‘पत्नी को डिस्चार्ज कराने के पैसे नहीं थे’, बेटी के जन्म का किस्सा सुनाकर भावुक हुए Ravi Kishan

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Ravi Kishan With Wife And Daughter

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Ravi Kishan: रवि किशन आज फिल्म और राजनीति की दुनिया का बड़ा नाम हैं, लेकिन एक समय ऐसा भी था जब बेटी के जन्म के बाद पत्नी को अस्पताल से घर लाने तक के पैसे उनके पास नहीं थे. जानिए संघर्ष और सफलता की उनकी भावुक कहानी.

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Ravi Kishan: भोजपुरी सिनेमा से लेकर बॉलीवुड, साउथ फिल्मों और राजनीति तक अपनी पहचान बना चुके रवि किशन आज किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं. अपनी शानदार एक्टिंग और बेबाक अंदाज के दम पर उन्होंने लाखों लोगों का दिल जीता है. लेकिन सफलता की इस चमक के पीछे संघर्ष की एक ऐसी कहानी छिपी है, जिसे सुनकर किसी की भी आंखें नम हो सकती हैं.

बचपन से था अभिनय का शौक

उत्तर प्रदेश के जौनपुर में जन्मे रवि किशन का पूरा नाम रवि किशन शुक्ला है. उन्हें बचपन से ही अभिनय का शौक था. गांव में होने वाली रामलीलाओं में वह सीता का किरदार निभाया करते थे. हालांकि उनके पिता को उनका यह शौक बिल्कुल पसंद नहीं था. बताया जाता है कि इस बात को लेकर उन्हें कई बार डांट और सख्ती का सामना भी करना पड़ा.

मां ने बढ़ाया हौसला

जहां पिता अभिनय के खिलाफ थे, वहीं उनकी मां ने हमेशा उनका साथ दिया. कहा जाता है कि मां ने ही उन्हें सपनों को पूरा करने के लिए घर छोड़ने का हौसला दिया. कम उम्र में रवि किशन मुंबई पहुंचे और अपने करियर की शुरुआत के लिए संघर्ष शुरू कर दिया.

संघर्ष के दिनों में झेली कई मुश्किलें

मुंबई में शुरुआती दिनों में रवि किशन को कई परेशानियों का सामना करना पड़ा. काम मिलने के बाद भी कई बार मेहनत का पूरा पैसा नहीं मिला. आर्थिक तंगी इतनी थी कि रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करना भी मुश्किल हो जाता था. इसके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और लगातार मेहनत करते रहे.

बेटी के जन्म पर भी नहीं थे पैसे

रवि किशन ने एक इंटरव्यू में अपने जीवन का बेहद भावुक किस्सा साझा किया था. उन्होंने बताया कि संघर्ष के दिनों में जब उनकी बेटी का जन्म हुआ, तब उनके पास अस्पताल का खर्च चुकाने तक के पैसे नहीं थे. हालात ऐसे थे कि पत्नी और नवजात बेटी को अस्पताल से घर लाने के लिए उन्हें उधार लेना पड़ा.

मेहनत ने बदली किस्मत

कठिन दौर से गुजरने के बावजूद रवि किशन ने अपने सपनों का साथ नहीं छोड़ा. लगातार मेहनत और लगन के दम पर उन्होंने मनोरंजन जगत में बड़ी सफलता हासिल की. आज वह फिल्मों के साथ-साथ राजनीति में भी सक्रिय हैं और उत्तर प्रदेश की गोरखपुर लोकसभा सीट से सांसद के रूप में अपनी जिम्मेदारियां निभा रहे हैं.

रवि किशन की यह कहानी बताती है कि मुश्किल हालात चाrहे कितने भी बड़े क्यों न हों, मेहनत और आत्मविश्वास के बल पर हर मंजिल हासिल की जा सकती है.

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मेरा नाम पुष्पांजलि है. मैं पिछले 2.5 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में मल्टीमीडिया जर्नलिस्ट के तौर पर काम कर रही हूं. इस दौरान मैंने मुख्य रूप से लाइफस्टाइल, हेल्थ, फैशन, ब्यूटी और होम टिप्स से जुड़े कंटेंट पर काम किया है. मुझे ऐसे आर्टिकल लिखना पसंद है जो आसान भाषा में हों और पाठकों के लिए उपयोगी भी हों. मैं ट्रेंडिंग टॉपिक्स पर रिसर्च करके SEO-फ्रेंडली कंटेंट तैयार करती हूं. इसके साथ ही आकर्षक हेडलाइन लिखना, सही जानकारी जुटाना और डिजिटल ऑडियंस की पसंद के अनुसार कंटेंट तैयार करना मेरी प्रमुख जिम्मेदारियों का हिस्सा रहा है. मैं हमेशा नई चीजें सीखने और अपने लेखन को बेहतर बनाने की कोशिश करती हूं. मेरा उद्देश्य ऐसा कंटेंट तैयार करना है जो लोगों तक सही जानकारी सरल और दिलचस्प तरीके से पहुंचाए.

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