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फिल्‍म रिव्‍यू: ''पीके''

Updated at : 19 Dec 2014 4:14 PM (IST)
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फिल्‍म रिव्‍यू: ''पीके''

II अनुप्रिया अनंत II फिल्म: पीके निर्देशक: राजकुमार हिरानी निर्माता: विदु विनोद चोपड़ा कलाकार: आमिर खान, अनुष्का शर्मा,संजय दत्त, सौरव शुक्ला और अन्य रेटिंग: साढे तीन इस साल की बहुप्रतिक्षित फिल्म ‘पीके’ ने सिनेमाघरों में दस्तक दे दिया है. इस फिल्म के बहुप्रतिक्षित होने की वजह आमिर खान की मौजूदगी ही नहीं बल्कि निर्देशक राजकुमार […]

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II अनुप्रिया अनंत II

फिल्म: पीके

निर्देशक: राजकुमार हिरानी

निर्माता: विदु विनोद चोपड़ा

कलाकार: आमिर खान, अनुष्का शर्मा,संजय दत्त, सौरव शुक्ला और अन्य

रेटिंग: साढे तीन

इस साल की बहुप्रतिक्षित फिल्म ‘पीके’ ने सिनेमाघरों में दस्तक दे दिया है. इस फिल्म के बहुप्रतिक्षित होने की वजह आमिर खान की मौजूदगी ही नहीं बल्कि निर्देशक राजकुमार हीरानी का इस फिल्म से जुड़ना है.मौजूदा दौर में ऐसे उंगली पर निर्देशक गिने जा सकते हैं. जिसकी फिल्मों का इंतजार दर्शक करते हैं.

पीके की बात करें तो इस फिल्म की कहानी एक एलियन की है. जो दूसरे गोले से हमारे गोले यानि पृथ्वी पर आया है. बॉलीवुड में अब तक एलियन को सुपरपावर से लैश सुपरमैन की तरह दिखाया गया है लेकिन निर्देशक राजू की इस फिल्म का यह नंगा पुंगा एलियन एक छोटे बच्चे की तरह मासूम है. उनकी तरह ढेरों सवाल उसके मन में हैं. जिसका जवाब वह जानना चाहता है.

उसके प्रश्न आपके दिल को छूते है तो कहीं गाल गीले कर जाते हैं. वह भगवान पर सवाल उठाता है. हमारे धर्म, मजहब को चुनौती देता है. जो उसका मासूम दिल समझता है. उससे उसे धर्म एक फैशन लगता है. जिसके सर पर टोपी है. वह मुस्लिम, जिसके सिर पर तिलक है वह हिंदू. धर्म का काम लोगों को दुख दूर करना होता है. फैशनपरस्त बनाना नहीं. बहुत ही प्रभावी बात राजू ने ‘पीके’ के जरिए बहुत साधारण तरीके से कह दी.

फिल्म में व्यंगात्मक तरीके से यह बात भी लुभाती है कि पृथ्वी के लोग लड़ाई झगड़ा, मारपीट, कत्लेआम जैसे नफरत वाले काम खुलेआम करना पसंद करते हैं लेकिन प्यार वह कमरों में करते हैं. फिल्म में धर्म के ठेकेदारो को यह फिल्म चुनौती देती है. जो कहीं न कहीं उमेश शुक्ला की फिल्म ‘ओ माय गॉड’ की याद कराता है. हालांकि सिचुएशन अलग है लेकिन मूल संदेश वही फिल्म की कहानी में निहित है.

फिल्म का यह पहलू जरुर फिल्म को कमजोर कर जाता है. राजकुमार हीरानी बतौर निर्देशक एक बार फिर अपनी छाप छोडने में कामयाब हुए हैं. हर सीन और हर सिचुएशन में उनके परफेक्शन की छाप दिखती है. एक अरसे बाद फिल्म में क्लाइमेक्स का सही मतलब किसी फिल्म में दिखा है. वरना काफी समय से फिल्म में क्लाइमेक्स के नाम पर कुछ घिसा पिटा ही परोसा जाता रहा है.

अभिनय की बात करें तो ‘मिस्टर परफेक्शनिस्ट’ ने एलियन के किरदार को पर्दे पर जीवंत कर दिया है. उनके हाव भाव, संवाद अदाएगी सबकुछ उनके किरदार को यादगार बना जाती है. अनुष्का शर्मा, संजय दत्त, सौरव शुक्ला सहित सभी किरदारों ने आमिर का बखूबी साथ दिया है.

संगीत की बात करें तो पीके का संगीत छाप नहीं छोड़ पाता है. सोनू निगम वाला गीत जरुर प्रभावी है. फिल्म का व्यंगात्मक ट्रीटमेंट इसके चुटीले लेकिन गहरे संवाद के जरिए और ज्यादा प्रभावी बन जाते है. कुलमिलाकर पीके संदेशप्रद मनोरंजक फिल्म है. जो हर वर्ग के दर्शकों का दिल छूने में सक्षम है.

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