Independence Day 2023: स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले का होता है कुछ यूं नजारा, देखकर कहेंगे- वाह!

Published by : Shaurya Punj Updated At : 07 Aug 2023 12:58 PM

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Independence Day 2023 visit these patriortic tourist places of india: दिल्ली का लाल किला वह जगह है, जहां हर साल 15 अगस्त पर प्रधानमंत्री राष्ट्र को संबोधित करते हैं. अगर आप भी यहां आना चाहते हैं तो इस स्वतंत्रता दिवस प्लान बना सकते हैं.

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Independence Day 2023:  15 अगस्त 2023 को आजादी के 76 साल पूरे होने वाले हैं. हर भारतीय का दिल देशभक्ति से सराबोर है. इस दिन देश की आजादी को सेलीब्रेट करने कई लोग घूमने का प्लान बना रहे हैं. ऐसे में आपको हम बताने वाले हैं लाल किले के बारे में जहां इस दिन देशभक्ति का जज्बा लोगों में देखने को मिलता है. दिल्ली का लाल किला (Red Fort) वह जगह है, जहां हर साल 15 अगस्त पर प्रधानमंत्री राष्ट्र को संबोधित करते हैं. यहां आजादी का फुल जश्न होता है. स्वतंत्रता दिवस के कुछ दिन पहले से ही यहां तैयारियां शुरू हो जाती हैं. अगर आप भी यहां आना चाहते हैं तो इस स्वतंत्रता दिवस प्लान बना सकते हैं.

लाल किले का इतिहास

लाल किला 1648 में पांचवें मुगल सम्राट शाहजहाँ द्वारा बनवाया गया था, जब उन्होंने अपनी राजधानी को आगरा से दिल्ली स्थानांतरित करने का फैसला किया. दिल्ली के लाल किला का स्थापत्य दरअसल आगरा के लाल किले से प्रेरित है जिसे शाहजहाँ के दादा अकबर ने बनवाया था.

49.1815 हेक्टेयर (256 एकड़) में फैले दिल्ली के लाल किला परिसर में बगले का पुराना किला सलीमगढ़ भी शामिल है, जिसे इस्लाम शाह सूरी ने 1546 में बनवाया था. इस विशाल दीवार वाली संरचना को पूरा होने में लगभग एक दशक (10 साल) का समय लगा था. शाहजहाँ के दरबार के उस्ताद हामिद और उस्ताद अहमद ने 1638 में निर्माण शुरू किया और 1648 में इसको पूरा किया.

यमुना नदी के तट पर निर्मित, जिसका पानी किले के चारों ओर की खाई में जाता था, अष्टकोणीय आकार का लाल किला अंग्रेजों के सत्ता में आने से पहले लगभग 200 वर्षों तक मुगल साम्राज्य की गद्दी बना रहा.

लाल किला वास्तुकला (आर्किटेक्चर)
 
दिल्ली का लाल किला मुगल वास्तुकला की प्रतिभा को दर्शाता है, जो विभिन्न स्थानीय निर्माण की परंपराओं जैसे फारसी और हिंदू वास्तुकला के साथ मिश्रित है. लाल किला ने इसके बाद बने दिल्ली, राजस्थान और उत्तर प्रदेश के प्रमुख स्मारकों की वास्तुकला को प्रभावित किया है.

75 फीट ऊंची लाल बलुआ पत्थर (रेड सैंडस्टोन) की दीवारों से घिरे लाल किला के ग्राउंड में महल, शाही रानियों के निजी कक्ष, मनोरंजन हॉल, शाही भोजन एरिया, प्रोजेक्टिंग बालकनियाँ, स्नानागार, इनडोर नहरें (नाहर-ए-बिहिष्ट या स्वर्ग की धारा), बाग और एक मस्जिद भी है. परिसर के भीतर सबसे प्रमुख संरचनाओं में दीवान-ए-आम और दीवान-ए-खास शामिल हैं, जो मुगल युग की अधिकतर इमारतों में पाई जाने वाली एक विशेषता है.

