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जोया सबको स्पेशल महसूस कराती हैं : फरहान

Updated at : 22 May 2015 5:26 PM (IST)
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जोया सबको स्पेशल महसूस कराती हैं : फरहान

फिल्म ‘दिल धड़कने दो’ एक पारिवारिक फिल्म है और फरहान इस फिल्म के न सिर्फ निर्माता हैं, बल्कि फिल्म में वे अहम किरदार भी निभा रहे हैं. पेश है फरहान अख्तर से अनुप्रिया अनंत की हुई बातचीत के मुख्य अंश. 1. ‘जिंदगी न मिलेगी दोबारा’ से बिल्कुल अलग मुझे शुरुआत में लोग ट्रेलर देखने के […]

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फिल्म ‘दिल धड़कने दो’ एक पारिवारिक फिल्म है और फरहान इस फिल्म के न सिर्फ निर्माता हैं, बल्कि फिल्म में वे अहम किरदार भी निभा रहे हैं. पेश है फरहान अख्तर से अनुप्रिया अनंत की हुई बातचीत के मुख्य अंश.

1. ‘जिंदगी न मिलेगी दोबारा’ से बिल्कुल अलग

मुझे शुरुआत में लोग ट्रेलर देखने के बाद यह प्रतिक्रिया दे रहे थे कि फिल्म का फील जिंदगी न मिलेगी दोबारा से मिलती जुलती है. तो मुझे थोड़ा दुख भी हो रहा था. लेकिन बाद में मुझे बात समझ आयी कि लोगों के कहने का मतलब है कि फिल्म में फील गुड वाला फैक्टर है. जैसा जिंदगी… में था. तो मुझे तसल्ली हुई.बहुत वक्त के बाद एक भरपूर क्लासिक फैमिली ड्रामा वाली फिल्म दर्शकों को दिल धड़कने दो के रूप में मिलेगी. मुझे तो बहुत खुशी है कि जोया और रीमा ने एक ऐसी कहानी लिखी, जिसमें एक इंडियन परिवार है. उसके क्या डायनैमिक्स होते हैं. खासतौर से ऐसे दौर में जहां बहुत सारे चेंजेज आ रहे हैं. जो कहते हैं कि सैटेलाइट कंट्री बन रही है दुनिया. तो एक इमोशनल कहानी है.कैरेक्टर है. हंसी है मजाक है.हर फैमिली में कहीं न कहीं कुछ छुए हुए से किरदार होते हैं न वैसे किरदार आपको इस फिल्म में नजर आयेंगे.

2. जोया का कमाल है

मैं सच कहूंगा कि मैं निर्माता होते हुए भी सबसे ज्यादा आराम से जोया के साथ ही काम करता हूं चूंकि वह अपने निर्देशन के साथ साथ बाकी सारे काम भी संभाल लेती है. मुझे तो उसके साथ काम करके काफी मजा इसलिए भी आता है. काफी कंफर्ट जोन में चला जाता हूं मैं. चूंकि सेट पर सारे स्टार्स को लेकर जाना. ऐसी मल्टी स्टारर फिल्में बनाना. यह सब जोया ही मैनेज करती हैं. उसका ही सारा थॉट प्रोसेस होता है.जोया के सेट पर आप जब जाते हैं तो आपको ऐसी फीलिंग हमेशा आयेगी कि हां मेरी इस फिल्म में जरूरत है और यह सिर्फ जोया ही कर सकती हैं. तो यह जो जिम्मेदारी थी. वह जोया ने बखूबी संभाला. इसलिए मुझे खास दिक्कत तो नहीं हुई.

जोया के काम करने का एक ऐसा सिस्टम था कि वह हर कास्ट, क्रू सबको ऐसा महसूस करवाती हैं कि इस फिल्म में उनके बिना काम नहीं हो सकता था. वह हर किसी को स्पेशल फील कराती हैं तो जाहिर है सभी को काम करके मजा ही आया होगा और ऐसे भी यह फिल्म फन फिल्म है तो उनका ऐसा व्यवहार होना लाजिमी भी था. और इस वजह से कलाकार भी बहुत कंट्रीब्यूट करते हैं. उन्हें भी लगता है कि उन्हें अपना बेस्ट देना है.मैं होमवर्क करके आऊं. जोया क्रियेटिव वातावरण देती हैं सबको.

