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Ground Report : आदिवासी गांव खूंटीटोली के ग्रामीण आज भी खुले में करते हैं शौच, दूषित पानी पीने को हैं मजबूर, नहीं ले रहा कोई सुध

Updated at : 09 Dec 2020 1:15 PM (IST)
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Ground Report : आदिवासी गांव खूंटीटोली के ग्रामीण आज भी खुले में करते हैं शौच, दूषित पानी पीने को हैं मजबूर, नहीं ले रहा कोई सुध

Ground Report : पालकोट (महीपाल सिंह) : गुमला जिले के पालकोट प्रखंड की नाथपुर पंचायत में खूंटीटोली गांव है. इस गांव में सरकारी सुविधा का अभाव है. प्रखंड मुख्यालय से महज ढ़ाई किलोमीटर दूर खूंटीटोली गांव में न तो आने जाने के लिए सड़क है, न ही पेयजल की सुविधा. गांव के किसी भी व्यक्ति को प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास नहीं मिला है. गांव के लोग पीने का पानी लाने के लिए आधा किलोमीटर दूर कुआं पर जाते हैं. किसी के घर में शौचालय नहीं बना है. कुछ लोगों के घर में शौचालय बनना शुरू हुआ था, लेकिन अधूरा है. लोग खुले में शौच करते हैं.

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Ground Report : पालकोट (महीपाल सिंह) : गुमला जिले के पालकोट प्रखंड की नाथपुर पंचायत में खूंटीटोली गांव है. इस गांव में सरकारी सुविधा का अभाव है. प्रखंड मुख्यालय से महज ढ़ाई किलोमीटर दूर खूंटीटोली गांव में न तो आने जाने के लिए सड़क है, न ही पेयजल की सुविधा. गांव के किसी भी व्यक्ति को प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास नहीं मिला है. गांव के लोग पीने का पानी लाने के लिए आधा किलोमीटर दूर कुआं पर जाते हैं. किसी के घर में शौचालय नहीं बना है. कुछ लोगों के घर में शौचालय बनना शुरू हुआ था, लेकिन अधूरा है. लोग खुले में शौच करते हैं.

गांव के वृद्ध लेटे भगत ने बताया कि उनका गांव सरकारी सुविधा से वंचित है. वे 65 साल के हो गये हैं. वृद्धा पेंशन कार्ड नहीं बना. सबसे बड़ी समस्या पेयजल की है. आंगनबाड़ी केंद्र के पास एक नलकूप है. लाइन लगाकर पानी भरना पड़ता है, नहीं तो गांव से दूर कुआं से पानी लाते हैं जो गंदा है. गांव में शादी विवाह के समय पीने का पानी लाने के लिए गांव से आधा किमी दूर जाना पड़ता है.

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युवक बिरिया उरांव ने बताया कि वे गांव के विकास के लिए मुखिया, पंचायत सेवक से मिलकर गांव की समस्या के बारे में बताता रहता हूं. गांव के वृद्ध लोगों की पेंशन, मूलभूत सुविधाएं देने के लिए प्रखंड प्रशासन के अधिकारियों से मिलकर बातें रखा हूं, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई. गांव के मंगना उरांव ने बताया कि उनके गांव में जो भी विकास का कार्य आता है. उसे दूसरे गांव में भेज दिया जाता है. गांव में आज तक टोली घुसने के लिए पीसीसी पथ नहीं बना है. गांव के सुकरु उरांव ने बताया कि उनके गांव में मुखिया, जिला परिषद, पंचायत समिति सदस्य, वार्ड कभी नहीं आये. केवल वोट के समय वोट मांगने आते हैं. जलमीनार बनाने का वादा अभी तक पूरा नहीं हुआ.

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कोरोना महामारी के कारण लागू लॉकडाउन में प्रवासी मजदूरों को गांव में घुसने नहीं दिया गया था. उस समय प्रभात खबर में समाचार छापने के बाद राज्य के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के द्वारा अपने प्रतिनिधि के रूप में मांडर विधायक बंधु तिर्की को गांव भेजा गया था. इस दौरान उन्हें गांव वालों की समस्या से अवगत कराया गया था. उस समय पालकोट प्रखंड के तत्कालीन बीडीओ शंकर एक्का को विधायक ने निर्देश दिया था कि गांव में एक जलमीनार, गांव के लोगों के लिए पीएम आवास, राशनकार्ड की व्यवस्था की जाए, लेकिन अब तक इस दिशा में कोई कदम नहीं बढ़ाया गया. गांव के लोग रोजगार के लिए पलायन कर रहे हैं. लोग ईंट भट्ठा में जीविकोपार्जन कर रहे हैं. रोजगार के लिए गोवा, मुंबई के साथ अन्य राज्यों में जा रहे हैं. गांव में 70 परिवार हैं. सभी आदिवासी परिवार हैं. आबादी 300 के आसपास है. गांववालों को उम्मीद है कि उनके गांव में सरकार से मिलने वाली सुविधाएं मिलेंगी और गांव का विकास होगा.

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Posted By : Guru Swarup Mishra

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