ePaper

सरहुल में लाल पाड़ वाली सफेद साड़ी ही क्यों पहनतीं हैं आदिवासी महिलाएं, क्या है इसका महत्व

Updated at : 23 Mar 2023 9:29 PM (IST)
विज्ञापन
सरहुल में लाल पाड़ वाली सफेद साड़ी ही क्यों पहनतीं हैं आदिवासी महिलाएं, क्या है इसका महत्व

सरहुल में महिलाओं में लाल बॉर्डर वाली साड़ी पहनने का चलन है. सफेद रंग शांति और पवित्रता का प्रतीक है, जबकि लाल रंग क्रांति का. सरना झंडा में भी सफेद और लाल रंग ही हैं. कहते हैं कि सफेद रंग ‘सिंगबोंगा’ का प्रतीक है, तो लाल रंग को ‘बुरूंबोंगा’ का प्रतीक माना जाता है.

विज्ञापन

झारखंड, पश्चिम बंगाल, ओड़िशा और मध्यप्रदेश के आदिवासियों का एक महत्वपूर्ण पर्व है सरहुल. सरहुल प्रकृति से जुड़ा पर्व है. इस दिन साल के फूल की जितनी अहमियत होती है, उतनी ही अहमियत लाल पाड़ वाली सफेद साड़ी की भी है. सरहुल के दिन प्रकृति की पूजा तो होती ही है, लोग नृत्य भी करते हैं. इस दिन पुरुष गंजी और धोती के साथ लाल गमछा अपने पास रखते हैं. वहीं, महिलाएं लाल पाड़ वाली सफेद साड़ी पहनती हैं.

जे नाची से बांची

आदिवासी विद्वान राम दयाल मुंडा कहा करते थे- जे नाची से बांची. यानी जो नाचेगा, वही बचेगा. अर्थात् जीवन में मस्ती बनी रहनी चाहिए. नाच-गान से हर तरह का तनाव दूर हो जाता है. एक धुन पर नाचने से एकता बनी रहती है. पौराणिक काल से ही नृत्य ही आदिवासियों की संस्कृति है. सरहुल ही नहीं, आदिवासियों के हर पर्व-त्योहार में नृत्य की प्रधानता है. पर्व-त्योहार मनाने के बाद आदिवासी अखड़ा में नाचने जाते हैं.

Also Read: सरहुल का महाभारत कनेक्शन : आदिवासियों ने दिया था कौरवों का साथ, पांडवों के हाथों हुई ‘मुंडा सरदार’ की मौत
सरहुल में लाल बॉर्डर वाली साड़ी का चलन

सरहुल में महिलाओं में लाल बॉर्डर वाली साड़ी पहनने का चलन है. सफेद रंग शांति और पवित्रता का प्रतीक है, जबकि लाल रंग क्रांति का. सरना झंडा में भी सफेद और लाल रंग ही हैं. कहते हैं कि सफेद रंग ‘सिंगबोंगा’ का प्रतीक है, तो लाल रंग को ‘बुरूंबोंगा’ का प्रतीक माना जाता है. इसलिए ‘सरना झंडा’ में सफेद और लाल रंग होता है.

हर शुभ काम की शुरुआत प्रकृति की उपासना से करते हैं

उल्लेखनीय है कि आदिवासियों की आजीविका कृषि पर निर्भर है. वे हर शुभ काम प्रकृति की उपासना के साथ करते हैं. सरहुल भी अपवाद नहीं है. सरहुल आदिवासियों का सबसे बड़ा पर्व है. गेहूं (रबी) की नयी फसल की कटाई सरहुल पर्व के बाद ही होती है. सरहुल के दिन दिन ही पाहन घोषणा करते हैं कि इस साल कैसी बारिश होगी. अच्छी-खासी बारिश होगी या क्षत्र में अकाल पड़ेगा.

Also Read: Sarhul Festival: झारखंड में कब मनाया जायेगा आदिवासियों का सबसे बड़ा पर्व सरहुल, कौन लोग मनाते हैं यह त्योहार
ग्रामीण अंचलों में एक महीने तक मनता है सरहुल का पर्व

शहरों में सरहुल पर्व मनाने के लिए कई संस्थाएं बन गयीं हैं. उनकी ओर से कई तरह के दिशा-निर्देश जारी किये जाते हैं. मुख्य कार्यक्रम एक जगह होता है, लेकिन सभी क्षेत्रों में लोग अपने-अपने हिसाब से सरहुल मनाते हैं. ग्रामीण अंचलों में अलग-अलग दिन एक महीने तक सरहुल का पर्व लोग मनाते हैं.

24 मार्च को मनाया जा रहा सरहुल का पर्व

बता दें कि इस बार सरहुल का पर्व 24 मार्च को मनाया जा रहा है. आमतौर पर सरहुल का पर्व अप्रैल के महीने में आता है. लेकिन, हिंदी तिथि के अनुसार, कई बार मार्च के महीने में भी सरहुल मनाया जाता है. हर साल चैत्र शुक्ल तृतीया तिथि को सरहुल पर्व मनाने की परंपरा है. इस बार यह तिथि 24 मार्च को है. इसलिए इसी दिन सरहुल का पर्व मनेगा.

विज्ञापन
Mithilesh Jha

लेखक के बारे में

By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola