क्या आपका बच्चा भी 3 से 5 साल का है? अनजाने में की गई आपकी ये गलतियां उसकी जिंदगी पर डाल सकती हैं गहरा असर

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3 से 5 साल के बच्चों की परवरिश में कौन सी गलतियां नहीं करनी चाहिए? AI image

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Parenting Tips: 3 से 5 साल की उम्र में बच्चे बहुत तेजी से सीखते हैं और जो कुछ भी अपने आस-पास देखते हैं, उसे अपने व्यवहार का हिस्सा बना लेते हैं। ऐसे में माता-पिता की कुछ आम गलतियां उनके दिल और दिमाग पर गहरा असर डाल सकती हैं. अगर आपके घर में भी इस उम्र का बच्चा है, तो इन गलतियों के बारे में जरूर जान लेना चाहिए.

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Parenting Tips: 3 से 5 साल की उम्र किसी भी बच्चे की जिंदगी का सबसे खास और नाजुक दौर होता है. इस उम्र में बच्चे मिट्टी के उस घड़े की तरह होते हैं, जिसे आप शुरुआत में जैसा शेप देते हैं, वह उसी हिसाब से ढल जाता है. इस उम्र में बच्चे बहुत ही मासूम होते हैं और अपने आस-पास की हर एक छोटी से छोटी चीज को काफी तेजी से सीखते हैं और अपने अंदर एब्जॉर्ब कर लेते हैं. अगर आपके घर पर बच्चे हैं और उनकी उम्र 3 से 5 साल के बीच है, तो यह आर्टिकल खास आपके लिए ही है. आज हम आपको कुछ ऐसी गलतियों के बारे में बताने जा रहे हैं, जिन्हें अक्सर हर माता-पिता इस उम्र में बच्चे की परवरिश करते हुए दोहरा देते हैं. अगर आप समय रहते इन गलतियों को सुधारते नहीं हैं, तो इनका असर आपके बच्चे के दिल और दिमाग पर काफी गहरा पड़ सकता है. तो चलिए इन गलतियों के बारे में जानते हैं, जिन्हें आपको अपने 3 से 5 साल के बच्चे की परवरिश करते समय कभी नहीं दोहराना चाहिए.


common parenting mistakes to avoid
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हर बात पर टोकना और मना करना

3 से 5 साल की उम्र में बच्चों के अंदर हर चीज को जानने की इच्छा बहुत ज्यादा होती है. ये बच्चे हर चीज को छूकर देखना चाहते हैं और उनसे जुड़े ढेरों सवाल करते हैं. लेकिन, कई बार माता-पिता इस डर से कि कहीं कोई चीज टूट न जाए या बच्चे को चोट न लग जाए, उन्हें हर बात पर टोकने लगते हैं. अपने बच्चे को बार-बार वहां मत जाओ, इसे हाथ मत लगाओ, ऐसा मत करो जैसी चीजें कहते रहना बच्चे का भरोसा खुद पर कम हो जाता है. वह नई चीजें सीखने से डरने लगता है और शांत बैठ जाता है. इसलिए, किसी भी पैरेंट को अपने बच्चों की सुरक्षा का ख्याल रखते हुए उन्हें खुलकर खेलने और चीजें सीखने का मौका देना चाहिए.

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दूसरे बच्चों से तुलना करना

इस उम्र में आपको कभी भी अपने बच्चे की तुलना दूसरे बच्चों या फिर आस-पड़ोस के बच्चों से नहीं करनी चाहिए. अक्सर हर घर में माता-पिता अपने बच्चों के साथ ऐसी गलती अनजाने में ही कर बैठते हैं. माता-पिता को लगता है कि ऐसा करने से उनका बच्चा सुधर जाएगा या फिर बेहतर परफॉर्म करने लगेगा, लेकिन इसका असर अक्सर बिल्कुल उल्टा ही होता है. आपको यह समझना होगा कि हर बच्चा अलग होता है और सबके सीखने की रफ्तार भी अलग होती है. जब आप अपने बच्चे की तुलना किसी और से करते हैं, तो उसे लगता है कि वह कमजोर है. आपकी इस गलती की वजह से बच्चा उदास रहने लगता है और कई बार आपसे दूरी भी बनाने लग जाता है.

