Daadi Ki Shaadi Review :फीकी है यह शादी.. कपिल शर्मा की कॉमेडी का भी नहीं जमा रंग

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दादी की शादी, फोटो- इंस्टाग्राम

कपिल शर्मा और नीतू कपूर की फिल्म दादी की शादी देखने की प्लानिंग है तो पढ़ लें यह रिव्यु

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फिल्म – दादी की शादी
निर्माता -कपिल शर्मा, गिन्नी और अन्य
निर्देशक – आशीष आर मोहन
कलाकार – कपिल शर्मा,नीतू कपूर, सादिया खतीब, दीपक दत्ता,रिद्धिमा कुमार शाहनी,आर शरत कुमार,जीतेन्द्र हुड्डा और अन्य
प्लेटफार्म -सिनेमाघर
रेटिंग – दो

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daadi ki shaadi review :साल 2003 में भावनात्मक फॅमिली ड्रामा बागबान आज भी दर्शकों के जेहन में है। उस जैसा ही कुछ मर्म खुद में समेटे हुए फिल्म दादी की शादी रिलीज हुई है.आधुनिक परिवारों के खून के रिश्तों के उलझनों की कहानी यह फॅमिली ड्रामा इमोशन के साथ साथ कॉमेडी के रंग भी लिए हुए हैं, लेकिन कमजोर कहानी और स्क्रीनप्ले ने कॉमेडी और इमोशन दोनों ही रंगों को फिल्म में फीका कर दिया है. जिस वजह से दादी की शादी भी फीकी रह गयी है .

ये है फिल्म की कहानी

फिल्म की कहानी दिल्ली में रहने वाले टोनी आहूजा (कपिल शर्मा )और उनके परिवार से शुरू होती है. टोनी की शादी नहीं हो रही है क्योंकि वह एक बड़े जॉइंट फॅमिली से है. जिस वजह से हर लड़की उसे रिजेक्ट कर रही है. इसी बीच टोनी के लिए कन्नू (सादिया खतीब )का रिश्ता आता है. टोनी अपने कॉलेज के दिनों में कन्नू से एक तरफ़ा प्यार करता है. उसे लगता है कि उसका प्यार उसे मिल जाएगा. दोनों की सगाई होने वाली होती है. उसी बीच मालूम पड़ता है कि कन्नू की शिमला में रहने वाली दादी विमला (नीतू कपूर )दूसरी शादी करने वाली है , जिससे टोनी का परिवार कन्नू से शादी से इंकार कर देता है. .जिसके बाद कन्नू के पिता और चाचा पूरे परिवार के साथ अपनी माँ की शादी को रुकवाने के लिए दिल्ली से शिमला पहुँच जाते हैं.टोनी भी उनके साथ इस शादी को रुकवाने पहुंच जाता है ताकि कन्नू के साथ उसकी शादी हो जाए. क्या दादी की शादी हो पाएगी. कन्नू और टोनी की शादी का क्या होगा। यही आगे की कहानी है.

फिल्म की खूबियां और खामियां

दादी की शादी का यह शीर्षक सुनने में दिलचस्प लग रहा है लेकिन कहानी और स्क्रीनप्ले कमजोर रह गया है.जिससे फिल्म से जुड़ा सन्देश भी बोझिल बन गया है. सीन्स में इमोशन की कमी रह गयी है, जबकि इस तरह के पारिवारिक ड्रामा में इमोशन सबसे अहम होता है.जब बच्चे अपनी माँ के खर्चे गिनवाते हैं. वह दृश्य भी प्रभावित नहीं कर पाया है.विमला शिमला छोड़कर क्यों नहीं अपने बेटों के पास रहने गयी. यह सवाल भी मन में आता है.जिसका जवाब कहानी में कहीं नहीं है.सीन ही नहीं फिल्म के कुछ ट्रैक गैर जरुरी लगते हैं. जुए में १६ करोड़ का कर्ज ये ट्रैक बेतुका सा है.उस कर्जे की वजह से शरथ कुमार का किरदार विमला के साथ मनमानी कर रहा है. यह बात भी स्क्रीनप्ले की माथा पीटने को मजबूर करती है.विमला का बड़ा बेटा अपने छोटे बेटे के परिवार को कन्नू की शादी में क्यों नहीं बुलाता है.इसका भी जवाब स्क्रीनप्ले नहीं देती है. इमोशन की तरह फिल्म में कॉमेडी का भी बुरा हाल है. फिल्म में कॉमेडी किंग कपिल शर्मा हैं लेकिन एक भी संवाद या कहे कॉमेडी पंच ऐसा नहीं बन पाया है. जो थिएटर से निकलने के बाद याद भी रहे.थिएटर में ही मुश्किल से कुछ दृश्यों में हंसी आती है. फिल्म में कपिल और सादिया की जोड़ी बेमेल दिखती है. उनके बीच की केमिस्ट्री भी मिसिंग थी. तकनीकी पहलुओं में
फिल्म का कैमरावर्क अच्छा है. शिमला की हसीं वादियों को फिल्म जोड़े हुए है.गीत संगीत औसत है.

कमजोर लेखन ने कलाकारों को भी किया कमजोर

कमजोर लेखन ने किरदारों को भी कमजोर किया है. फिल्म में अभिनय के कई खास नाम जुड़े हैं लेकिन कोई भी किरदार प्रभावी ढंग से उभरकर परदे पर नहीं आ पाया है.नीतू कपूर और शरथ कुमार का अभिनय ज़रूर अच्छा बन पड़ा है.कपिल शर्मा अपने चित परिचित अंदाज में ही नज़र आते हैं. नीतू कपूर और दिवंगत अभिनेता ऋषि कपूर की बेटी रिद्धिमा कपूर ने इस फिल्म में अपनी एक्टिंग की शुरुआत की है.परदे पर बस वह खूबसूरत और स्टाइलिश लगी हैं. सादिया खतीब,जितेंद्र हुड्डा सहित बाकी के किरदारों ने अपनी भूमिका के साथ न्याय किया है.

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