Raksha Bandhan History 2026: कैसे शुरू हुआ रक्षाबंधन? जानिए इस पर्व की पौराणिक कहानी और देशभर में मनाने की परंपरा
स्कूल बोर्ड पर रक्षाबंधन का इतिहास बताती हुई छात्रा (सांकेतिक तस्वीर)
रक्षाबंधन भाई-बहन के प्रेम और विश्वास का पर्व है. जानिए Raksha Bandhan History 2026, इस त्योहार से जुड़ी श्रीकृष्ण-द्रौपदी, कर्णावती-हुमायूं, राजा बलि-माता लक्ष्मी और यम-यमुना की प्रमुख मान्यताएं.
Raksha Bandhan History 2026: रक्षाबंधन भारत के प्रमुख पारंपरिक त्योहारों में से एक है, जिसे भाई-बहन के प्रेम, विश्वास और सुरक्षा के प्रतीक के रूप में मनाया जाता है. ‘रक्षा बंधन’ का अर्थ ही है, रक्षा का बंधन. हिंदू पंचांग के अनुसार यह पर्व श्रावण मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है. इस दिन बहन अपने भाई की कलाई पर राखी बांधकर उसके सुख, समृद्धि और लंबी उम्र की कामना करती है, जबकि भाई बहन की रक्षा और हर परिस्थिति में उसका साथ देने का संकल्प लेता है.
Raksha Bandhan Krishna-Draupadi History Belief: क्या है इस पर्व की मान्यता?
ऐसे तो रक्षाबंधन की शुरुआत को लेकर कई पौराणिक कथाएं प्रचलित हैं, लेकिन भगवान श्रीकृष्ण और द्रौपदी की कथा सबसे प्रसिद्ध कथाओं में से एक मानी जाती है. महाभारत से जुड़ी इस लोकप्रिय मान्यता के अनुसार एक बार भगवान कृष्ण की उंगली में चोट लगने से रक्त निकलने लगा. यह देखकर द्रौपदी ने अपनी साड़ी का एक टुकड़ा फाड़कर कृष्ण की उंगली पर बांध दिया, जिससे रक्त बहना रुक गया. द्रौपदी के इस स्नेह से प्रभावित होकर कृष्ण ने उनकी रक्षा का भाव व्यक्त किया. इसी घटना को भाई-बहन के बीच प्रेम और रक्षा के प्रतीकात्मक भाव से जोड़कर देखा जाता है.
Rani Karnavati and Humayun Rakshabandhan Story: रानी कर्णावती और हुमायूं की कहानी
एक लोकप्रिय ऐतिहासिक मान्यता के अनुसार, मेवाड़ की रानी कर्णावती ने बहादुर शाह के आक्रमण के समय मुगल सम्राट हुमायूं को राखी भेजकर मदद की अपील की थी. कहा जाता है कि हुमायूं ने राखी को भाई-बहन के रिश्ते का सम्मान मानते हुए कर्णावती की सहायता करने का फैसला किया.
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Indra and Indrani Rakshabandhan History: इंद्र और इंद्राणी की कहानी
एक अन्य पौराणिक मान्यता देवताओं और असुरों के युद्ध से जुड़ी है. कहा जाता है कि जब इंद्र असुरों के साथ युद्ध के लिए जा रहे थे, तब उनकी पत्नी इंद्राणी ने उनकी कलाई पर पवित्र रक्षा सूत्र बांधा और उनकी विजय व सुरक्षा की कामना की. इसके बाद इंद्र युद्ध में विजयी हुए.
Raja Bali and Maa Lakshmi Raksha Bandhan History: राजा बलि और माता लक्ष्मी की कथा
विष्णु पुराण से जुड़ी एक प्रसिद्ध कथा के अनुसार, भगवान विष्णु जब राजा बलि को दिए अपने वचन के कारण उनके साथ पाताल लोक में रहने लगे, तब माता लक्ष्मी उन्हें वापस लाने के लिए राजा बलि के पास पहुंचीं. उन्होंने बलि को रक्षा सूत्र बांधकर अपना भाई माना और बदले में भगवान विष्णु को अपने साथ ले जाने का अनुरोध किया. बलि ने उनकी बात स्वीकार कर ली.
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Raksha Bandhan Rituals and Traditions: जानिए क्या है परंपरा?
रक्षा बंधन का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व केवल राखी बांधने तक सीमित नहीं है. भारतीय परंपरा में इस दिन बहन पूजा की थाली सजाती है, जिसमें राखी, रोली या कुमकुम, अक्षत, दीपक और मिठाई रखी जाती है. शुभ समय पर भाई को तिलक लगाया जाता है, उसकी आरती उतारी जाती है और फिर दाहिनी कलाई पर राखी बांधी जाती है. इसके बाद भाई-बहन एक-दूसरे का मुंह मीठा कराते हैं. भाई अपनी बहन को उपहार देता है और उसकी खुशी व सुरक्षा का संकल्प लेता है.
Raksha Bandhan Celebration: देशभर में कैसे मनाया जाता है?
रक्षाबंधन पूरे भारत में अलग-अलग तरह से मनाया जाता है. विभिन्न राज्यों में इसकी परंपराओं और रीति-रिवाजों में थोड़ा अंतर देखने को मिलता है. महाराष्ट्र में इसी दिन नारियल पूर्णिमा मनाने की परंपरा है, खासकर समुद्र से जुड़े समुदायों में लोग समुद्र की पूजा करते हैं और नारियल अर्पित करते हैं. गुजरात में रक्षाबंधन के अवसर पर धार्मिक पूजा और राखी बांधने के साथ भगवान शिव की आराधना से जुड़ी कुछ स्थानीय परंपराएं भी हैं. वहीं ओडिशा में इस दिन झूला उत्सव और भगवान कृष्ण से जुड़ी स्थानीय परंपराओं का भी आयोजन होता है.
Note: यह पर्व भाई बहन के प्रेम, विश्वास और सुरक्षा के प्रतीक के रूप में मनाया जाता है. इस पर्व से जुड़ी ऐसी कई कहानियां और मान्यताएं हैं.
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