3. जोया की फिल्मों में फरहान

लोगों को ऐसा लगता है कि यह जोया ने सोच रखा है कि उसकी हर फिल्मों का मैं हिस्सा रहूंगा. लेकिन ऐसा कोई हार्ड एंड फार्स्ट रुल नहीं है. हां, मगर जोया की जब पहली फिल्म लक बाय चांस आयी थी. हमने सभी को ट्राइ किया था. इंडस्ट्री के हर कलाकार छोटे बड़े सबको फिल्म में शामिल किया था. वह उसकी पहली फिल्म थी तो मैं भी था और उस वक्त से यह सिलसिला शुरू हुआ. लेकिन मैंने लक बाय चांस से पहले रॉक ऑन किया था तो मुझमें थोड़ा कांफिडेंस था. लक बाय चांस की कहानी पसंद आयी थी तो मैंने हां कह दिया था.

मुझे ‘रॉक आॅन’ के बाद खुद में विश्वास हुआ और मुझे लगा कि मैं एक्टिंग कर सकता हूं तो मैंने ही जोया से कहा था कि मैं करना चाहता हूं तो मैंने वह फिल्म की. जोया की फिल्में ऐसी होती हैं कि जिनका हिस्सा मैं बनना चाहूंगा. चूंकि मेरा भी मिजाज तो थोड़ा वैसा ही है. इसलिए मैंने हां कहा. जिंदगी न मिलेगी दोबारा जब वह लिख रही थी तो वह बहुत श्योर थी कि इमरान का किरदार मैं ही कर पाऊंगा तो मैंने किया. इस कहानी में जब उन्होंने मुझे कैरेक्टर के बारे में बताया तब भी वह श्योर थीं कि मैंने जो किरदार निभाया है. वह मैं ही निभा सकता था.

4. जिंदगी की फिलॉसफी

हर फिल्म में कहीं न कहीं जिंदगी की फिलॉसफी रिफलेक्ट होती ही है. हमारी भी यही सोच है कि हम हर तरह की फिल्में बनाऊं,. अलग मुद्दों पर फिल्में बनाते रहे हैं. ऐसा हम सोच कर नहीं चलते. लेकिन हां कहीं न कहीं हर फिल्म में जिंदगी की फिलॉसफी टकराती ही है. फिर वह चाहे एक् शन फिल्में हों, हास्य फिल्में हो या पारिवारिक फिल्में.

5. जोया जिद्दी हैं

जोया जिद्दी निर्देशिका हैं और मुझे लगता है कि कुछ हद तक क्रियेटिव व्यक्ति को जिद्दी होना भी चाहिए तभी वह अपनी फिल्म को लेकर, कहानी को लेकर विश्वास रख पायेगा कि वह इसको बना पायेगा या नहीं. जोया भी क्रियेटिव हैं और जिद्दी हैं. और यह अच्छी बात है.

6. रईस न करने का अफसोस नहीं

मैंने रईस न करने का निर्णय इसलिए भी लिया था क्योंकि मैं पुलिस की भूमिका वजीर में निभा चुका था. वजीर मेरी आनेवाली महत्वपूर्ण फिल्मों में से एक है. सो, मैं खुद को फिर से पुलिस इंस्पेक्टर की भूमिका में नहीं दोहराना चाहता था. सो, इस बात का दुख नहीं है. अपनी फिल्म है. निर्माता के रूप में तो जुड़ा हुआ हूं ही.

7. माहिरा की लांचिंग

माहिरा को लांच करने की वजह यही है कि शुरू से हम इस बात को लेकर स्पष्ट थे कि हमें इस बार किसी नयी लड़की को कास्ट करना है. सो, हमने व कई लोगों ने उनका काम देखा था. सो, हमने उन्हें कास्ट करने का फैसला लिया.

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