IIT IIM ने पढ़ाया करना तो सिखाया, लेकिन खुश रहना नहीं, IAS दिव्या मित्तल का छलका दर्द

Published by : Shambhavi Shivani Updated At : 18 May 2026 1:40 PM

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IAS दिव्या मित्तल (PC-इंस्टाग्राम)

IAS Divya Mittal: 2013 बैच की IAS दिव्या मित्तल अक्सर सोशल मीडिया पर अपने विचार शेयर करती रहती हैं. इस बार उन्होंने स्कूली शिक्षा पर सवाल उठाए हैं.

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IAS Divya Mittal: IAS दिव्या मित्तल का एक इमोशनल पोस्ट सोशल मीडिया पर दिखा. वायरल पोस्ट में उन्होंने भारत की शिक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाया है. दिव्या मित्तल ने कहा कि स्कूल और कॉलेज हमें कठिन परीक्षाएं पास करना तो सिखाते हैं लेकिन खुश रहना नहीं सिखाते हैं. IAS ने कहा कि IIT Delhi, IIM Bangalore और UPSC ने उन्हें सक्सेस का रास्ता तो दिखाया लेकिन अकेलेपन, मेंटल प्रेशर और भावनाओं को संभालना नहीं सिखाया. इसी के साथ उन्होंने स्कूल के शिक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाए.

हम अपनी जिंदगी के कई साल सफलता हासिल करना सीखने में लगा देते हैं, लेकिन खुश रहना कैसे है, यह सीखने में एक दिन भी नहीं बिताते. मेरे विचार में हमारी स्कूली शिक्षा में कुछ बेहद जरूरी चीजें गायब हैं.

इमोशनल रेगुलेशन (Emotional Regulation)

हमने पीरियॉडिक टेबल तो याद कर ली, लेकिन टूटे दिल की केमिस्ट्री किसी ने नहीं समझाई. स्कूल ने हमें चुप रहना सिखाया और उसी को शांति मान लिया. आज हम अपनी भावनाओं को संभालना नहीं जानते. हमें अपने इमोशन को दबाना सिखाया गया लेकिन उसे प्रोसेस करना नहीं.

गहरी बातचीत की कला (Deep Communication)

हमें परफेक्ट निबंध लिखना सिखाया गया, लेकिन “मैं दुखी हूं” या “नहीं” कहना नहीं सिखाया गया. हमें यह नहीं बताया गया कि बॉस की बदसलूकी के सामने अपनी बात कैसे रखें या अपनी लिमिट की रक्षा कैसे करें.

क्रिटिकल थिंकिंग (Critical Thinking)

स्कूल में सबसे ज्यादा जवाब देने वाला छात्र सबसे अच्छा माना जाता था. लेकिन जिंदगी में वही आगे बढ़ता है जो सबसे ज्यादा सवाल पूछता है. हमें हर बात अंतिम सत्य की तरह बताई गई, इसलिए हम बिना सोचे-समझे चीजों को मानने लगे.

फाइनेंशियल लिटरेसी (Financial Literacy)

हमने मैथ्स पढ़ा, x की वैल्यू निकाली, लेकिन कर्ज के जाल से बचना नहीं सीखा. पैसे सिर्फ मैथ्स नहीं हैं, बल्कि सही फैसले लेने की आजादी भी हैं. हमें यह नहीं सिखाया गया कि पैसा तनाव, रिश्तों और मानसिक शांति को कैसे प्रभावित करता है.

सेल्फ-डिसिप्लिन (Self Discipline)

स्कूल में घंटियां और टाइम-टेबल होते हैं, जहां कोई और बताता है कि क्या करना है. लेकिन असली जिंदगी में सबकुछ आपके ऊपर होता है. अनुशासन दरअसल खुद से किए वादे निभाने की आदत है, जो हममें से कई लोगों में नहीं बन पाती.

अकेलेपन को संभालना (Handling Loneliness)

स्कूल में हमेशा लोग आसपास होते हैं. इसलिए हमें कभी एहसास नहीं होता कि बड़े होने के बाद की खामोशी कितनी भारी हो सकती है. हमें यह नहीं सिखाया गया कि खुद का सबसे अच्छा दोस्त कैसे बनें.

लोगों को समझना (Reading People)

स्कूल के रिश्ते अक्सर मासूम होते हैं. लेकिन जिंदगी में हर कोई वैसा नहीं रहता. हमें लोगों के छिपे इरादों और उनके मुखौटों को पहचानना नहीं सिखाया गया.

