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रांची के निशांत के डायरेक्शन में हुआ महेंद्र सिंह धोनी का ऐड शूट,ऑटोग्राफ मांगने पर माही ने कही ये बात

Updated at : 16 Jan 2022 10:55 AM (IST)
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रांची के निशांत के डायरेक्शन में हुआ महेंद्र सिंह धोनी का ऐड शूट,ऑटोग्राफ मांगने पर माही ने कही ये बात

धोनी से ऐड शूट के बारे में जब प्रभात खबर के सुमीत कुमार वर्मा ने विस्तार में बात की तो उन्होंने बताया कि ये प्रोजेक्ट Yippee Noodles का था, जिसके निर्देशक दीपक थोमस सर और प्रोड्यूसर गौरव चनाना थे.

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आज हम बात कर रहे हैं एक ऐसे ही युवा के बारे में जो मुंबई में पेशे से चीफ असिस्टेंट डायरेक्टर है. जिनका नाम निशांत है और ये जेवियर मासकॉम के स्टूडेंट भी रह चुके है. इनकी फैमिली जिले के रातु रोड पंडरा में स्थित है. पिता श्री हरिवंश रॉय, उषा मार्टिन में इंजिनियर के रूप में कार्यरत है. धोनी से ऐड शूट के बारे में जब प्रभात खबर के सुमीत कुमार वर्मा ने विस्तार में बात की तो उन्होंने बताया कि ये प्रोजेक्ट Yippee Noodles का था, जिसके निर्देशक दीपक थोमस सर और प्रोड्यूसर गौरव चनाना थे. जबकि, मुझे चीफ असिस्टेंट डायरेक्टर के रूप में हायर किया गया था.

रांची में कहां से हैं, कब से इस फिल्ड में है?

माया नगरी मुंबई में भी रांची का बोल-बाला है. मैं इसलिए ऐसा कह रहा हूं क्योंकि हाल ही में पूर्व भारतीय कप्तान महेंद्र सिंह धोनी ने वहां एक ऐड शूट करवाया है. जहां धोनी को अपना ब्रांड एंबेसेडर बनाने के लिए कंपनियां आगे-पीछे लगी रहती है. वहीं, रांची से ही गए कई युवाओं के डायरेक्शन में कई ऐड शूट किए जा रहे हैं.

रांची के राजकुमार से मुंबई में मिलना कैसा लगा?

निशांत बताते हैं कि काटो तो खून नहीं वाली स्थिति थी. दरअसल, जब मुझे मालूम चला था कि धोनी के साथ ऐड शूट करना है तो मैंने दो-तीन प्रोजेक्ट को साइड कर इसे चुना. 16 दिसंबर को Yippee Noodles के लिए धोनी के साथ शूट करने का मौका मिला. मैं जब से मुंबई में हूं कई लोग मुझे आज भी धोनी के शहर से आए लड़के के रूप में ही पहचानते है. ज्यादा मलाल तब होता था जब दूसरों को धोनी के साथ शूट करते देखता था.

जब शूट के दौरान निर्देशक ने मुझे धोनी से मिलवाया और बताया कि आपके शहर का ही लड़का है तो काफ़ी ख़ुश और अपनेपन के भाव से कंधे पे हाथ रखकर पहले तो मुझे कम्फ़र्टेबल किया, और उन्होंने रांची में मेरे निवास के बारे में भी पूछा, इस फिल्ड में कब से कार्य कर रहे इसकी भी जानकारी ली. मानो किसी अपने का एहसास हो रहा था. वे काफी जमीन से जुड़े व्यक्ति है. मैंने जब शूट के बाद उनसे ऑटोग्राफ मांगा. उन्होंने कहा, ऑटोग्राफ लेते रहना पहले आओ फोटो क्लिक करवा लो. उनकी इन बातों से मेरे रोंगटे खड़े हो गए. लगभग 8 घण्टे धोनी के साथ बिताना अपने ज़िंदगी के सबसे अच्छे पलों के फ़ेहरिस्त में सबसे ऊपर रखा है.

