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Thar के डायरेक्टर राज सिंह चौधरी का खुलासा, कहा- अनिल कपूर ने फिल्म करने से पहले रखी थी ये शर्त

अनिल कपूर और उनके बेटे हर्षवर्धन कपूर की फिल्म थार की हर तरफ चर्चा हो रही है. फिल्म को लेकर अब राज सिंह चौधरी ने कई बाते की है. उन्होंने कहा कि अनिल कपूर ने फिल्म के हां कहते पर एख शर्त रखी थी.

By उर्मिला कोरी
Updated Date
राज सिंह चौधरी
राज सिंह चौधरी
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नेटफ्लिक्स पर हालिया रिलीज हुई अनिल कपूर और उनके बेटे हर्षवर्धन कपूर की फिल्म थार उम्दा अभिनय, अलहदा नरेटिव और सिनेमेटोग्राफी के लिए सराही जा रही है. इस फिल्म के लेखक और निर्देशक राज सिंह चौधरी से उनकी इस फिल्म और कैरियर पर उर्मिला कोरी की हुई बातचीत

थार के कहानी नरेटिव की बहुत तारीफ हो रही है खासकर कहानी के इर्द गिर्द जो दुनिया आपने गढ़ी है

फिल्म दो तरह से बनती है क्या कहना चाहते हो और किस तरह से कहना चाहते हो. मैं कहानी के कहने का तरीका यूनिक बनाना चाहता था. मुझे लगा कि थार का जो सिनेमैटिक वॉइस बनाया है राजस्थान का. यह अलग राजस्थान है. यह राजमहलों वाला राजस्थान यह वेस्टर्न जॉनर वाली जो फिल्म आती थी. लैंडस्केप हो या धूप से झुलसे चेहरे, गंदे दांत, दाढ़ी, भूरी आंखें. वो उससे बहुत मैच करता है. मुझे लगा कि ये जॉनर ऑर्गेनिककली बहुत फिट रहेगा. इंडिया में हमने बहुत मुश्किल से ये जॉनर देखा है. यह ऐसा जॉनर है, जो बहुत कमर्शियल,एंटरटेनिंग और स्टाइलिश है. मैंने उस जॉनर को लेकर राजस्थान में ऑर्गेनिकली फिट कर अपनी दुनिया बनायी है

थार फिल्म का शीर्षक हो क्या यह पहले से तय था

यह कहानी बहुत ही हार्ड हिटिंग,टफ और रफ कहानी है जैसा कि थार जो मरूस्थल है.वो होता है तो थार से बेहतर कोई और नाम नहीं हो सकता था. कहानी इस नाम से बहुत ज़्यादा जुड़ाव महसूस करती है.

शादिस्तान के बाद थार भी राजस्थान की कहानी है क्या राजस्थान आपको आकर्षित करता है

आकर्षित तो करता ही है लेकिन वहां की कल्चर, भाषा को मैंने बहुत बारीकी और करीब के साथ देखा है. मुझे लगा कि जो मेरी पहली दो चार फिल्में हैं. वही की बनाऊं तो मैं शायद उसके साथ ज़्यादा न्याय कर पाऊं. मेरी आनेवाली दो और फिल्में भी राजस्थान पर ही बेस्ड थी. मैंने फिल्म गुलाल की कहानी लिखी थी. वो भी राजस्थान पर ही बेस्ड थी. आकर्षित तो करता ही है लेकिन वहां की कल्चर, भाषा को मैंने बहुत बारीकी और करीब के साथ देखा है. मुझे लगा कि जो मेरी पहली दो चार फिल्में हैं. वही की बनाऊं तो मैं शायद उसके साथ ज़्यादा न्याय कर पाऊं. मेरी आनेवाली दो और फिल्में भी राजस्थान पर ही बेस्ड थी. मैंने फिल्म गुलाल की कहानी लिखी थी. वो भी राजस्थान पर ही बेस्ड थी.