मानसिक स्वास्थ्य की देखभाल (Mental Health Maintenance)

इसी के साथ स्कूल के फिटनेस अप्रोच पर भी सवाल उठाया. कहा स्कूल में सिर्फ पीटी क्लासेज होते हैं. लेकिन मेंटल हेल्थ के लिए कुछ नहीं होता. हमें थकान के बावजूद काम करते रहने की आदत सिखाई गई, और यही धीरे-धीरे हमें बर्नआउट तक ले जाती है.

खुद को जानना (Knowing Yourself)

हम सालों तक “सबसे अच्छा छात्र” बनने की कोशिश करते रहते हैं, लेकिन आखिर में पता चलता है कि हम खुद को ही नहीं जानते. असली शिक्षा यह है कि दुनिया के बताने से पहले हम खुद समझें कि हमारे लिए रियल में क्या मायने रखता है.

कौन हैं दिव्या मित्तल?

दिव्या मित्तल हरियाणा के रेवाड़ी की रहने वाली हैं. वे 2013 बैच के IAS हैं. उन्होंने IIT Delhi से बीटेक किया है. इसके बाद IIM से MBA की डिग्री हासिल की है. दिव्या मित्तल ने पढ़ाई पूरी करने के बाद लंदन की एक बड़ी कंपनी में नौकरी की, लेकिन देश लौटकर सिविल सेवा की तैयारी में जुट गईं. उन्होंने बिना कोचिंग के यूपीएससी परीक्षा पास की और 68 रैंक हासिल किया. वे अपने काम के कारण चर्चा में रहती हैं. उनकी गिनती जमीनी स्तर पर काम करने वाले IAS की लिस्ट में होती है. इसी के साथ वे सोशल मीडिया पर भी एक्टिव हैं. वे हमेशा अपने विचार शेयर करती रहती हैं.

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Shambhavi Shivani

लेखक के बारे में

By Shambhavi Shivani

शाम्भवी शिवानी डिजिटल मीडिया में पिछले 3 सालों से सक्रिय हैं और वर्तमान में प्रभात खबर की डिजिटल टीम के साथ एजुकेशन बीट पर काम कर रही हैं. शिक्षा और रोजगार से जुड़ी खबरों की समझ रखने वाली शाम्भवी एग्जाम, सरकारी नौकरी, रिजल्ट, करियर, एडमिशन और सक्सेस स्टोरी जैसे विषयों पर रिपोर्टिंग और फीचर राइटिंग करती हैं. सरल भाषा और जानकारी को व्यवस्थित तरीके से प्रस्तुत करना उनकी लेखन शैली की खासियत है. डिजिटल मीडिया में अपने करियर के दौरान शाम्भवी ने न्यूज़ हाट और राजस्थान पत्रिका जैसी संस्थाओं के साथ काम किया है. यहां उन्होंने एजुकेशन, युवा मुद्दों और ट्रेंडिंग विषयों पर कंटेंट तैयार किया. वर्तमान में प्रभात खबर के साथ जुड़कर वे खास तौर पर बोर्ड परीक्षा, प्रतियोगी परीक्षा, सरकारी नौकरी, करियर ऑप्शंस और प्रेरणादायक सक्सेस स्टोरीज पर काम कर रही हैं. शाम्भवी की रुचि सिर्फ पत्रकारिता तक सीमित नहीं है. उन्हें सिनेमा और साहित्य में भी गहरी दिलचस्पी है, जिसका असर उनकी लेखन शैली में भी देखने को मिलता है. वे तथ्यों के साथ भावनात्मक जुड़ाव और मानवीय पहलुओं को भी अपनी स्टोरीज में जगह देने की कोशिश करती हैं. पटना में जन्मीं शाम्भवी ने Patna University से मास कम्युनिकेशन में ग्रेजुएशन किया है. इसके बाद Indira Gandhi National Open University (IGNOU) से पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की. पत्रकारिता और जनसंचार की पढ़ाई ने उन्हें न्यूज राइटिंग, डिजिटल कंटेंट और ऑडियंस बिहेवियर की बेहतर समझ दी है. डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लगातार बदलते ट्रेंड्स और रीडर्स की जरूरतों को समझते हुए शाम्भवी SEO-फ्रेंडली, इंफॉर्मेटिव और एंगेजिंग कंटेंट तैयार करने पर फोकस करती हैं. उनकी कोशिश रहती है कि पाठकों तक सही, उपयोगी और आसान भाषा में जानकारी पहुंचाई जा सके.

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