रक्षाबंधन की शुरुआत कब और कैसे हुई? एक नहीं 3-3 कथा है प्रचलित

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स्कूल बोर्ड पर रक्षाबंधन का इतिहास बताती हुई छात्रा (सांकेतिक तस्वीर)

Raksha Bandhan History: श्रीकृष्ण और द्रौपदी से जुड़ी कहानी रक्षाबंधन की सबसे प्रचलित कथाओं में से एक मानी जाती है. लेकिन क्या आप जानते हैं इसके अलावा भी उत्तर भारत से लेकर दक्षिण भारत तक, कई कहानियां प्रचलित हैं. आइए, जानते हैं रक्षा बंधन के इतिहास के बारे में.

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Raksha Bandhan 2026: रक्षाबंधन भारत के सबसे लोकप्रिय पर्व में से एक है. यह पर्व भाई-बहनों के दिल से जुड़ा है. इस दिन बहनें अपने भाइयों की कलाई पर राखी (Rakhi) बांधकर उनकी लंबी उम्र और सुख-समृद्धि की कामना करती हैं, जबकि भाई उनकी रक्षा का वचन देते हैं. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि रक्षाबंधन की शुरुआत कब और कैसे हुई? इस पर्व की जड़ें वैदिक काल और पौराणिक कथाओं से जुड़ी हुई हैं. धर्मग्रंथों में रक्षासूत्र बांधने की कई कथाएं मिलती हैं, जिन्होंने इस त्योहार को विशेष महत्व दिया.

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श्रीकृष्ण और द्रौपदी की कथा

रक्षाबंधन से जुड़ी सबसे प्रसिद्ध कथा महाभारत काल की मानी जाती है. कहा जाता है कि जब भगवान श्रीकृष्ण ने सुदर्शन चक्र से शिशुपाल का वध किया था, तब उनकी उंगली कट गई थी. यह देखकर द्रौपदी ने तुरंत अपनी साड़ी का एक टुकड़ा फाड़कर उनकी उंगली पर बांध दिया. द्रौपदी के इस स्नेह और समर्पण से प्रसन्न होकर श्रीकृष्ण ने जीवनभर उनकी रक्षा करने का वचन दिया. माना जाता है कि इसी घटना ने रक्षा और विश्वास के इस पवित्र बंधन को नई पहचान दी.

हिंदी में रक्षाबंधन (Raksha Bandhan Essay) पर निबंध लिखते हुए आप इस कथा का मेंशन कर सकते हैं. खैर इसके अलावा भी रक्षाबंधन को लेकर 3 और कथाएं प्रचलित हैं. आइए, जानते हैं इन कहानियों के बारे में.

1.इंद्राणी ने बांधा था इंद्र को रक्षासूत्र

भविष्य पुराण में रक्षाबंधन की एक और कथा मिलती है. देवताओं और असुरों के बीच भीषण युद्ध चल रहा था और देवराज इंद्र की स्थिति कमजोर पड़ने लगी थी. तब उनकी पत्नी इंद्राणी (शची) ने श्रावण पूर्णिमा के दिन मंत्रों से अभिमंत्रित रक्षासूत्र उनके हाथ में बांधा. इसके बाद इंद्र ने युद्ध में विजय प्राप्त की. इसी कारण रक्षासूत्र को सुरक्षा और विजय का प्रतीक माना जाता है.


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2.राजा बलि और माता लक्ष्मी की कथा

पौराणिक मान्यता के अनुसार, भगवान विष्णु राजा बलि को दिए गए वचन के कारण पाताल लोक में रहने लगे थे. इससे माता लक्ष्मी चिंतित हो गईं. भगवान विष्णु को वापस लाने के लिए माता लक्ष्मी ने राजा बलि को राखी बांधी और उन्हें अपना भाई बना लिया. भाई का रिश्ता स्वीकार करने के बाद राजा बलि ने माता लक्ष्मी से वर मांगने को कहा. तब माता लक्ष्मी ने भगवान विष्णु को अपने साथ वापस ले जाने की इच्छा जताई, जिसे राजा बलि ने स्वीकार कर लिया.

3.यमराज और यमुना की कथा

रक्षाबंधन की एक कथा मृत्यु के देवता यमराज और उनकी बहन यमुना से भी जुड़ी है. कहा जाता है कि यमुना अपने भाई यमराज को बार-बार अपने घर आने का निमंत्रण देती थीं. एक दिन जब यमराज उनसे मिलने पहुंचे, तो यमुना ने उनका स्वागत कर उनकी कलाई पर रक्षासूत्र बांधा. बहन के प्रेम से प्रसन्न होकर यमराज ने यमुना को अमरता और सुरक्षा का वरदान दिया. तभी से भाई-बहन के स्नेह का यह पर्व मनाए जाने की मान्यता है.

सिर्फ भाई-बहन का नहीं, विश्वास और सुरक्षा का पर्व

समय के साथ रक्षाबंधन केवल भाई-बहन के रिश्ते तक सीमित नहीं रहा. आज यह त्योहार प्रेम, विश्वास, सम्मान और सुरक्षा के वचन का प्रतीक बन चुका है. कई जगहों पर लोग सैनिकों, गुरुओं, मित्रों और यहां तक कि पेड़ों को भी राखी बांधकर सुरक्षा और संरक्षण का संदेश देते हैं. रक्षाबंधन की ये पौराणिक कथाएं बताती हैं कि यह पर्व केवल एक धागा बांधने की परंपरा नहीं, बल्कि रिश्तों में विश्वास, जिम्मेदारी और प्रेम का उत्सव है.


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