दिल्ली का लाल किला: एक विश्व धरोहर स्थल

लाल किला को 2007 में यूनेस्को की विश्व धरोहर स्थल घोषित किया गया था. इसे प्राचीन स्मारक और पुरातत्व स्थल और अवशेष अधिनियम, 1959, के तहत राष्ट्रीय महत्व का स्मारक भी घोषित किया गया है और इसका प्रबंधन भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा किया जाता है.

लाल किला में अब संग्रहालय हैं जो विभिन्न प्रकार की ऐतिहासिक कलाकृतियों को प्रदर्शित करते हैं. इनमें सुभाष चंद्र बोस संग्रहालय, 1857 का संग्रहालय, याद-ए-जलियां, दृश्यकला और आजादी के दीवाने शामिल हैं.

दिल्ली का  लाल किला के बारे में मुख्य तथ्य

स्वतंत्रता दिवस पर झंडा फहराना: भारत के प्रधानमंत्री हर वर्ष स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले पर राष्ट्रीय झंडा फहराते हैं. 15 अगस्त 1947 को भारत को अंग्रेजों से आजादी मिलने के बाद से यह परंपरा चल रही है.

असली नाम

इमारत का असली नाम किला-ए-मुबारक था. अंग्रेजों ने इसकी विशाल लाल बलुआ पत्थर की दीवारों के कारण इसका नाम रेड फोर्ट रख दिया, जबकि स्थानीय लोगों ने उसका अनुवाद लाल किला किया.

असली रंग

चूंकि दिल्ली में लाल बलुआ पत्थर की पर्याप्त आपूर्ति नहीं थी, इसलिए लाल किला मूल रूप से चूना पत्थर से बना था. समय के साथ, बाद में इसे अंग्रेजों द्वारा लाल रंग से रंगा गया था.

अंतिम मुगल का मुकदमा स्थल

अंग्रेजों ने अंतिम मुगल सम्राट बहादुर शाह जफर पर राजद्रोह के आरोप में लाल किला में मुकदमा चलाया, जिसके बाद उन्हें रंगून (अब म्यांमार) भेज दिया गया.

लाल किला लाइट एंड साउंड शो

लाल किला 60 मिनट के लाइट एंड साउंड शो की मेजबानी करता है, जो आगंतुकों को स्मारक के इतिहास के बारे में बताता है. आप शो ऑनलाइन बुक कर सकते हैं या किले के बूथों से टिकट खरीद सकते हैं. हालांकि सीजन के अनुसार समय अलग-अलग हो सकता है, यह शो हिंदी में शाम 7:30 से 8:30 बजे के बीच और अंग्रेजी में रात 9:00 बजे से 10:00 बजे के बीच होता है.

दिल्ली लाल किला का समय

घूमने का समय: 7:00 पूर्वाह्न – 5:30 अपराह्न

घूमने के लिए खुला होने के दिन: मंगलवार से रविवार

साप्ताहिक अवकाश: सोमवार

पूरा घूमने  के लिए आवश्यक समय: 2-3 घंटे

प्रवेश शुल्क

15 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए कोई शुल्क नहीं; भारतीय नागरिकों, सार्क और बिम्सटेक देशों के नागरिकों के लिए 10 रुपये; विदेशी नागरिकों के लिए 250 रुपये.

जाने का सबसे अच्छा समय: नवंबर से फरवरी

निकटतम मेट्रो स्टेशन: लाल किला (वायलेट लाइन), चांदनी चौक (येलो लाइन)

लाल किला लाइट और साउंड शो टिकट: सप्ताह के दिन: वयस्कों के लिए 60 रुपये और बच्चों के लिए 20 रुपये; सप्ताहांत और सार्वजनिक अवकाश: वयस्कों के लिए 80 रुपये और बच्चों के लिए 30 रुपये.

