Disadvantages Of Ghee: हर डिश में डालते हैं घी? न्यूट्रिशनिस्ट से जानें ऐसा करना सही है या गलत

Disadvantages Of Ghee:अपनी रसोई की हर डिश आप घी में ही बनाना पसंद करते हैं तो जाने लें कि घी हार्ट हेल्थ के लिए अच्छा नहीं होता है. ऐसे में घी को ऐसे उत्पादों से बदलना चाहिए जो मोनोअनसैचुरेटेड और पॉलीअनसेचुरेटेड फैटी एसिड से भरे हुए हों.
Disadvantages Of Ghee: घी के बिना भारतीय रसोई की कल्पना करना असंभव-सा है. यहां घर-घर में दाल जैसी साधारण डिश भी घी (Ghee) के तड़के से बनाई जाती है. जब तक हम अपनी चपाती को घी से चिकना नहीं करते, तब तक हम इसे बेस्वाद पाते हैं और बिना घी लगाए खाना पसंद नहीं करते. पिछले कुछ वर्षों में, देसी घी ने पुराने समय से ही हेल्दी प्रोडक्ट होने के नाते अपनी प्रतिष्ठा अर्जित की है. और विभिन्न फिटनेस एक्सपर्ट इसे पोषक तत्वों से भरपूर होने का दावा कर सकते हैं, लेकिनन्यूट्रिशनिस्ट अवंती देशपांडे इससे पूरी तरह सहमत नहीं हैं.
न्यूट्रिशनिस्ट अवंती देशपांडे ने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो शेयर किया है जिसमें उन्होंने बताया कि क्यों हर डिश में घी नहीं डालना चाहिए. वीडियो के साथ एक लंबे नोट में, अवंती ने बातया है कि घी एक सैचुरेटेड फैट ( saturated fat) है जो हमारे शरीर में एलडीएल कोलेस्ट्रॉल को बढ़ाता है, जो अधिक मात्रा में सेवन करने पर हृदय के लिए अच्छा नहीं होता है. अवंती अपने पोस्ट के कैप्शन की शुरुआत यह पूछकर करती हैं, “क्या आप हर डिश में घी को एक जरूरी फैट के रूप में शामिल करते हैं?” अवंती ने लिखा, “घी एक सैचुरेटेड फैट होने के कारण एलडीएल कोलेस्ट्रॉल (LDL cholesterol) को बढ़ाता है जो कि अधिक मात्रा में सेवन करने पर हार्ट हेल्थ के लिए अच्छा नहीं होता है.” यह समझाते हुए कि घी को ऐसे उत्पादों से बदलना चाहिए जो मोनोअनसैचुरेटेड (monounsaturated) और पॉलीअनसेचुरेटेड फैटी एसिड (polyunsaturated fatty acids) से भरे हुए हों, उन्होंने समझाया कि इन वैकल्पिक वस्तुओं का सेवन क्यों करना चाहिए.
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उसने लिखा, “सैचुरेटेड फैट के साथ, मोनोअनसैचुरेटेड (एमयूएफए) और पॉलीअनसेचुरेटेड फैटी एसिड (पीयूएफए) को कम मात्रा में सेवन किया जाना चाहिए क्योंकि उन्हें हार्ट के लिए अच्छा माना जाता है और ये कई हेल्थ बेनिफिट्स भी प्रदान करते हैं.” उन्होंने कुछ हेल्दी विकल्पों का भी उल्लेख किया जिनका उपयोग खाना बनाते समय घी के बदले इस्तेमाल करने के लिए किया जा सकता है.
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न्यूट्रिशनिस्ट अवंती देशपांडे कहती हैं, “तिल, सरसों और जैतून के तेल को शामिल करें जो MUFA से भरपूर होते हैं जबकि सूरजमुखी, सोयाबीन और सूरजमुखी के तेल में बड़ी मात्रा में PUFA होता है.” अंत में उन्होंने यह कहकर निष्कर्ष निकाला कि आपके शरीर में फैट के सही लेवल को बनाए रखने के लिए घी में भोजन को पकाने के बजाय इसे दाल, चावल और चपाती में मिला सकते हैं.
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