पूर्व सैनिक और वीर नारियों के लिए गुमला में पूर्वी भारत का पहला ओल्ड एज होम का उदघाटन, राज्यपाल बोली- जब हम सोते हैं, तब सैनिक जागते हैं
Author : Prabhat Khabar Digital Desk Published by : Prabhat Khabar Updated At : 31 Mar 2021 6:27 PM
Jharkhand News (गुमला) : झारखंड की राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू ने कहा कि मैं परमवीर अलबर्ट एक्का को नमन करती हूं. जिनकी वीरता एवं पराक्रम से पूरा विश्व कायल है. यह बंधन की भूमि है. अभिनंदन की भूमि है. झारखंड राज्य के लिए सौभाग्य है कि गुमला की मिट्टी में कई वीर पैदा हुए हैं. वतन की रक्षा से कोई बड़ा धर्म एवं कर्तव्य नहीं है.
Jharkhand News (गुमला), रिपोर्ट- दुर्जय पासवान : झारखंड के गुमला जिला अंतर्गत रायडीह प्रखंड स्थित मांझाटोली के पर्यटन भवन में बुधवार को भूतपूर्व सैनिक एवं वीर नारियों के लिए वानप्रास्थ सैन्य आश्रम का उदघाटन किया गया. मुख्य अतिथि झारखंड की राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू ने शिलापट्ट का अनावरण, फीता काटकर कर और दीप जलाकर किया. उन्होंने मंचीय कार्यक्रम के दौरान कहा कि गुमला जिला वीर सैनिकों की भूमि है. जहां भूतपूर्व सैनिक और वीर नारियों के लिए वानप्रस्थ सैन्य आश्रम की स्थापना की गयी है.
झारखंड की राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू ने कहा कि मैं परमवीर अलबर्ट एक्का को नमन करती हूं. जिनकी वीरता एवं पराक्रम से पूरा विश्व कायल है. यह बंधन की भूमि है. अभिनंदन की भूमि है. झारखंड राज्य के लिए सौभाग्य है कि गुमला की मिट्टी में कई वीर पैदा हुए हैं. वतन की रक्षा से कोई बड़ा धर्म एवं कर्तव्य नहीं है.
उन्होंने कहा कि हम सभी की पहचान वतन से है. हमारे वीर सैनिक देश के लिए जीते हैं. हमारे वीर सैनिकों ने देश की रक्षा के लिए प्राणों की आहूति दिये हैं. ये देश की एकता, अखंडता एवं संप्रभुता की रक्षा के लिए सतत प्रयासरत रहते हैं. हम जब सोते हैं तब सैनिक जागते हैं. सैनिक देश की रक्षा में लगे रहते हैं. वीर सैनिकों को अच्छी जिंदगी मिले. इसके लिए काम होना चाहिए. सैन्य आश्रम की बात जब आयी तो मैंने सरकार को स्थापना करने के लिए सुझाव दिया था.
राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू ने कहा कि गुमला आदिवासी बहुल जिला है. यहां के 90 प्रतिशत सैनिक अनुसूचित जनजाति से हैं. लेकिन, विडंबना है कि जब हमारे सैनिक देश सेवा कर घर लौटते हैं, तो उन्हें बड़ी चुनौती का सामना करना पड़ता है. वह चुनौती है उनके अच्छे जीवनयापन का. समाज में अच्छी तरह जीने का. इसके लिए सामाजिक स्नेह की जरूरत है. मुझे पीड़ा होती है कि जब सैनिक घर आते हैं, तो उनके परिवार की नजर उनके पैसों पर रहती है. क्या कोई मानवीय मूल्य नहीं है.
वहीं, सेवानिवृत सैनिकों से गलत व्यवहार करना गलत है. बदलते परिवेश में पूर्व सैनिक उपेक्षित महसूस करते हैं. मेरी सोच है कि किसी को वृद्धा आश्रम जाना न पड़े. वे अपने घर- परिवार के साथ रहेंगे. मांझाटोली के आश्रम में 20 बेड है. यहां पौष्टिक आहार, मनोरंजन सहित कई प्रकार की सुविधा मिलेगी. मेरी सोच है. सेवानिवृत्ति के बाद वृद्ध लोगों को मनोरंजन की जरूरत है. उन्हें मनोरंजन मिलना चाहिए.
इस दौरान राज्यपाल ने आश्रम के लिए 3 टीवी देने की घोषणा की है. इसका उद्देश्य टीवी देखकर देश- विदेश की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं. यह पूर्वी भारत का पहला ओल्ड एज होम है. इसका संचालन प्रबंधन समिति के माघ्यम से होगा. सरकार से अपील है कि सैनिकों के लिए काम करते हुए उन्हें लाभ दें.
उन्होंने आश्रम को शुरू कराने में सहयोग करने वालों को धन्यवाद दिया. उन्होंने कहा कि मेरी दिल से इच्छा है कि पूर्व सैनिक अच्छी जिंदगी जीये. परिवार के साथ रहे. परिवार का प्यार पूर्व सैनिक एवं वीर नारियों को मिले. झारखंड की कंपनियां CSR के तहत पूर्व सैनिकों के लिए काम करे. कुछ कंपनी काम की है. दूसरी कंपनियां भी मदद करे.
लोहरदगा संसदीय क्षेत्र के सांसद सुदर्शन भगत ने कहा कि यह ऐतिहासिक क्षण है. मांझाटोली में पूर्व सैनिकों के लिए ओल्ड एज होम का उद्घाटन हो रहा है. यह पूर्वी भारत का पहला आश्रम है. गुमला, सिमडेगा, लोहरदगा, खूंटी, रांची एवं लातेहार जिला के पूर्व सैनिक एवं वीर नारियों को इस आश्रम से लाभ मिलेगा. गुमला में इस प्रकार के भवन की जरूरत थी. मांझाटोली में आश्रम शुरू होना बहुत ही अच्छी पहल है. गुमला वीर सैनिकों की भूमि है. यहां के हजारों सैनिक देश सेवा में हैं. गुमला जिले के कई वीर सैनिक देश के लिए शहीद हुए हैं. रिटायर सैनिकों को पूरा मान- सम्मान मिले.
वहीं, भूतपूर्व सैनिक कल्याण संगठन के ब्रिगेडियर बीजी पाठक ने कहा कि गुमला जिला में आश्रम खुलना बहुत ही सुंदर पहल है. धन्यवाद ज्ञापन देते हुए वेटरन अनिरुद्ध सिंह ने कहा कि काफी प्रयास के बाद मांझाटोली में आश्रम की शुरुआत की गयी है. मंच का संचालन श्वेता सिंह ने किया.
Posted By : Samir Ranjan.
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