अनिल कपूर और बेटे हर्षवर्धन का फिल्म से किस तरह से जुड़ना हुआ

मेरी बात विक्रमादित्य मोटवाने से हुई थी वो हर्ष के साथ भावेश जोशी फिल्म बना रहे थे.विक्रम को लगा कि मेरी फिल्म के लिए हर्ष बेस्ट रहेंगे. हर्ष ने स्क्रिप्ट सुनी और उन्हें फिल्म पसंद आयी. पहले हर्ष फिल्म से जुड़े फिर सुरेखा के किरदार के लिए मुझे अनिल सर जंचे. मैं स्क्रिप्ट लेकर उनके पास गया. मैं नया डायरेक्टर हूं तो उनके अपने रिजर्वेशन भी थे कि फिल्म का स्केल बड़ा है. मैं कर पाऊंगा या नहीं. फिल्म से जुड़ने से पहले उनकी एक शर्त थी. उन्होंने हर्ष को कहा कि तुम और राज जाओ और तीन सीन की शूटिंग करो और मुझे दिखाओ. मैंने शूटिंग की एडिटिंग की. सबकुछ करके स्क्रीन पर दिखाया.उनको वो पसंद आया फिर वो राजी हुए

आपके दोनों एक्टर्स प्रोड्यूसर कैसे आपकी फिल्म के बनें

पहले हमारी फिल्म के दूसरे कोई प्रोड्यूसर थे, लेकिन जब अनिल सर फिल्म से जुड़े तो उनको लगा कि अगर वे निर्माता के तौर पर भी फिल्म से जुड़ते हैं तो फिल्म के साथ और अच्छे से न्याय कर पाएंगे. वो अपनी तरह से चीजों को बना पाएंगे. उन्होंने ही नेटफ्लिक्स से बात की और नेटफ्लिक्स को फिल्म पसंद आयी.मैं बताना चाहूंगा कि अनिल सर फिल्म के निर्माता थे लेकिन फिल्म मेकिंग के दौरान वो मुझ पर हावी नहीं हुए. सतीश कौशिक भी फिल्म का हिस्सा हैं .वो डायरेक्टर भी हैं लेकिन इस सेट पर वो एक्टर ही थे हां अनिल सर और उनका अनुभव सालों का हैं तो ये ज़रूर बोल देते थे कि एक और टेक ले लेते हैं. एक्टर के तौर पर हर्षवर्धन पर आपकी क्या राय है,उनकी असफलताओं पर अक्सर चर्चा होती रहती है

मैं खुद भी एक्टर हूं तो मैं हर्ष को समझता हूं. इस फिल्म की मेकिंग के दौरान हमारी दोस्ती हो गयी थी.

हर्षवर्धन बहुत क्लियर हैं कि वो क्या करना चाहता है. वो अलग तरह का काम करना चाहता है. हर्ष धीरे धीरे अपनी पहचान बना रहा है. हर्ष इस फिल्म में एक बॉय से मैन बन गया है. एक्टर के तौर पर वह बहुत सक्षम है.

शादिस्तान के बाद थार भी ओटीटी पर रिलीज हुई है निर्देशक के तौर ओटीटी रिलीज से कितने संतुष्ट हैं

फिल्म फिल्म होती है. मुझे लगता है कि आरआरआर और अवतार जैसी फिल्में थिएटर के लिए बनी होती हैं. जो ओटीटी पर रिलीज नहीं हो सकती हैं . ओटीटी वैसे बहुत बड़ा माध्यम है. 190 देशों में यह लोगों को जोड़ रहा है.मेरे फिल्म इंटरनेशनल दर्शकों को भी जोड़ेगी. ओटीटी इंटरनेशनल के साथ साथ देशी दर्शकों को भी जोड़ रहा है. जो थिएटर नहीं जाते हैं, लेकिन उनके मोबाइल या टीवी पर फिल्म आए तो वो देखेंगे. मेरी फिल्म शादिस्तान जब ओटीटी पर रिलीज हुई थी तो प्रोजेक्टर पर लगाकर उसे गांव वालों को भी दिखाया गया था. मेरी फिल्म का जो मूल संदेश था. वो उन्ही के लिए था.

आप लेखक निर्देशक के साथ साथ एक्टर भी हैं क्या एक्टिंग के लिए आप अभी भी तैयार हैं?

हां क्यों नहीं अगर विक्रमादित्य और अनुराग कश्यप कुछ आफर करते हैं तो ज़रूर लेकिन फिलहाल मैं अपनी आनेवाली तीन फिल्मों के लेखन और निर्देशन में मशरूफ रहने वाला हूं और अपने निर्देशन की फिल्मों में मैं एक्टिंग नहीं करूंगा. ये मैंने नियम बनाया है.इन तीन फिल्मों के बाद एक्टिंग का देखूंगा.

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