बच्चे के सामने गुस्सा करना या चिल्लाना

छोटे बच्चे घर पर मौजूद हर एक शख्स की नकल बहुत ही अच्छे से कर लेते हैं . वे वही करते हैं जो अपने माता-पिता को करते हुए देखते हैं. अगर आप घर में बात-बात पर चिल्लाएंगे या गुस्सा करेंगे, तो बच्चा भी वही सीखेगा. जब बच्चा जिद करता है और माता-पिता उस पर चिल्ला देते हैं, तो बच्चा या तो बहुत डर जाता है या फिर खुद भी जिद्दी और गुस्सैल बन जाता है. बच्चों को अच्छी बातें सिखाने के लिए माता-पिता का खुद शांत रहना बहुत जरूरी है. आपको शायद यह जानकर हैरानी हो लेकिन प्यार से समझाई गई बात बच्चे जल्दी मानते और समझते हैं.

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हर जिद को तुरंत पूरा कर देना

बच्चों को प्यार करना अच्छी बात है, लेकिन उनके रोने या जिद करने पर हर बात मान लेना पूरी तरह से गलत है. जब माता-पिता बच्चे की हर बात तुरंत पूरी कर देते हैं, तो बच्चे को ना सुनने की आदत नहीं रहती. इसके अलावा जब आगे चलकर उन्हें किसी चीज के लिए मना किया जाता है, तो वे बहुत ज्यादा गुस्सा करने लगते हैं और माता-पिता की बातों को भी नहीं मानते. आपके लिए इस उम्र में अपने बच्चों को यह समझाना बहुत जरूरी है कि हर चीज हर समय नहीं मिल सकती. इसके अलावा आपके लिए अपने बच्चों को सब्र रखना सिखाना भी बहुत जरूरी है.

स्मार्टफोन और टीवी की आदत डलवाना

आज के समय में यह सबसे बड़ी प्रॉब्लम बन गई है. काम में बिजी होने की वजह से बच्चे को शांत और एक जगह पर बैठाकर रखने के लिए उनके हाथों में स्मार्टफोन दे देते हैं या फिर टीवी चलाकर छोड़ देते हैं. जब बच्चे अपना ज्यादातर समय टीवी और स्मार्टफोन का इस्तेमाल करने में बिताने लगते हैं, तो उनके दिमाग, आंखों और नींद पर काफी बुरा असर पड़ता है. इससे बच्चे दूसरों से बातचीत करना या बाहर जाकर खेलना बंद कर देते हैं, और एक समय के बाद वे पूरी तरह से अकेले रहने लगते हैं. हर पैरेंट के लिए यह जरूरी है कि बच्चे को स्मार्टफोन देने के बजाय उन्हें कहानियों की किताबें पढ़कर सुनाएं, उनके साथ खिलौनों से खेलें या उन्हें कलर्स से ड्राइंग करना सिखाएं.

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सौरभ पोद्दार

लेखक के बारे में

By सौरभ पोद्दार

मैं सौरभ पोद्दार, पिछले लगभग 3 सालों से लाइफस्टाइल बीट पर लेखन कर रहा हूं. इस दौरान मैंने लाइफस्टाइल से जुड़े कई ऐसे विषयों को कवर किया है, जो न सिर्फ ट्रेंड में रहते हैं बल्कि आम पाठकों की रोजमर्रा की जिंदगी से भी सीधे जुड़े होते हैं. मेरी लेखनी का फोकस हमेशा सरल, यूजर-फ्रेंडली और भरोसेमंद भाषा में जानकारी देना रहा है, ताकि हर वर्ग का पाठक कंटेंट को आसानी से समझ सके. फैशन, हेल्थ, फिटनेस, ब्यूटी, रिलेशनशिप, ट्रैवल और सोशल ट्रेंड्स जैसे विषयों पर लिखना मुझे खास तौर पर पसंद है.

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