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Sunday, March 3, 2024

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प्रेग्नेंसी में इस विटामिन की कमी से हो सकती है परेशानी, मां और बच्चे दोनों के लिए खतरनाक

प्रेग्नेंसी के दौरान महिलाओं में विटामिन डी की कमी हो जाती है तो इससे जच्चा और बच्चा दोनों को बहुत नुकसान पहुंचा सकता है. हम सब जानते हैं कि विटामिन डी हमारे लिए बहुत जरूरी है.

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प्रेग्नेंसी में इस विटामिन की कमी से हो सकती है परेशानी, मां और बच्चे दोनों के लिए खतरनाक 2

प्रेग्नेंसी के दौरान महिलाओं को कई तरह से अपनी सेहत का ख्याल रखना पड़ता है. ऐसे समय में महिलाओं के लिए विटामिन डी की कमी को नजरअंदाज करना महंगा पड़ सकता है. डिलीवरी के समय मां और शिशु का हेल्दी होना जरूरी है. विटामिन डी हड्डियों के लिए जरूरी कैल्शियम और फॉस्फोरस को एब्जॉर्ब करता है. पेट में पल रहे बच्चों के लिए विटामिन डी इस लिहाज अधिक जरूरी है. विटामिन डी शरीर में इंफ्लामेशन को कम करता है. इंफ्लामेशन के कारण कई तरह की क्रोनिक बीमारियां होती हैं. अगर प्रेग्नेंट महिलाओं को इंफ्लामेशन होगा तो उन्हें कई बीमारियों होने लगेगी जो बच्चे को भी नुकसान पहुंचा सकता है. इससे बच्चों की हड्डियां कमजोर हो सकती है और गर्भ में ही बच्चे का बीपी बढ़ सकता है.

प्रेग्नेंसी में विटामिन डी जरूरी

प्रेग्नेंट महिलाओं को ज्यादा कैल्शियम की जरूरत होती है क्योंकि उसके पेट में पल रहे बच्चों में हड्डियों का विकास होना जरूरी है. विटामिन डी मां और बच्चे दोनों के लिए बेहद जरूरी है. प्रेग्नेंसी के छढे महीने बाद विटामिन डी की प्रेग्नेंट महिलाओं में बहुत अधिक जरूरत पड़ती है. इस समय बच्चों की हड्डियों के विकास और अन्य तरह के शारीरिक और मानसिक विकास के लिए विटामिन डी और कैल्शियम का काम बढ़ जाता है. डिलीवरी के बाद भी मां को कैल्शियम की जरूरत ज्यादा होती है क्योंकि इस समय मां ब्रेस्टफीडिंग कराती है. ऐसे में अगर महिलाओं में विटामिन डी की कमी हो तो बच्चे को दूध कम मिल पाता है.

कमी से नुकसान

रिसर्च के मुताबिक अगर प्रेग्नेंसी में विटामिन डी की कमी हो जाए तो महिला में कई तरह की समस्या हो सकती है. इसमें सबसे कॉमन बीमारी प्रीक्लेंप्सिया (preeclampsia) है. प्रीक्लेंप्सिया प्रेग्नेंट महिलाओं में 5 महीनों के गर्भ धारण करने के बाद होता है. इस दौरान प्रेग्नेंट महिला का ब्लड प्रेशर बढ़ जाता है. इस कारण महिलाओं का वजन भी बढ़ने लगता है. इस समय विटामिन डी की कमी से मांसपेशियां कमजोर होने लगती है. इससे पेट में बच्चों पर बुरा असर होता है. यहां तक कि पेट में पल रहे बच्चे का भी बीपी बढ़ सकता है और हार्ट फेल्योर का खतरा भी हो सकता है. .

विटामिन डी के लिए धूप में बैठना जरूरी

विंटर सीजन में धूप की तलाश किसको नहीं होती है. पर व्यस्त जीवनशैली में कई लोगों को समय नहीं मिलता कि धूप का सेवन करें. पर विटामिन डी के लिए धूप में बैठना जरूरी है. भले 20 मिनट ही समय निकालें, पर धूप में जरूर बैठें. इससे शरीर में विटामिन डी का संश्लेषण होता रहेगा. इससे विटामिन डी की कमी नहीं होगी. विटामिन डी की मौजूदगी में ही ह्यूमन बॉडी कैल्शियम और फॉस्फेट को अवशोषित करता है। वहीं यह लंग्स के लिए भी जरूरी होता है.

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  • विटामिन डी की कमी को पूरा करने के लिए गाय के दूध भी एक उत्तम आहार है. साथ ही इससे प्रोटीन, कैल्शियम, फास्फोरस भी मिल जाते हैं.

  • संतरे के जूस विटामिन सी और विटामिन डी प्रचुर मात्रा में होते हैं. इससे मिनरल्स की जरूरत भी पूरी होती है.

  • विटामिन डी शरीर में पर्याप्त रूप से बनता रहे इसके लिए धूप लें. सुबह की एक्सरसाइज धूप में कर सकते हैं.

  • लिवर ऑयल, मछली, डेयरी प्रोडक्ट्स, अंडे की जर्दी, पनीर में भी विटामिन डी मौजूद होता है. इसकी कमी होने पर डॉक्टर सप्लिमेंट्स लेने की सलाह देते हैं.

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