दुमका मेडिकल कॉलेज अस्पताल का कुपोषण उपचार केंद्र बदहाल, टूट-टूट कर गिर रहा है बिल्डिंग का छज्जा

सरकारी उदासीनता कुपोषण उपचार केंद्र की इस महत्वकांक्षी योजना के सामने परेशानी की दीवार बनकर खड़ी है. विभागीय उदासीनता के कारण डायग्नोस्टिक सेंटर का भवन बदहाली की स्थिति में है. बिल्डिंग का छज्जा चारों ओर से टूट- टूट कर गिर रहा है, जिससे कभी भी कोई बड़ा हादसा हो सकता है.
दुमका : कुपोषित बच्चों को कुपोषण से निजात दिलाने के लिए दुमका मेडिकल कॉलेज अस्पताल परिसर स्थित डायग्नोस्टिक सेंटर में कुपोषण उपचार केंद्र 2010 में शुरू किया गया था. समर्पित डॉक्टर, नर्स व इस केंद्र तक बच्चों को पहुंचाने में मदद करने वाली सेविकाओं- सहियाओं के प्रयास से यह केंद्र कुपोषित बच्चों के लिए वरदान साबित हुआ. 10 साल के दौरान 1,915 बच्चों को इस केंद्र से इलाज कर में सुरक्षित घर भेजा गया, लेकिन सरकारी उदासीनता कुपोषण उपचार केंद्र की इस महत्वकांक्षी योजना के सामने परेशानी की दीवार बनकर खड़ी है. विभागीय उदासीनता के कारण डायग्नोस्टिक सेंटर का भवन बदहाली की स्थिति में है. बिल्डिंग का छज्जा चारों ओर से टूट- टूट कर गिर रहा है, जिससे कभी भी कोई बड़ा हादसा हो सकता है.
10 वर्ष पूर्व विभाग की ओर गड्ढेनुमा स्थान पर इस भवन का निर्माण कराया गया था. भवन तो बना था डायग्नोस्टिक कार्यों के लिए. समय के साथ सड़क और मकानों की ऊंचाई बड़ी, तो यह भवन रोड लेवल से नीचे हो गया. वर्तमान स्थिति यह है कि इस डायग्नोस्टिक सेंटर का ग्राउंड फ्लोर सड़क की बराबरी में आ गयी है.
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आसपास की जगहों को सड़क के बराबर करने के क्रम में लगभग बिल्डिंग का ग्राउंड फ्लोर जमीन के नीचे जाने को है. इसी फ्लोर में कुपोषण उपचार केंद्र चलता है, जिसमें चिकित्सक व कर्मियों के अलावा 15 बच्चे और उसकी मां रहती है. स्थिति यह है कि हल्की बारिश में मुख्य द्वार पर पानी जमा हो जाता है, जिससे अंदर जाना- आना मुश्किल हो जाता है. यही स्थिति रही तो बरसात के दिनों में यह तालाब में तब्दील हो जायेगी.
कुपोषण उपचार केंद्र उन बच्चों के लिए वरदान है, जो विभिन्न स्वास्थ्य मानकों के अनुरूप कुपोषित हैं, जिनका अपेक्षित शारीरिक विकास नहीं हुआ है. इस केंद्र में 15 कुपोषित बच्चों के लिए बेड की सुविधा है. एक साथ 15 बच्चों को भर्ती कर इलाज किया जाता है. केंद्र में इलाज होने के साथ- साथ अनुश्रवण भी किया जाता है. इलाज के बाद भी उनका फॉलोअप किया जाता है.
केंद्र में एक चिकित्सा प्रभारी, काउंसेलर के अलावा 8 नर्स व 2 चतुर्थवर्गीय कर्मचारी प्रतिनियुक्त हैं. यूनिसेफ के गाइडलाइन के अनुरूप बच्चे को आहार दी जाती है. विभाग की ओर से कुपोषित बच्चे की मां को प्रतिदिन 100 रुपये दिये जाते हैं. इसके अलावा अस्पताल प्रबंधन की ओर से सुबह का नाश्ता और दोपहर- रात का भोजन उपलब्ध कराया जाता है.
दुमका के सिविल सर्जन डाॅ अनंत कुमार झा कहते हैं कि बिल्डिंग डिवीजन को इसकी सूचना दी गयी. अगर यह रहने योग्य नहीं है, तो दूसरे स्थान को चयनित कर उस जगह कुपोषण उपचार केंद्र को शिफ्ट किया जायेगा. इससे पहले पुराना सदर अस्पताल परिसर स्थित भवन में शिफ्ट कराने की योजना बनी थी, लेकिन उसे कोविड-19 अस्पताल बनाया गया है. इसलिए उस बिल्डिंग में शिफ्ट नही किया जा सका था.
Posted By : Samir ranjan.
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