1. home Home
  2. entertainment
  3. bollywood
  4. exclusive akshay kumar says i often forget peoples names even in personal life urk

Exclusive : मैं निजी जिंदगी में भी लोगों के नाम अक्सर भूल जाता हूं- अक्षय कुमार

रोहित शेट्टी की अक्षय कुमार और कट्रीना कैफ स्टारर फ़िल्म 'सूर्यवंशी' टिकट खिड़की पर सफलता की कहानी लिख रही है. फ़िल्म ने 100 करोड़ के जादुई आंकड़े को पार कर दिया है. फ़िल्म की इस कामयाबी और उससे जुड़े दूसरे पहलुओं पर अक्षय कुमार से हुई बातचीत के प्रमुख अंश...

By उर्मिला कोरी
Updated Date
Akshay Kumar
Akshay Kumar
instagram

रोहित शेट्टी की अक्षय कुमार और कट्रीना कैफ स्टारर फ़िल्म 'सूर्यवंशी' टिकट खिड़की पर सफलता की कहानी लिख रही है. फ़िल्म ने 100 करोड़ के जादुई आंकड़े को पार कर दिया है. फ़िल्म की इस कामयाबी और उससे जुड़े दूसरे पहलुओं पर अक्षय कुमार से हुई बातचीत के प्रमुख अंश...

सूर्यवंशी पेंडेमिक के बाद पहली फ़िल्म है जो 100 करोड़ के क्लब में शामिल हुई है?

बहुत खुशी है. बहुत कुछ सीखना बाकी है. बहुत काम करना बाकी है. मैं मीडिया और दर्शकों का शुक्रगुज़ार हूं जो उन्होंने हमने सपोर्ट किया और हमारी फ़िल्म को इतना प्यार दिया.

क्या आपको पता था कि सूर्यवंशी 100 करोड़ का आंकड़ा पार कर जाएगी?

ऐसा कुछ सोचा नहीं था. इससे पहले बेल बॉटम ने भी कोशिश की थी लेकिन फ़िल्म 40 करोड़ तक ही पहुंच पायी . सबकुछ बंद था लेकिन कोशिश करना ज़रूरी था. सूर्यवंशी के साथ भी कोशिश की और इसमें हमने 100 करोड़ का जादुई आंकड़ा पार कर लिया.

ओटीटी की सफलता ने इस बहस को शुरू कर दिया था कि सुपरस्टार्स का तिलिस्म खत्म हो गया है लेकिन सूर्यवंशी की कामयाबी अलग कहानी कह रही है?

इस पर मैं यही कहूंगा कि राइटर्स असली स्टार्स हैं और वे ही एक्टर्स को स्टार बनाते हैं. वो सही लाइनें नहीं लिखेंगे तो मैं क्या करूंगा. कोई कहानी कमर्शियल होती है. कोई सच्ची घटना पर होती है. कहानी होती है इसलिए दर्शक सिनेमाघर में आते हैं.

सलीम जावेद से अब तक ना जाने कितने राइटर्स ने सुपरस्टार्स को बनाया है?

फ़िल्म में आपका किरदार लोगों के नाम भूल जा रहा है इस पहलू को दर्शकों ने खासा पसंद किया है क्या आप किसी ऐसे इंसान को जानते हैं जिसे ऐसी परेशानी है. सच कहूं तो निजी जिंदगी में मुझे नाम भूलने की आदत है . रोहित शेट्टी को ये बात पता थी तो उन्होंने उसे लेखक के साथ मिलकर कहानी में जोड़ दिया.

एक बार फिर आप इस फ़िल्म में जबरदस्त स्टंट करते नज़र आ रहे हैं क्या स्टंट करते हुए कभी डर का भी एहसास होता है?

जैसे हमारी बॉडी में गुड़ कोलेस्ट्रॉल और बैड कोलेस्ट्रॉल होता है. उसी तरह डर भी गुड और बैड होता है. गुड डर वो है जब आप किसी स्टंट को करने से पहले जांच परख लेते हैं. जैसे मैं इस कुर्सी से कूदने वाला हूं तो मैं देखूंगा कि नीचे पानी तो नहीं होगा या कोई और चीज़ जिससे मैं फिसल जाऊं. मेरे ग्रिप मजबूत हैं ना. ये सब गुड डर है जो मुझमें भी होता है. मुझसे किसी स्टंट को करवाने से पहले करवाता है. बैड डर वो है जो आपने कुछ किया नहीं लेकिन फिर भी डर रहे हो .

