Diwali 2023: तो इसलिए इस देश में दिवाली के दौरान होती है कुक्कुर और कौए की पूजा…

Published by : Shradha Chhetry Updated At : 03 Nov 2023 4:22 PM

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कुक्कुर, जिन्हें हमारे 'सबसे अच्छे दोस्त' के रूप में भी जाना जाता है, उनको समर्पित यह त्योहार बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है. विशेष रूप से, इंसानों के वफादार दोस्त माने जाने वाले कुत्तों को मृत्यु के देवता यम का प्रतीक माना जाता है.

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कुक्कुर, जिन्हें हमारे ‘सबसे अच्छे दोस्त’ के रूप में भी जाना जाता है, उनको समर्पित यह त्योहार बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है. विशेष रूप से, इंसानों के वफादार दोस्त माने जाने वाले कुत्तों को मृत्यु के देवता यम का प्रतीक माना जाता है. इस दिन, नेपाल के लोग सम्मान के प्रतीक के रूप में कुत्तों के सिर पर लाल टीका लगाकर उन्हें फूल और माला पहनाकर उनकी पूजा करते हैं. पूजा के बाद, उन्हें उनके पसंदीदा खाने की चीजें दी जाती है.

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कुकुर तिहार के बारे में

देश में हिंदू समुदाय के लिए सबसे महत्वपूर्ण त्योहारों में से एक माना जाने वाला कुकुर तिहार आमतौर पर नरक चतुर्दशी या भूत चतुर्दशी के दिन मनाया जाता है क्योंकि भक्तों का मानना ​​है कि कुत्ते आने वाले खतरे को भांप सकते हैं और इस तरह बुरी ताकतों को दूर रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे. लोगों के घरों से.

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पांच दिनों तक होती है जानवरों की पूजा

दरअसल, पड़ोसी देश नेपाल में भी दीपावली का त्योहार भारत ही की तरह बड़े धूमधाम से मनाया जाता है. यहां दीपावली के त्योहार को दिवाली तिहार कहा जाता है, जो पूरे पांच दिनों तक मनाया जाता है. यहां की मान्यताओं और परंपराओं के मुताबिक, दिवाली के पांचों दिन विभिन्न प्रजाति के पांच जानवरों की पूजा की जाती है.

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पहले दिन काग तिहार मनाया जाता है

तिहार के पहले दिन काग तिहार यानी कौओं की पूजा की जाती है. काग तिहार में लोग अपने-अपने घरों की खिड़कियों और दरवाजों पर मिठाइयां और पकवान रख देते हैं, ताकि कौवे उसे चुग लें और प्रसन्न होकर आशीर्वाद दें. दूसरे दिन चर्तुदशी को ‘कुकुर तिहार’ पर्व मनाया जाता है. वहीं अमावस्या के दिन लोग ‘गाय तिहार’ पर देवी लक्ष्मी के रूप में गाय की पूजा करते. इस दिन गाय के माथे पर तिलक लगा व फूल माला पहनाकर पूजा की जाती है.

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कुकुर तिहार

कुकुर तिहार के दिन नेपाल में घरों के पालतू और आसपास के कुत्तों की पूजा की जाती है. उन्हें खूब सजाया जाता है और सम्मान के साथ आव-भगत किया जाता है. राजा-महाराजाओं की तरह इन कुत्तों का सम्मान किया जाता है और फिर मनपसंद भोज्य पदार्थ खिलाया जाता है. यहां कुत्तों को यमराज का दूत माना जाता है.

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कुकुरों की पूजा

ऐसी मान्यता है कि यमराज के दो कुत्ते श्याम और सदल थे, जो उनके महल के द्वारपाल हैं. यहां ऐसा भी माना जाता है कि कुत्ते मृत्यु के बाद सीधे स्वर्ग प्रयाण करते हैं. इसलिए दिवाली के दूसरे दिन कुकुरों की पूजा की जाती है.

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