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World Soil Day 2023: मिट्टी से है लगाव बनाएं सॉइल साइंस में करियर, जानिए यहां सबकुछ

हर साल 5 दिसंबर को विश्व मृदा दिवस (वर्ल्ड सॉइल डे) मनाया जाता है. आप अगर मिट्टी के विज्ञान यानी सॉइल साइंस में रुचि रखते हैं, तो इसे करियर के तौर पर अपना कर पर्यावरण के साथ-साथ कृषि क्षेत्र में भी अपना योगदान दे सकते हैं. यहां जानिए कैसे बनाएं अपना करियर.

World Soil Day 2023: संयुक्त राष्ट्र की ओर से स्वस्थ मिट्टी के महत्व पर ध्यान केंद्रित करने के उद्देश्य के साथ हर वर्ष 5 दिसंबर को विश्व मृदा दिवस (वर्ल्ड सॉइल डे) मनाया जाता है. हमारे ग्रह का अस्तित्व मिट्टी और पानी के बीच अनमोल संबंध पर केंद्रित है और यह संबंध हमारी कृषि प्रणाली की नींव है. आप अगर मिट्टी के विज्ञान यानी सॉइल साइंस में रुचि रखते हैं, तो इसे करियर के तौर पर अपना कर पर्यावरण के साथ-साथ कृषि क्षेत्र में भी अपना योगदान दे सकते हैं…

हमारा 95 प्रतिशत से अधिक भोजन दो मूलभूत संसाधनों मिट्टी-पानी से उत्पन्न होता है. लेकिन, बढ़ते औद्योगीकरण और उससे उत्पन्न होनेवाले प्रदूषण एवं जलवायु परिवर्तन ने मिट्टी की सेहत को नकारात्मक तरीके से प्रभावित किया है. मिट्टी खनिजों, मृत और जीवित जीवों (कार्बनिक सामग्री), वायु और पानी का मिश्रण है. ये चार सामग्रियां एक दूसरे के साथ अद्भुत तरीके से प्रतिक्रिया करती हैं, जिससे मिट्टी हमारे ग्रह के सबसे गतिशील और महत्वपूर्ण प्राकृतिक संसाधनों में से एक बन जाती है.

सॉइल साइंस में करियर

मिट्टी का उपयोग लोग कई प्रकार से करते हैं. एक इंजीनियर मिट्टी को बुनियादी ढांचे की निर्माण सामग्री के रूप में देख सकता है, जबकि एक राजनयिक ‘मिट्टी’ को एक राष्ट्र के क्षेत्र के रूप में संदर्भित कर सकता है. मृदा वैज्ञानिक के दृष्टिकोण से मिट्टी है – ‘पृथ्वी की सतही खनिज या कार्बनिक परत, जिसने कुछ हद तक भौतिक, जैविक और रासायनिक अपक्षय का अनुभव किया है.’ आप अगर सॉइल साइंस यानी मृदा विज्ञान का अध्ययन करना चाहते हैं, तो बतौर मृदा वैज्ञानिक एक बेहतरीन करियर बना सकते हैं.

सॉइल साइंस के बारे में जानें

सॉइल साइंस मिट्टी के संरक्षण से जुड़ा विज्ञान है. इसमें मिट्टी के कटाव को नियंत्रित करने, मिट्टी के दोषों को दूर कर जमीन की उर्वरता को कायम रखने और बढ़ाने के तरीकों, खाद और उर्वरकों के इस्तेमाल, उचित फसल चक्र, वानिकी आदि का अध्ययन किया जाता है. पूरे विश्व में कृषि योग्य भूमि को संरक्षित करने में सॉइल साइंस के वैज्ञानिक एवं जानकार बड़े पैमाने पर काम कर रहे हैं.

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करें सॉइल साइंस की पढ़ाई

आप अगर सॉइल साइंस की पढ़ाई करना चाहते हैं, तो 12वीं के बाद बीएससी (सॉइल साइंस/ एग्रीकल्चर) में प्रवेश ले सकते हैं. एग्रोनॉमी/ एग्रीकल्चरल केमिस्ट्री/एग्रीकल्चर एक्सटेंशन/एग्रीकल्चरल इकोनॉमिक्स/ एग्रीकल्चरल बॉटनी/ फॉरेस्ट्री या एग्रीकल्चरल इंजीनियरिंग में डिग्री लेनेवाले भी सॉइल साइंस में मास्टर डिग्री हासिल कर पीएचडी एवं शोध की राह में आगे बढ़ सकते हैं.

प्रमुख संस्थान

  • भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद.

  • इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ सॉइल साइंस, भोपाल.

  • हिमाचल प्रदेश एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी, पालमपुर.

  • इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ सॉइल एंड वाटर कंजर्वेशन, देहरादून.

  • कलकत्ता विश्वविद्यालय, कोलकाता.

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आगे बढ़ने के मौके हैं यहां

सॉइल साइंस का अध्ययन कर आप सॉइल साइंटिस्ट, सॉइल कंजर्वेशनिस्ट, एनालिस्ट या सॉइल सर्वेक्षक और डेवलपमेंट कंसल्टेंट, इकोलॉजिस्ट, हाइड्रोलॉजिस्ट, एनवायर्नमेंटल साइंटिस्ट, सॉइल कंजर्वेशन टेक्नीशियन, सॉइल लेबोरेटरी टेक्नीशियन आदि के तौर पर इस क्षेत्र में आगे बढ़ सकते हैं.  सॉइल एंड फर्टिलाइजर टेस्टिंग लेबोरेटरी, मृदा उत्पादकता, एग्रीकल्चर आदि क्षेत्रों में काम करने के मौके होंगे. इस विषय में उच्च शिक्षा हासिल कर कॉलेज व विश्वविद्यालय में अध्यापन करने का भी विकल्प है.

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