DM और कलेक्टर में क्या अंतर होता है, जानें किसके पास है ज्यादा ताकत

सांकेतिक फोटो (PC-Freepik)
DM VS Collector: कलेक्टर की भूमिका मुख्य रूप से राजस्व प्रशासन से जुड़ी होती है. किसी भी जिले में जमीन, भूमि रिकॉर्ड और राजस्व से संबंधित मामलों का सबसे बड़ा अधिकारी कलेक्टर होता है.
DM VS Collector: यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा का रिजल्ट जारी होने के बाद हर साल लाखों युवाओं के मन में यह सवाल उठता है कि IAS बनने के बाद अधिकारी को कौन-कौन से पद मिलते हैं. आमतौर पर आईएएस अधिकारियों को जिले में सबसे महत्वपूर्ण प्रशासनिक जिम्मेदारी दी जाती है, जहां वे जिलाधिकारी (DM) या कलेक्टर के रूप में काम करते हैं. कई लोगों को लगता है कि डीएम और कलेक्टर दो अलग-अलग पद हैं, लेकिन वास्तव में दोनों पदों पर आमतौर पर आईएएस अधिकारी ही नियुक्त किए जाते हैं. हालांकि इनके काम और नाम को लेकर कुछ अंतर देखने को मिलता है.
डीएम की जिम्मेदारी
दरअसल, जिलाधिकारी (DM) किसी भी जिले का सर्वोच्च कार्यकारी मजिस्ट्रेट अधिकारी होता है. उसकी जिम्मेदारी जिले में कानून-व्यवस्था बनाए रखना, प्रशासनिक व्यवस्था संभालना और सरकारी योजनाओं को लागू कराना होती है.
डीएम को यह अधिकार दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC), 1973 के तहत दिए गए हैं. जिले में शांति व्यवस्था बनाए रखने और प्रशासनिक फैसले लेने में डीएम की महत्वपूर्ण भूमिका होती है.
कलेक्टर की जिम्मेदारी
कलेक्टर की भूमिका मुख्य रूप से राजस्व प्रशासन से जुड़ी होती है. किसी भी जिले में जमीन, भूमि रिकॉर्ड और राजस्व से संबंधित मामलों का सबसे बड़ा अधिकारी कलेक्टर होता है. कलेक्टर को यह अधिकार भूमि राजस्व संहिता (Land Revenue Code), 1959 के तहत दिए गए हैं. इस पद पर रहते हुए अधिकारी भूमि राजस्व की वसूली, जमीन से जुड़े विवादों और रिकॉर्ड के प्रबंधन की जिम्मेदारी निभाता है.
अलग-अलग राज्यों में अलग नाम
कई राज्यों में इन दोनों पदों के नाम अलग-अलग तरीके से इस्तेमाल किए जाते हैं. उदाहरण के तौर पर उत्तर प्रदेश में जिले के मुख्य प्रशासनिक अधिकारी को जिलाधिकारी कहा जाता है, जबकि राजस्थान जैसे राज्यों में उसी पद को कलेक्टर के नाम से जाना जाता है.
अगर वेतन की बात करें तो एक आईएएस अधिकारी का शुरुआती मूल वेतन लगभग 56,100 रुपये प्रति माह होता है. इसके अलावा उन्हें महंगाई भत्ता (DA), मकान किराया भत्ता (HRA), यात्रा भत्ता (TA) और अन्य कई सुविधाएं भी दी जाती हैं. इसलिए आईएएस सेवा देश की सबसे प्रतिष्ठित नौकरियों में से एक मानी जाती है.
किसके पास है ज्यादा ताकत?
डीएम (जिला मजिस्ट्रेट) और कलेक्टर दरअसल एक ही आईएएस अधिकारी की दो अलग-अलग जिम्मेदारियां होती हैं. डीएम की मुख्य भूमिका जिले में कानून-व्यवस्था बनाए रखने की होती है, जबकि कलेक्टर राजस्व और जमीन से जुड़े मामलों का प्रमुख अधिकारी होता है. चूंकि दोनों जिम्मेदारियां एक ही अधिकारी निभाता है, इसलिए इनमें किसी तरह की ऊंच-नीच नहीं होती. हालांकि कानून-व्यवस्था से जुड़े मामलों के कारण डीएम के रूप में अधिकारी के पास ज्यादा प्रशासनिक अधिकार और जिम्मेदारियां होती हैं.
यह भी पढ़ें- IAS बनने के बाद पहली पोस्टिंग किस पद पर होती है? यहां समझें पूरा गणित
प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
लेखक के बारे में
By Shambhavi Shivani
शाम्भवी शिवानी पिछले 3 सालों से डिजिटल मीडिया के साथ जुड़ी हुई हैं. उन्होंने न्यूज़ हाट और राजस्थान पत्रिका जैसी संस्था के साथ काम किया है. अभी प्रभात खबर की डिजिटल टीम के साथ जुड़कर एजुकेशन बीट पर काम कर रही हैं. शाम्भवी यहां एग्जाम, नौकरी, सक्सेस स्टोरी की खबरें देखती हैं. इसके अलावा वे सिनेमा और साहित्य में भी रुचि रखती हैं.
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए




