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Film Review : फिल्‍म देखने से पहले जानें कैसी है ''छपाक''

Updated at : 09 Jan 2020 3:15 PM (IST)
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Film Review : फिल्‍म देखने से पहले जानें कैसी है ''छपाक''

II उर्मिला कोरी II फ़िल्म: छपाक निर्माता: दीपिका पादुकोण निर्देशक: मेघना गुलज़ार कलाकार: दीपिका पादुकोण, विक्रांत मेसी रेटिंग: तीन एसिड अटैक सर्वाइवर की कहानी वो भी मुख्यधारा की बॉलीवुड फिल्म और उसमें बॉलीवुड की सुपरस्टार अभिनेत्री कुछ साल पहले तक यह बात किसी के जेहन में भी नहीं आ सकती थी तो रुपहले परदे पर […]

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II उर्मिला कोरी II

फ़िल्म: छपाक

निर्माता: दीपिका पादुकोण

निर्देशक: मेघना गुलज़ार

कलाकार: दीपिका पादुकोण, विक्रांत मेसी

रेटिंग: तीन

एसिड अटैक सर्वाइवर की कहानी वो भी मुख्यधारा की बॉलीवुड फिल्म और उसमें बॉलीवुड की सुपरस्टार अभिनेत्री कुछ साल पहले तक यह बात किसी के जेहन में भी नहीं आ सकती थी तो रुपहले परदे पर आनी दूर की कौड़ी थी. यही वजह है कि दीपिका पादुकोण की फ़िल्म ‘छपाक’ कई मामलों में खास है.

यह फ़िल्म बताती है कि कुछ मुद्दों को उठाया जाना चाहिए भले ही रुपहले परदे पर उसे देखते हुए आप असहज हो जाए. आखिरकार सिनेमा समाज का आईना है. फ़िल्म की कहानी की बात करें तो फ़िल्म एसिड अटैक सर्वाइवर लक्ष्मी अग्रवाल की कहानी है.

फ़िल्म में मालती (दीपिका पादुकोण) के किरदार के ज़रिए दिखाया गया है. जिसने न सिर्फ अपने दोषियों को कड़ी सजा दिलाने के लिए लंबी लड़ाई लड़ी बल्कि एसिड की खुली बिक्री के खिलाफ भी कानून में संसोधन करवाने की वजह बनी. उसकी यह लड़ाई आसान नहीं थी.समाज से लेकर आर्थिक स्थिति सभी उसका रोड़ा बनी.

फ़िल्म में इस कहानी को अतीत और वर्तमान के ज़रिए दर्शाया गया है. फ़िल्म में एसिड सर्वाइवर के दर्द, मेडिकल प्रक्रिया से लेकर कानूनी अड़चन को भी दिखाया गया. किसी पर चाय फेंकने पर जो सजा है वही सजा एसिड फेंकने की भी है. फ़िल्म का फर्स्ट हाफ थोड़ा स्लो है जो अखरता है. सेकेंड हाफ में कहानी रफ्तार पकड़ती है. फ़िल्म की खासियत यह है कि संवेदनशील मुद्दे को बहुत ही सिंपल तरीके से कहा गया है कहीं भी भाषणबाजी नहीं हुई है ना ही उपदेश दिया गया है. फ़िल्म का ट्रीटमेंट डॉक्यू ड्रामा अंदाज़ में किया गया है.

अभिनय की बात करें तो दीपिका ने शानदार परफॉर्मेंस दिया है. मालती के किरदार के दर्द, खुशी, हिम्मत, संकोच सबको उन्होंने अपने अभिनय से जीवंत किया है. विक्रांत भी अपनी भूमिका में छाप छोड़ने में कामयाब रहे. बाकी के किरदारों का भी काम अच्छा है. फ़िल्म का गीत संगीत हो या संवाद कहानी की संवेदनशीलता को बखूबी बयां करता है.

अभिनेत्रियों को हमेशा रुपहले परदे पर खूबसूरत देखने की चाहत रखने वालों के लिए ये फ़िल्म अखर सकती है. ये फ़िल्म मन की खूबसूरती की बात करता है और हर हाल में ज़िन्दगी को जीने के जिजीविषा की. अगर उनसे आपको सरोकार है तो फ़िल्म आपके लिए है.

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