कोविशील्ड से रक्तस्राव और थक्के जमने की घटना भारत मे यूके से काफी कम : AEFI, टीका लेने के बाद इन संकेतों को पहचानना जरूरी
Author : Prabhat Khabar Digital Desk Published by : Prabhat Khabar Updated At : 17 May 2021 6:09 PM
AEFI, Corona vaccine, Covishield : नयी दिल्ली : राष्ट्रीय एडवर्स इवेंट फॉलोइंग इम्यूनाइजेशन (एईएफआई) समिति की ओर से परिवार कल्याण मंत्रालय को सौंपी रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में कोरोना वैक्सीनेशन के बाद रक्तस्राव और थक्के जमने के मामले बहुत कम हैं. साथ ही कहा गया है कि यह देश में ऐसी स्थितियों के सामने आने की अपेक्षित संख्या के अनुरूप हैं.
नयी दिल्ली : राष्ट्रीय एडवर्स इवेंट फॉलोइंग इम्यूनाइजेशन (एईएफआई) समिति की ओर से परिवार कल्याण मंत्रालय को सौंपी रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में कोरोना वैक्सीनेशन के बाद रक्तस्राव और थक्के जमने के मामले बहुत कम हैं. साथ ही कहा गया है कि यह देश में ऐसी स्थितियों के सामने आने की अपेक्षित संख्या के अनुरूप हैं.
मालूम हो कि इसी साल मार्च में कुछ देशों ने खासतौर से एस्ट्राजेनेका-ऑक्सफोर्ड की वैक्सीन कोविशील्ड लेने के बाद ‘रक्तस्राव और थक्के जमने की घटनाओं’ को लेकर अलर्ट जारी किये थे. वैश्विक चिंताओं को देखते हुए भारत में प्रतिकूल घटनाओं का तत्काल गहन विश्लेषण कराने का फैसला किया गया था.
राष्ट्रीय एईएफआई समिति ने रिपोर्ट में कहा है कि इस साल तीन अप्रैल तक वैक्सीन की 7,54,35,381 खुराक लगायी गयीं. इनमें कोविशील्ड की 6,86,50,819 और कोवैक्सीन की 67,84,562 खुराकें शामिल हैं. इनमें पहली खुराक के रूप में 6,59,44,106 और दूसरी खुराक के रूप में 94,91,275 वैक्सीन दी गयीं.
कोरोना वैक्सीनेशन अभियान शुरू होने के बाद से देश के 753 जिलों में से 684 जिलों में को-विन प्लेटफॉर्म के माध्यम से 23,000 से ज्यादा प्रतिकूल घटनाएं दर्ज की गयी थीं. इनमें से सिर्फ 700 मामले ही गंभीर और जटिल प्रकृति के रूप में दर्ज किये गये थे. यह आंकड़ा प्रति दस लाख खुराक में 9.3 है.
एईएफआई समिति ने गंभीर और जटिल घटनाओं वाले 498 मामलों की गहन समीक्षा पूरी की है. इनमें से कोविशील्ड वैक्सीन लेने के बाद प्रति दस लाख खुराक में 0.61 मामले की रिपोर्टिंग रेट के साथ 26 मामलों को संभावित रक्त वाहिका में थक्के जमने के रूप में दर्ज किये गये हैं, जो ढीला हो सकनेवाले हैं.
भारत बायोटेक कोवैक्सीन लेने के बाद संभावित रक्त वाहिका में थक्के जमने का एक भी मामला नहीं दर्ज किया गया है. रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में बेहद कम रक्त वाहिका में थक्के जमने की घटनाओं का जोखिम है. भारत में ऐसी शिकायतें दर्ज करने की दर प्रति दस लाख खुराक 0.61 है, जो ब्रिटेन के चिकित्सा और स्वास्थ्य नियामक प्राधिकरण के दर्ज किये गये प्रति दस लाख चार मामलों से बहुत कम है. जर्मनी ने प्रति 10 लाख खुराक पर ऐसी 10 घटनाएं दर्ज की हैं.
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सांस फूलना
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सीने में दर्द
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अंगों में दर्द/अंगों को दबाने पर दर्द या अंगों (बांह या पिण्डलियों) में सूजन
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इंजेक्शन वाली जगह से बाहर के क्षेत्र में कई, सुई की नोक के आकार के लाल धब्बे या त्वचा में नीले-काले धब्बे बनना
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पलटी के साथ या बगैर पलटी के लगातार पेट दर्द
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पलटी के साथ या बगैर पलटी के पहले से कोई परेशानी न होने बावजूद दौरे पड़ना
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पलटी के साथ या बगैर पलटी के तेज और लगातार सिरदर्द (माइग्रेन या पुराने सिरदर्द की पहले कोई समस्या न होने के बावजूद)
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अंगों या शरीर का कोई विशेष हिस्सा या (चेहरे सहित) शरीर के किसी अंग में कमजोरी/लकवा
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बिना किसी स्पष्ट कारण के लगातार पलटी होना
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धुंधली दिखना या आंखों में दर्द या दो-दो चित्र बनना
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मानसिक स्थिति में बदलाव या भ्रम या चेतना का अवसाद के स्तर पर होना
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कोई अन्य लक्षण या स्वास्थ्य की स्थिति जो टीके लगाने वाले व्यक्ति या परिवार के लिए चिंता का विषय हो
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