NAAC ग्रेड और NIRF रैंकिंग में क्या फर्क है? कॉलेज चुनने से पहले जरूर समझें

सांकेतिक फोटो (AI Generated)
NAAC vs NIRF: कॉलेज एडमिशन से पहले जानें NAAC ग्रेड और NIRF रैंकिंग में क्या अंतर है. समझें कि कॉलेज चुनते समय आपके लिए कौन सा फैक्टर सबसे ज्यादा जरूरी है.
NAAC vs NIRF: जब आप किसी कॉलेज या यूनिवर्सिटी में एडमिशन लेने जाते हैं, तो अक्सर ये दो शब्द सुनने को मिलते हैं NAAC ग्रेड और NIRF रैंकिंग. बहुत से स्टूडेंट्स और पेरेंट्स इन दोनों को एक ही समझ लेते हैं, लेकिन असल में इन दोनों में काफी फर्क है. ये दोनों किसी कॉलेज की क्वालिटी जांचने के दो अलग-अलग ऑप्शन हैं. आइए जानते हैं कि इन दोनों (NAAC vs NIRF) में क्या अंतर है और एडमिशन के वक्त आपको किस पर ध्यान देना चाहिए.
NAAC ग्रेड क्या है?
NAAC (National Assessment and Accreditation Council) का काम किसी कॉलेज या यूनिवर्सिटी को यह सर्टिफिकेट देना है कि वह पढ़ाई और सुविधाओं के मामले में एक तय स्टैंडर्ड को पूरा करता है या नहीं.
- यह कैसे काम करता है: NAAC की टीम खुद कॉलेज का दौरा करती है. वहां की लैब्स, लाइब्रेरी, टीचर्स की क्वालिटी, साफ-सफाई और माहौल को देखती है.
- स्कोरिंग का तरीका: सब कुछ जांचने के बाद NAAC कॉलेजों को A++, A+, A, B जैसे ग्रेड देती है.
NIRF रैंकिंग क्या है?
NIRF (नेशनल इंस्टीट्यूशनल रैंकिंग फ्रेमवर्क) गवर्नमेंट ऑफ इंडिया की एक पहल है. इसका काम देश के सभी टॉप कॉलेजों और यूनिवर्सिटीज की एक लिस्ट तैयार करना है, जिसमें नंबर 1, नंबर 2, नंबर 3 जैसी रैंक दी जाती है.
- यह कैसे काम करता है: NIRF की टीम कॉलेज जाकर चेक नहीं करती. बल्कि कॉलेज खुद अपना डेटा (जैसे- कितने बच्चों को प्लेसमेंट मिला, कितने रिसर्च पेपर छपे) NIRF के पोर्टल पर अपलोड करते हैं.
- स्कोरिंग का तरीका: इस डेटा के आधार पर हर साल एक लिस्ट जारी होती है, जिससे पता चलता है कि इस साल देश का बेस्ट कॉलेज कौन सा है.
NAAC vs NIRF: दोनों में मुख्य अंतर क्या है?
| बात | NAAC ग्रेड | NIRF रैंकिंग |
| मुख्य काम | यह देखता है कि कॉलेज में बुनियादी सुविधाएं और पढ़ाई का स्तर कैसा है. | यह बताता है कि कम्पटीशन में कॉलेज किस नंबर (Rank) पर खड़ा है. |
| तरीका | टीम खुद कॉलेज जाकर चेक करती है. | कॉलेज द्वारा भेजे गए डेटा के आधार पर लिस्ट बनती है. |
| दिखाया कैसे जाता है? | अक्षरों में (जैसे- A++, A, B) | नंबरों में (जैसे- रैंक 1, रैंक 50) |
| कितने दिनों में बदलता है? | यह ग्रेड एक बार मिलने पर 5 साल तक वैलिड रहता है. | यह रैंकिंग हर साल बदलती है. |
NAAC vs NIRF: एडमिशन के वक्त आपके लिए क्या जरूरी है?
- NAAC ग्रेड आपको यह भरोसा देता है कि उस कॉलेज में जाना सुरक्षित है, वहां की डिग्री की वैल्यू है और वहां बेसिक सुविधाएं (जैसे अच्छी फैकल्टी और लैब) मौजूद हैं.
- NIRF रैंकिंग आपको यह बताती है कि अगर आपके पास दो अच्छे कॉलेजों का ऑप्शन है, तो उनमें से किसका प्लेसमेंट, रिसर्च और माहौल ज्यादा बेहतर है.
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By Smita Dey
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