आपको कैसे मिला ये प्रोजेक्ट?

जैसा कि मैंने बताया ये प्रोजेक्ट Yippee Noodles का था. मैं मुंबई में फ्रीलांसिंग रूप से चीफ असिस्टेंट डायरेक्टर के तौर पर कार्य करता हुं. जिस प्रोडेक्शन हाउस को जरूरत होती है, वो कॉल करते हैं. मुझे लुसिफर सर्कस प्रोडक्शन हाउस से कॉल आया था. उन्होंने पूछा था कि 16 दिसंबर को उपलब्ध हो या नहीं. मुझे धोनी के बारे में जैसे मालूम चला मैंने फौरन हां कर दिया.

मुंबई का रूख क्यों और कैसे किया?

दरअसल, बचपन से ही मेरे पास डिजिटल कैमरा था. जिसके फ्रेमिंग, फोटोग्राफी को लेकर मैं काफी जिज्ञासु रहता था. 2011-14 बैच में मॉसकाम में नामांकन के बाद मेरे कई दोस्तों ने कुछ मीडिया हाउस में इंटर्नशिप व ज्वाइन किया, लेकिन मैंने मुंबई का रूख किया.

कितने फिल्मों या ऐड व ओटिटी प्लेटफॉर्म पर काम कर चुके है?

मैंने अपने चार साल के करियर में हीरो मोटोकॉर्प, मारूती, तनिष्क, ऐमज़ॉन, फ़ॉर्चून, हैवेल्स समेत 75 से अधिक ऐड फिल्मों , zee cine awards और IIFA awards जैसे शो में भी काम किया है. कई बॉलिवुड फिल्मों से भी प्रपोजल मिल रहा है. हाल ही में रेज़ॉनन्स डिजिटल के बैनर तले बनी वेब सिरीज़ ‘छत्रसाल’ में भी associate creative producer के रूप में कार्य किया था, जो एमएक्स प्लेयर पर लांच हुई थी.

बॉलीवुड से आगे निकल चुकी है टॉलीवुड ऐसे में उस इंडस्ट्री में कार्य करने का मौका मिला या नहीं या करना चाहते हैं या नहीं?

जी हां! करना क्यों नहीं चाहता, हाल ही में मारूती के ऐड फिल्म का शूट, साउथ के एक गांव में जाकर किया था. टॉलीवुड में लैंग्वेज सबसे बड़ी प्रॉब्लम है. हालांकि, इसके लिए भी लोकल टीम हायर किए जाते है जो हिंदी बोल सके, और हमारी बात वहाँ के लोग को समझा सके.

कोरोना कितना प्रभावित कर रहा है आपके काम को?

कोरोना ने पूरी तरह से फिल्म इंडस्टी को प्रभावित किया है. खासकर वैसे लोग जो हाल-फिलहाल में किसी प्रोडक्शन हाउस से जुड़ कर सैलरी पर कार्य कर रहे हैं, उनमें से कईयों को जॉब तक गंवानी पड़ी है. फ्रीलांसिंग करना इस मामले में काफी हद तक मुझे सेफ लगता है, खासकर उनके लिए जो कुछ वक्त बिता चुके हैं इस इंडस्ट्री में. महीने में एक-दो प्रोजेक्ट भी मिल जाए तो अच्छी खासी इंकम हो जाती है.

झारखंड की इंडस्ट्री को कैसे देखते हैं आप, यहां के लिए कुछ करना चाहते हैं क्या?

देखिये, झारखंड की इंडस्ट्री भी धीरे-धीरे बढ़ रही है. मैंने भी एक-दो स्टोरी वहां को लेकर प्लान कर रखी है. समय की बस थोड़ी दिक्कत हो रही है.

भविष्य को लेकर क्या प्लान है?

भविष्य में कई प्रोजेक्ट्स पर काम करना है. कई प्रोजेक्ट्स लाइन-अप किए हुए है. मूवी और ओटिटी प्लेटफॉर्म पर भी कार्य करना है.

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