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Shaurya Punj

लेखक के बारे में

By Shaurya Punj

शौर्य पुंज डिजिटल मीडिया में पत्रकार हैं और वर्तमान में प्रभातखबर.कॉम में सीनियर कंटेंट राइटर हैं. उन्हें न्यूज वर्ल्ड में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव है. शौर्य खबरों की नब्ज को समझकर उसे आसान और प्रभावी भाषा में पाठकों तक पहुंचाने में माहिर हैं. साल 2008 में ग्रेजुएशन के दौरान उन्होंने दैनिक हिंदुस्तान, प्रभात खबर, दैनिक जागरण और तरंग भारती (हिंदी पाक्षिक समाचार पत्र) के लिए फ्रीलांसिंग की. वर्ष 2011 में उन्होंने दैनिक जागरण के टैब्लॉइड समाचार पत्र iNext में दो महीने की इंटर्नशिप की. इसी दौरान उन्हें प्रभात खबर के डिजिटल सेक्शन में काम करने का अवसर मिला. अप्रैल 2011 से उन्होंने प्रभातखबर.कॉम के एंटरटेनमेंट सेक्शन के लिए कार्य करना शुरू किया. उस समय उन्होंने बॉलीवुड फिल्म रिव्यू, बॉक्स ऑफिस बिजनेस और एंटरटेनमेंट गॉसिप जैसी खबरों पर काम किया. साल 2020 में कोरोना काल के दौरान उन्हें लाइफस्टाइल, धर्म-कर्म, एजुकेशन और हेल्थ जैसे नॉन-न्यूज सेक्शन में काम करने का अवसर मिला. उन्होंने लाइफस्टाइल कैटेगरी के कई महत्वपूर्ण सेक्शनों में योगदान दिया. Health & Fitness सेक्शन में डाइट, योग, वेट लॉस, मानसिक स्वास्थ्य और फिटनेस टिप्स से जुड़े उपयोगी कंटेंट पर कार्य किया. Beauty & Fashion सेक्शन में स्किन केयर, हेयर केयर, मेकअप और ट्रेंडिंग फैशन विषयों पर लेख तैयार किए. Relationship & Family कैटेगरी में पति-पत्नी संबंध, डेटिंग, पैरेंटिंग और दोस्ती जैसे विषयों पर जानकारीपूर्ण कंटेंट लिखा. Food & Recipes सेक्शन में हेल्दी फूड, रेसिपी और किचन टिप्स से संबंधित सामग्री विकसित की. Travel सेक्शन के लिए घूमने की जगहों, बजट ट्रिप और ट्रैवल टिप्स पर लेखन किया. Astrology / Vastu में राशिफल, वास्तु टिप्स और ज्योतिष आधारित कंटेंट पर काम किया. Career & Motivation सेक्शन में सेल्फ-इम्प्रूवमेंट, मोटिवेशन और पर्सनैलिटी डेवलपमेंट विषयों पर योगदान दिया. Festival & Culture सेक्शन में त्योहारों की परंपराएं, पूजा विधि और शुभ मुहूर्त से संबंधित कंटेंट पर कार्य किया. इसके अलावा Women Lifestyle / Men Lifestyle और Health Education & Wellness जैसे विषयों पर भी मर्यादित एवं जानकारीपूर्ण लेखन के माध्यम से योगदान दिया. साल 2023 से शौर्य ने पूरी तरह से प्रभातखबर.कॉम के धर्म-कर्म और राशिफल सेक्शन में अपना योगदान देना शुरू किया. इस दौरान उन्होंने दैनिक राशिफल, साप्ताहिक एवं मासिक भविष्यफल, पूजा-पाठ, व्रत-त्योहार, शुभ मुहूर्त, ज्योतिषीय उपाय, वास्तु टिप्स और धार्मिक मान्यताओं से जुड़ी खबरों पर विशेष फोकस किया. साथ ही पाठकों की रुचि को ध्यान में रखते हुए सरल, सहज और जानकारीपूर्ण धार्मिक कंटेंट तैयार करने पर लगातार कार्य किया. रांची में जन्मे शौर्य की प्रारंभिक शिक्षा डीएवी पब्लिक स्कूल, हेहल, रांची से हुई. इसके बाद उन्होंने सेंट जेवियर्स कॉलेज, रांची से मास कम्यूनिकेशन एण्ड वीडियो प्रोडक्शन में बी.ए. ऑनर्स की डिग्री प्राप्त की. यह शैक्षणिक पृष्ठभूमि उन्हें हिंदी पत्रकारिता की वह विशेषज्ञता प्रदान करती है, जो पत्रकारिता के मूल सिद्धांत 5Ws और 1H — क्या, कौन, कहां, कब, क्यों और कैसे — के आधार पर प्रभावी और तथ्यपूर्ण समाचार लेखन के लिए आवश्यक मानी जाती है.

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