर की दूरी पर रूद्र सागर झील में स्थित विशाल नीर महल त्रिपुरा का खास आकर्षण है. एक जमाने में यह त्रिपुरा के राजा का ग्रीष्मकालीन शाही निवास हुआ करता था, जो बिना किसी संसाधन के वातानुकूलित वातावरण का सुख देता था. इसका निर्माण वीर विक्रम किशोर माणिक्य ने अपनी रानी कंचन प्रभा के लिए करवाया था. महल के बाहर लगी पट्टिका के अनुसार, इस महल का नामकरण भी गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर ने ही ‘नीर महल’ किया. महल के पश्चिमी भाग में शाही निवास था, जबकि पूर्वी भाग में थिएटर, नाटक, नृत्य जैसे मनोरंजनात्मक कार्यक्रम हुआ करते थे. सबसे मजेदार बात यह है कि इस महल को देखने के लिए मोटर बोट से जाना पड़ता है. यानी एकसाथ बोटिंग और महल भ्रमण दो मजे उठाइए.
चार हेक्टेयर में फैला हेरिटेज पार्क

हेरिटेज पार्क में त्रिपुरा के सभी प्रमुख विरासत स्थलों के छोटे-छोटे मॉडल बना कर रखे हैं, जिसे देखना बहुत अच्छा लगता है. यह पार्क चार हेक्टेयर क्षेत्र में फैला हुआ है. इसमें लकड़ी और पत्थर की कलाकृति के साथ लीची और नीलगिरी जैसे पेड़ को भी देखा जा सकता है.
सेपाहिजाला वन्य जीव अभ्यारण्य

घने जंगलों से आच्छादित सिपाहिजाला वन्यजीव अभ्यारण्य राजधानी अगरतला से लगभग 35 किलोमीटर दूरी पर है. तरह-तरह के पशु-पक्षियों के अलावा क्लाउडेड तेंदुआ, फायर्स लंगूर, केकड़े खाने वाले नेवले जैसे दुर्लभ जीव-जंतुओं के दर्शन होना इस अभ्यारण्य की विशिष्टता है. यहां के अबासारिका झील, अमृत सागर झील और बॉटनिकल गार्डन का आनंद भी लिया जा सकता है.
खास मंदिर है चतुर्दश देवता बाड़ी
त्रिपुरा के अधिकतर वासी वैष्णवी हैं और यहां अनेक हिंदू व वैष्णव मंदिर हैं. शहर से 14 किलोमीटर दूर पुराने अगरतला में चतुर्दश देवता मंदिर भी एक प्रसिद्ध मंदिर है, जहां 14 देवियों की पूजा होती है.
दुर्लभ चीजें संग्रहित हैं म्यूजियम में

चार गैलरियों में बंटे त्रिपुरा गवर्नमेंट म्यूजियम को अनगिनत हस्तलिपियों, शिल्पों, ऑयल पेंटिंग्स, कई तरह के चित्र, स्केच, रेखाचित्र, कपड़े और आभूषण, कच्ची-पक्की मिट्टी के बर्तन व मूर्तियां, प्राचीन सिक्कों व राज्य के सांस्कृतिक धरोहरों का अनूठा संग्रह माना जा सकता है. यहां इतिहास, पुरातत्व, वास्तु और मानव जीवन से जुड़ी कई किताबों की छपी हुई अंतिम और दुर्लभ प्रतियां यहां देखी जा सकती हैं. इतिहास में रुचि रखने वाले विद्यार्थियों को यह विशेष रूप से आकर्षित करता है.
अगरतला से जुड़ी अन्य रोचक बातें
- अगरतला, देश के प्रमुख शहरों से हवाई मार्ग से जुड़ी हुई है. कोलकाता या गुवाहाटी से यहां तक की हवाई यात्रा में सिर्फ 45 मिनट लगते हैं. त्रिपुरा के खोवाई, कमालपुर और कैलाश शहर में भी एयरपोर्ट हैं, जहां छोटे विमान से जाया जा सकता है.
- गुवाहाटी से सड़क मार्ग से शिलॉन्ग के रास्ते जाया जा सकता है, वहां पहुंचने में लगभग 24 घंटे लगते हैं. दिलचस्प बात यह है कि त्रिपुरा की भौगोलिक स्थिति ऐसी है कि इसकी जगह बांग्लादेश के रास्ते त्रिपुरा पहुंचना ज्यादा आसान है.
- यहां शॉपिंग करनी है, तो बांस और बेंत की वस्तुएं, फर्नीचर्स अपनी मजबूती और अनूठे डिजाइन के लिए प्रसिद्ध हैं. हस्तशिल्प के अन्य छोटे-मोटे सामान भी खरीदे जा सकते हैं.
- बांग्लादेश से अगरतला की दूरी महज दो किलोमीटर है बांग्लादेश और अगरतला की सीमा पर दोनों देशों के सीमा सुरक्षा बल के जवान अपने-अपने राष्ट्रीय ध्वज को सम्मानपूर्वक उतारते और अगली सुबह फिर फहराते हैं. इसे देखने भी पर्यटक आते हैं.
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लेखक के बारे में
By Vivekanand Singh
Journalist with over 11 years of experience in both Print and Digital Media. Specializes in Feature Writing. For several years, he has been curating and editing the weekly feature sections Bal Prabhat and Healthy Life for Prabhat Khabar. Vivekanand is a recipient of the prestigious IIMCAA Award for Print Production in 2019. Passionate about Political storytelling that connects power to people.
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