झारखंड : मनी लॉन्ड्रिंग मामले में पूर्व मंत्री एनोस एक्का को सात साल की जेल और दो करोड़ जुर्माना

jharkhand Former minister Enos Ekka jailed for seven years : मनी लॉन्ड्रिंग मामले में आज ईडी के विशेष जज ने प्रदेश के पूर्व मंत्री एनोस एक्का को सात साल की सजा और दो करोड़ रुपये जुर्माने की सजा सुनायी है. जुर्माना नहीं भरने की स्थिति में उन्हें और एक साल की सजा काटनी होगी.
रांची : मनी लॉन्ड्रिंग मामले में आज ईडी की विशेष अदालत ने प्रदेश के पूर्व मंत्री एनोस एक्का को सात साल की सजा और दो करोड़ रुपये जुर्माने की सजा सुनायी है. जुर्माना नहीं भरने की स्थिति में उन्हें और एक साल की सजा काटनी होगी.
गौरतलब है कि पूर्व मंत्री एनोस एक्का पर 20 करोड़ 31 लाख 77 हजार रुपये के मनी लांड्रिंग का आरोप है. कोर्ट ने उन्हें मार्च महीने में दोषी करार दिया था. लॉकडाउन के कारण सजा में देरी हो रही थी, इसलिए जज ने आज उन्हें वीडियो कॉंन्फ्रेंसिंग के जरिये सजा सुनायी.
ज्ञात हो कि एनोस एक्का पर वर्ष 2009 में मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज हुआ था. एनोस एक्का को पारा शिक्षक मनोज कुमार की हत्या के मामले में सिमडेगा की निचली अदालत ने तीन जुलाई, 2018 को उम्रकैद की सजा सुनायी थी. एनोस एक्का पर वर्ष 2014 में सिमडेगा के पारा शिक्षक मनोज कुमार को उनके स्कूल से अगवा कर हत्या करने का आरोप है. इस मामले में पुलिस ने 26 नवंबर, 2014 की रात करीब डेढ़ बजे एनोस एक्का को उनके ठाकुरटोली आवास से गिरफ्तार किया था.
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By रजनीश आनंद
रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं और पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखती हैं.फिलहाल वे प्रभात खबर के ओरिजिनल, नेशनल, इंटरनेशनल और खेल कैटेगरी के लिए राइटिंग का काम करती हैं. उनकी पहचान फैक्ट बेस्ट रिपोर्टिंग, रिसर्च बेस्ड स्टोरी और एक्सप्लेनर लेखन के लिए है.
राजनीति, सामाजिक सरोकार, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों पर उनकी विशेष रुचि रही है. वैसे मुद्दे जो समाज के हाशिये पर मौजूद समुदायों और आम लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की बहस में अपेक्षाकृत कम जगह पाते हैं, ऐसे विषयों पर भी लेखन में रुचि रखती हैं.
रजनीश आनंद कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर अध्ययन एवं रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर काम किया. इसके अलावा सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की है.
आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है.हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों से जुड़ी चुनौतियों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं.
रजनीश आनंद झारखंड की राजधानी रांची में रहती हैं और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक हैं. उन्होंने वर्ष 2000 में पत्रकारिता की शुरुआत झारखंड जागरण दैनिक से की. इसके बाद प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस और दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और स्वतंत्र लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य प्रकाशनों में काम करने के साथ-साथ वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं.
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