ख़बरें हैं कि हेलीकाप्टर वाले स्टंट में आपने सेफ्टी गियर नहीं पहने थे?

वो स्टंट करते हुए पायलट से मैंने बात की थी. मैंने चेक किया था कि मेरा ग्रिप कैसा है. मुझे पता था कि ढाई मिनट में वो शॉट पूरा हो जाएगा और मैं ढाई मिनट तक लटका रह सकता था तो ज़्यादा सेफ्टी की ज़रूरत नहीं थी.

एक एक्टर के तौर पर क्या चीज़ें आपको खुशी देती हैं?

जब दर्शक तारीफ करते हैं. आपकी फ़िल्म उनको पसंद आती है. एक्टर के तौर पर उस वक़्त भी खुशी मिलती है जब फ़िल्म अच्छा करती है और वही निर्माता अपनी अगली फिल्म के लिए भी साइन करता है.

इंडस्ट्री में तीन दशक गुजारने के बाद क्या बॉक्स ऑफिस का प्रेशर भी रहता है?

हां रहता है क्या होगा.कैसे होगा।कितना आएगा. बड़ी फिल्म है।प्रोड्यूसर के पैसे लगें हैं नहीं आएंगे तो आप फिर बड़ी फिल्म नहीं बना पाएंगे इसलिए सोचना पड़ता है..

किसी फिल्म में एक्टिंग के अलावा क्या आप क्रिएटिव ली भी जुड़ते हैं?

हां, जितना टाइम हो सके उनको देता हूं. एक एक फ़िल्म के अंदर मेरा 10 से 12 दिन चला जाता है. स्क्रिप्ट पर बात करता हूं. फ़िल्म की टीम से हर पहलू पर बात होती है. सुबह चार बजे वो लोग आ जाते हैं फिर हमारी बात होती है.

रोहित शेट्टी के साथ यह आपकी पहली फ़िल्म है निर्देशक के तौर उन्हें कैसा पाते हैं?

हमारी यह भले ही पहली फ़िल्म है लेकिन मैं रोहित शेट्टी को सालों से जानता हूं. जब वो अस्सिटेंट था. मैं कुकु कोहली की फ़िल्म में काम करता था वो उसके असिस्टेन्ट थे.मुझे शॉट के लिए बुलाता था. मैंने उस जैसा मेहनती आदमी बहुत कम देखा है जब वो अस्सिटेंट था पूरी शूटिंग के दौरान खड़ा रहता था. वो आज भी वैसा ही है.पूरे शॉट के दौरान वह खड़ा रहता है वो बैठता नहीं है.

सूर्यवंशी की कामयाबी के बाद दर्शकों से आप क्या अपील करेंगे?

जब पेंडेमिक था तो पुलिस, डॉक्टर सब काम ही कर रहे थे . सब बाहर थे. हम घर के अंदर थे. अब हमें बाहर निकलना है. सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए हमें भी अपनी नार्मल ज़िन्दगी जीनी है. पेंडेमिक ने सिनेमा इंडस्ट्री को सबसे ज़्यादा नुकसान पहुंचाया है तो हिंदी ही नहीं भोजपुरी, मराठी, गुजराती, तमिल, तेलुगु सहित हर भाषा के दर्शक फिल्मों को देखना शुरू करें.

आपके बेटे आरव ने क्या आपसे बात की कि वे क्या करना चाहते हैं?

नहीं अभी ऐसी कोई बात नहीं हुई है. वो अपनी पढ़ाई पर भी अभी पूरी तरह से फोकस कर रहा है.

ख़बरें थी कि आरव नॉवेल लिख रहा है?

ये गलत खबर है. अभी सिर्फ पढ़ाई.

आपकी आनेवाली फिल्में?

पृथ्वीराज, बच्चन पांडे, सिंड्रेला है. कैरियर के इस मुकाम पर पैसे नहीं बल्कि अलग अलग फिल्मों का हिस्सा बनना मायने रखता है.

Share Via :
Published Date

संबंधित खबरें

अन्य खबरें