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Film Review: फिल्‍म देखने से पहले जानें कैसी है सैफ की ''लाल कप्‍तान''

Updated at : 18 Oct 2019 3:21 PM (IST)
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Film Review: फिल्‍म देखने से पहले जानें कैसी है सैफ की ''लाल कप्‍तान''

II उर्मिला कोरी II फ़िल्म: लाल कप्तान निर्माता: आनंद एल राय निर्देशक: नवदीप कलाकार: सैफ अली खान, सोनाक्षी सिन्हा, जोया हुसैन, मानव विज, दीपक डोब्रियाल और अन्य रेटिंग: दो हिंदी सिनेमा का पॉपुलर फार्मूला बदल रहा है. इसी फॉर्मूले पर फ़िल्म ‘लाल कप्तान’ की भी कहानी है. फ़िल्म का कालखंड 18 वीं शताब्दी है. यही […]

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II उर्मिला कोरी II

फ़िल्म: लाल कप्तान

निर्माता: आनंद एल राय

निर्देशक: नवदीप

कलाकार: सैफ अली खान, सोनाक्षी सिन्हा, जोया हुसैन, मानव विज, दीपक डोब्रियाल और अन्य

रेटिंग: दो

हिंदी सिनेमा का पॉपुलर फार्मूला बदल रहा है. इसी फॉर्मूले पर फ़िल्म ‘लाल कप्तान’ की भी कहानी है. फ़िल्म का कालखंड 18 वीं शताब्दी है. यही फ़िल्म में उत्सुकता जगाता है कि ये बात नए किरदार और दिलचस्प पहलू के साथ कहानी को परोसा जाएगा लेकिन जिस तरह से कहानी को परोसा गया है वह न एंगेजिंग है और ना ही मनोरंजक. भले ही हॉलीवुड के अंदाज़ वाला ग्रैंड प्रोडक्शन वैल्यू है, कमाल की स्टारकास्ट है लेकिन कहानी बहुत कमजोर और उबाऊ रह गयी है.

फ़िल्म की कहानी 18 वीं सदी के आखिर में सेट है. जब अंग्रेज़ भारत में अपनी जड़ें जमा रहा था. भारत के नवाब, मुग़ल, मराठा और दूसरे शासक आपस में लड़ भिड़ रहे हैं. इन सबके के बीच एक नागा साधु गोसाई (सैफ अली खान) एक शासक रहमत खान (मानव विज) की तलाश में है.

उस क्रूर, मौकापरस्त शासक से गोसाई को दशकों पुराना एक बदला लेना है. अपने पिता की हत्या का और एक छोटे बच्चे को जान से मारने का. कहानी के अतीत में जाने से यह पता तो लग जाता है कि वो बच्चा और कोई बल्कि गोसाई है. गोसाई फिर बच कैसे गया, यह रोचक पहलू है. लेकिन इस रहस्य से जब तक फ़िल्म में पर्दा खुलता है तब तक दर्शक की उत्सुकता और धैर्य दोनों जवाब देने लगती है.

इसके साथ ही कई और किरदार भी हैं और उनसे जुड़ी अपनी अपनी ट्रेजेडी भी, जो कहानी को बेवजह लंबा बनाता जाता है. फ़िल्म की कहानी में इतना गहराव नहीं था कि कहानी को इतना लंबा खींचा गया है. फ़िल्म की गति भी बेहद धीमी है तो और मामला सर दर्द वाला हो गया है. कहानी को आराम से 30 से 35 मिनट तक एडिट किया जा सकता था.

अभिनय की बात करें तो सैफ अली खान मौजूदा दौर के चुनिंदा एक्टर्स में से हैं जो अपने हर किरदार के साथ एक्सपेरिमेंट करते हैं. इस फ़िल्म में भी उन्होंने एक्सपेरिमेंट किया है. अपने लुक से बॉडी लैंग्वेज तक सभी में. उन्होंने दमदार परफॉर्मेंस दी है. फ़िल्म के खलनायक मानव विज है, वे अपने किरदार में ठीक ठाक रहे हैं हालांकि उनके किरदार को कहानी में ठीक तरह से स्थापित नहीं किया गया है.

दीपक डोब्रियाल इस मारकाट से भरी फ़िल्म में अपनी मौजूदगी से सुकून पहुंचाते हैं. सिमोन सिंह अरसे बाद पर्दे पर दिखी हैं, वह याद रहती है. सोनाक्षी सिन्हा फ़िल्म में सरप्राइज भूमिका में हैं. बाकी के किरदार ठीक ठाक रहे हैं. फ़िल्म की सिनेमैटोग्राफी तारीफ के काबिल है. डायलॉग और फ़िल्म का एक्शन भी दमदार है. गीत संगीत की बात करें तो लहू का रंग, तांडव जैसे गीत कहानी के अनुरूप है.

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